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    गाजियाबाद में एस्ट्रो टर्फ होता तो यहां के कई खिलाड़ी इंडिया टीम की जर्सी में होते: करन गौतम

    Updated: Wed, 10 Jun 2026 09:31 AM (IST)

    एशिया हॉकी कप में स्वर्ण पदक विजेता करन गौतम ने गाजियाबाद में एस्ट्रो टर्फ की कमी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि बेहतर सुविधाओं से शहर के कई और खिल ...और पढ़ें

    हॉकी खिलाड़ी करन गौतम मां रीता, पिता मनोज गौतम व सीनियर हॉकी खिलाड़ी केशव त्यागी के साथ। जागरण

    हॉकी खिलाड़ी करन गौतम मां रीता, पिता मनोज गौतम व सीनियर हॉकी खिलाड़ी केशव त्यागी के साथ। जागरण 

    शाहनवाज अली, गाजियाबाद। सुबह से रात तक बस हॉकी का जुनून ने ही करन गौतम की अंडर-18 भारतीय टीम में जगह पक्की की। जापान में आयोजित हुए एशिया हॉकी कप में मेजबान टीम को फाइनल में हराने वाली भारतीय टीम के फारवर्ड और मिड फिल्डर करन गौतम ने चोट की परवाह किए बिना जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    स्वर्ण पदक के साथ गाजियाबाद के विजय नगर पहुंचे करन गौतम ने दैनिक जागरण के उप मुख्य संवाददाता शाहनवाज अली से जीत की कामयाबी से लेकर हॉकी के खे सुविधा और संसाधनों पर बात की। प्रस्तुत है बातचीत के प्रमुख अंश...

    आपने गाजियाबाद को छोड़ मध्य प्रदेश हॉकी अकादमी को क्यों चुना?

    गाजियाबाद को उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से एक जनपद एक खेल के तहत हॉकी मिला है। खेल विभाग की ओर से एस्ट्रो टर्फ की फाइल जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद यहां के बजाए नोएडा में एस्ट्रो टर्फ की सौगात मिली है।

    यहां के खिलाड़ियों को दिल्ली अभ्यास के लिए जाना पड़ता है। दिल्ली अभ्यास किया, लेकिन रोज-रोज जाने में पूरी एनर्जी रास्ते में ही खर्च हो रही थी। इसलिए कड़ी मेहनत के बूते वर्ष 2022 में मध्य प्रदेश हॉकी अकादमी में चयन हुआ और वहीं से इंडिया टीम में चयन हुआ।

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    यहां तक पहुंचने में आपको किन परिस्थियों और परेशानियों का सामना करना पड़ा?

    जेकेजी इंटरनेशनल स्कूल में स्पोर्ट्स पीरियड के दौरान हॉकी खेलने का मौका मिला तो टाइमपास कब जिंदगी बन गया पता ही नहीं चला। महामाया स्टेडियम साइकिल से जून की गर्मी में नियमित अभ्यास के लिए जाता था। परिवार व सीनियर खिलाड़ियों से काफी सपोर्ट मिला। बीच में हॉकी अकादमी जबलपुर गया, जहां करीब छह माह अकेले रहकर अभ्यास किया।

    रात डर लगता था और मम्मी से दो-दो बजे तक बात करता और सो जाता था। फिर से सुबह चार बजे उठकर अभ्यास के लिए जाता। एक्सीडेंट हुआ रिकवर किया और फिर से मैदान में उतरा। एशिया चैंपियनशिप में भी इंजरी को खुद पर हावी नहीं होने दिया।

    गाजियाबाद में हॉकी खेल सुविधा और संसाधनों को लेकर क्या कहेंगे?

    पिछले काफी सालों से यहां के हॉकी खिलाड़ियों की ओर से एस्ट्रो टर्फ की मांग की जा रही है। यहां हॉकी का साई सेंटर तो खुला, लेकिन खिलाड़ियों को बेहतर अभ्यास के लिए मैदान नहीं मिल सका।

    गाजियाबाद में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन खेल संसाधन व सुविधाएं न मिल पाने की वजह से बहुत सी खेल प्रतिभाओं ने जहां का तहां दम तोड़ दिया। मेरे अलावा कई अन्य खिलाड़ी टीम इंडिया की नीली जर्सी पहने देश के लिए खेलते हुए नजर आते।

    करन की उपलब्धियां

    • वर्ष 2021 : लखनऊ में नेशनल हॉकी प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया
      वर्ष 2022 : मध्य प्रदेश से आल इंडिया हॉकी प्रतियोगिता में लगातार अभी तक
      वर्ष 2023 : नेशनल हॉकी प्रतियोगिता में 14 गोल लगाकर टाप स्कोरर का अवार्ड
      वर्ष 2023 व 2024 : वेस्ट जोन हॉकी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक के साथ 18 व 21 गोल के साथ टाप स्कोरर अवार्ड
      वर्ष 2024 : नेशनल हॉकी प्रतियोगिता में बेस्ट मिड फिल्डर आफ टूर्नामेंट का अवार्ड
      वर्ष 2024 : आल इंडिया इंटर जोन प्रतियोगिता में बेस्ट प्लेयर का अवार्ड
      वर्ष 2024 व 2025 : पुणे इनकम टैक्स टीम की ओर से गेस्ट प्लेयर के रूप में बेस्ट प्लेयर अवार्ड
      वर्ष 2024 व 2025 : आल इंडिया वेस्ट सेंट्रल रेलवे की टीम में गेस्ट प्लेयर में प्लेयर आफ द टूर्नामेंट अवार्ड
      वर्ष 2025 : नेशनल हॉकी प्रतियोगिता में प्लेयर आफ टूर्नामेंट का अवार्ड
      नोट : इसके अलावा आल इंडिया नेहरू हॉकी कप जूनियर व सब जूनियर में दो स्वर्ण व दो रजत पदक जीतने वाली मध्य प्रदेश टीम का हिस्सा रहे।

    गाजियाबाद में 1996 से स्कूलों में हॉकी शुरू हो गई थी, जो करीब 10 से अधिक स्कूलों में खेली जा रही है। यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है। प्रदेश सरकार ने गाजियाबाद को योजना के तहत हॉकी के लिए चुना है। यहां एस्ट्रो टर्फ मिले तो हर साल यहां जूनियर, सब जूनियर और सीनियर तक हॉकी प्रतियोगिता आयोजित कराई जा सकती हैं। इससे हॉकी को बढ़ावा मिलेगा।


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    - पंकज त्यागी, अंतरराष्ट्रीय हॉकी अंपायर