गाजियाबाद में अवैध स्पीड ब्रेकर पर नकेल, अब पुलिस की अनुमति के बिना नहीं बनेंगे ब्रेकर
गाजियाबाद में ब्रेकर से हुई दो मौतों के बाद नगर निगम ने नया नियम लागू किया है। अब किसी भी ब्रेकर के निर्माण के लिए पुलिस की अनुमति अनिवार्य होगी, जिसस ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर। सौजन्य- ai generated
HighLights
गाजियाबाद में ब्रेकर निर्माण के लिए पुलिस अनुमति अनिवार्य
दो मौतों के बाद नगर निगम ने उठाया यह कदम
10,000 से अधिक अवैध ब्रेकरों का होगा सर्वे
आदित्य त्रिपाठी, गाजियाबाद। इंदिरापुरम और राजेंद्र नगर में दो ब्रेकर के कारण सड़क हादसे में दो लोगों की जान जाने के बाद नगर निगम ने लोगों की सुरक्षा के हित में बड़ा कदम उठाया है। पहली बार अब नगर निगम या निजी स्तर पर ब्रेकर बनवाने के लिए स्थानीय लोगों को पुलिस से अनुमति लेनी होगी।
नगर निगम ने जानलेवा अवैध ब्रेकर का सर्वे भी कराएगा। जिससे जानलेवा ब्रेकर के बारे में पता चल सके। मानक के विपरीत बने ब्रेकर से केवल जान ही नहीं जाती है बल्कि इससे कमर दर्द और वाहनों की आयु भी कम होती है। मुख्य सड़कों पर केवल टेबल टाप ब्रेकर बनाने का नियम लागू हैं।
गली-मोहल्लों में लोगों ने बना दिए 10 इंच तक ऊंचे ब्रेकर
नगर निगम क्षेत्र में स्थानीय लोगों ने जगह-जगह सड़कों पर अपनी सुविधा के लिए निजी स्तर पर ऊंचे-ऊंचे ब्रेकर बना दिए हैं। वहीं, कई बार सड़क निर्माण के दौरान ठेकेदार भी स्थानीय लोगों के दबाव में अतिरिक्त ब्रेकर बना देते हैं। ऐसे ब्रेकर न केवल यातायात को प्रभावित करते हैं, बल्कि दोपहिया वाहन चालकों के लिए गंभीर खतरा भी बन जाते हैं।
नगर निगम क्षेत्र में कुल 9,313 पक्की सड़कें हैं, जिन पर 10 हजार से अधिक ब्रेकर बने हुए हैं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे ब्रेकरों की भी है जो निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं हैं। कई गली-मोहल्लों में लोगों ने 10 इंच तक ऊंचे ब्रेकर बना दिए हैं, जिससे वाहन अचानक उछल जाते हैं और दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
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अधिकारियों का कहना है कि मानकों के अनुसार मुख्य सड़कों पर केवल टेबल टाप ब्रेकर बनाए जा सकते हैं। इनके निर्माण के लिए निर्धारित ऊंचाई, चौड़ाई और संकेतक भी अनिवार्य हैं। मानक से अधिक ऊंचे या बिना संकेत वाले ब्रेकर दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं। इसके अलावा ऐसे ब्रेकर वाहनों के सस्पेंशन, टायर और अन्य पुर्जों को नुकसान पहुंचाते हैं तथा लोगों में कमर और रीढ़ संबंधी समस्याएं भी बढ़ाते हैं।
वहीं गली-मोहल्ले में बनने वाले ब्रेकर भी मानक के दायरे में आएंगे। ब्रेकर बनाने में मनमानी नहीं चलेगी। भविष्य में कोई भी संस्था या व्यक्ति सड़क पर ब्रेकर बनवाना चाहता है तो उसे पहले पुलिस की अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही संबंधित विभाग निर्धारित मानकों के अनुरूप ब्रेकर का निर्माण करेगा। इससे सड़क सुरक्षा बेहतर होगी।
नगर निगम की सड़कों की स्थिति और ब्रेकर
- 2809.13 किलोमीटर है नगर निगम की सड़कों की लंबाई है।
- 9313 नगर निगम की पक्की सड़के हैं।
- 1400 किलोमीटर पक्की सड़कों की लंबाई है।
- 10000 से अधिक कमर तोड़ ब्रेकर बने हैं
- 16 स्पीड ब्रेकर नगर निगम की सड़कों पर बने हैं
टेबल टाप ब्रेकर की डिजाइन और माप
कुल लंबाई - 6 से 10 मीटर
ऊंचाई - 75 से 100 मिमी (7.5 से 10 सेमी)
रैंप (ढलान) की लंबाई - 1.5 से 02 मीटर (दोनों साइड)
टाप की लंबाई (समतल भाग) - 03 से 06 मीटर
कमर तोड़ ब्रेकर और टेबल टाप ब्रेकर में अंतर
विशेषता - कमर तोड़ ब्रेकर - टेबल टाप ब्रेकर
ऊंचाई- 15–25 सेमी तक- 7.5–10 सेमी
लंबाई- 0.4–0.8 मीटर - 6–10 मीटर
वाहन झटका- बहुत ज्यादा - बहुत कम
आराम और सुरक्षा- कम - अधिक
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अवैध ब्रेकर बनाने पर रोक लगेगी। ब्रेकर बनवाने के लिए पुलिस की अनुमति अनिवार्य कर दी गई है। निजी स्तर पर भी कोई भी व्यक्ति कमरतोड़ ब्रेबर नहीं बनवा सकेगा।
- एनके चौधरी, मुख्य अभियंता, निर्माण विभाग