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    गाजियाबाद के सरकारी स्कूलों में शुद्ध पेयजल है न स्वच्छ शौचालय, दूषित पानी पीने को मजबूर नौनिहाल

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 09:10 PM (IST)

    गाजियाबाद के सरकारी स्कूलों में हजारों छात्र-छात्राएं शुद्ध पेयजल और स्वच्छ शौचालयों से वंचित हैं, जिससे उन्हें दूषित पानी पीना पड़ रहा है और जर्जर सु ...और पढ़ें

    दूषित पानी पीने को मजबूर बच्चे। जागरण

    दूषित पानी पीने को मजबूर बच्चे। जागरण

    HighLights

    1. गाजियाबाद के सरकारी स्कूलों में शुद्ध पेयजल की गंभीर कमी।

    2. अधिकांश शौचालयों की हालत जर्जर, छात्राओं को विशेष परेशानी।

    3. हजारों छात्र-छात्राएं दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

    जागरण संवाददाता, गाजियाबाद। केंद्र से लेकर प्रदेश सरकार जहां घर घर शौचायल बनवाने की बात करती है, वहीं गाजियाबाद के कई ऐसे सरकारी स्कूल हैं जहां बच्चों के लिए शौचालय की कई व्यवस्था नहीं हैं।

    कुछ विद्यालयों में शौचालय तो हैं, लेकिन उनकी हालत इतनी जर्जर है कि उनका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। अब बात पेयजल व्यवस्था की करें तो जिले के कुछ ही सरकारी विद्यालयों में शुद्ध पेयजल विद्यार्थियों को नसीब हो रहा है। जब विद्यार्थियों को मूलभूत सुविधाएं ही नहीं मिल रही हैं तो उनके उज्जवल भविष्य की कल्पना करना भी बेईमानी होगा।

    जिले के परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले हजारों छात्र-छात्राओं को आज भी शुद्ध पेयजल और स्वच्छ शौचालय की सुविधा नसीब नहीं हो रही है।

    अधिकांश स्कूल में नहीं है वाटर कूलर या आरओ

    अधिकांश विद्यालयों में आरओ या वाटर कूलर की व्यवस्था नहीं होने के कारण बच्चे सीधे हैंडपंप और समर्सिबल का पानी पीने को मजबूर हैं। कई क्षेत्रों में भूजल का टीडीएस 500 से 700 के बीच होने के कारण यह पानी पीने योग्य मानकों पर खरा नहीं उतरता, लेकिन इसके बावजूद विद्यार्थियों के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है।

    बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में कुछ स्थानों पर सामाजिक संस्थाओं और स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से आरओ और वाटर कूलर लगाए गए हैं, लेकिन ऐसे विद्यालयों की संख्या बेहद कम है।

    अधिकांश स्कूलों में बच्चे हैंडपंप या समर्सिबल के पानी से ही प्यास बुझाते हैं। विद्यालयों में शुद्ध पेयजल के साथ-साथ मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है। कई स्कूलों में शौचालय जर्जर हैं, जबकि कहीं उनकी संख्या विद्यार्थियों की तुलना में बेहद कम है। इससे विशेषकर छात्राओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

    शौच के लिए विद्यालय परिसर से बाहर जाते हैं विद्यार्थी

    उच्च प्राथमिक विद्यालय, रसूलपुर सिकरोड़ा, विकासखंड रजापुर में 622 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। इनमें 278 छात्र और 344 छात्राएं हैं। विद्यालय में शुद्ध पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। विद्यार्थी आज भी हैंडपंप का पानी पीने को मजबूर हैं। विद्यालय परिसर में प्राथमिक विद्यालय का शौचालय जर्जर होने के कारण उपयोग के लायक नहीं है।

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    वहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय में बने शौचालयों की संख्या विद्यार्थियों के अनुपात में बेहद कम है। कई बार अधिक संख्या होने पर बच्चों को शौच के लिए विद्यालय परिसर से बाहर जाना पड़ता है, जो सुरक्षा की दृष्टि से गंभीर चिंता का विषय है। समस्या से ग्राम प्रधान, विद्यालय प्रबंधन समिति, खंड शिक्षा अधिकारी तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को कई बार अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अब तक समाधान नहीं हो सका है।

    समर्सिबल व हैडपंप से पानी पीते हैं बच्चे

    लोनी क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय बेहटा में 1,062 विद्यार्थियों का नामांकन है और 23 शिक्षकों की तैनाती है। विद्यालय में आरओ या अन्य कोई शुद्ध पेयजल की व्यवस्था नहीं है। यहां विद्यार्थी हैडपंप से पानी पीते हैं। इसके अलावा प्राथमिक विद्यालय मधुबन चौकी में 266 विद्यार्थियों का नामांकन है जबकी आठ शिक्षकों की तैनाती है। यहां विद्यार्थी समर्सिबल का पानी पीते हैं। वहीं प्राथमिक विद्यालय अनूप विहार में भी शुद्ध पेयजल के लिए आरओ की व्यवस्था नहीं है।

    जर्जर भवनों एवं शौचालयों की पुनर्निर्माण एवं जीर्णोद्धार के लिए शासन को बजट का प्रस्ताव भेजा जा चुका है। जहां ज्यादा समस्या है वहां प्राथमिकता से समाधान कराया जाएगा।
    - ओपी यादव, बेसिक शिक्षा अधिकारी गाजियाबाद