जिन हाथों से मिलती मुखाग्नि, उन्हीं हाथों से मिली मौत; मोदीनगर हत्याकांड की Inside Story
मोदीनगर में संपत्ति के लालच में बेटे निखिल ने अपने पिता हरिओम की गोली मारकर हत्या कर दी। पिता ने बेटे को काफी प्यार और समर्थन दिया था, लेकिन बेटे ने न ...और पढ़ें
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पिता-पुत्र का फाइल फोटो। जागरण
HighLights
बेटे निखिल ने संपत्ति के लिए पिता हरिओम को मारा।
पिता ने बेटे को दो दुकानों का किराया, जमीन दी थी।
मोदीनगर में रिश्तों के कत्ल की यह दूसरी घटना है।
जागरण संवाददाता, मोदीनगर (गाजियाबाद)। इससे बड़ा दुर्भाग्य किसी पिता के लिया क्या होगा कि जिन हाथों से उन्हें मुखाग्नि मिलती उन्हीं हाथों से मौत मिली। बुढ़ापे का सहारा बनने के बजाए बेटा ही पिता की जान का दुश्मन बन गया।
अपने हित के सामने निखिल को पिता की अहमियत शून्य दिखी। जिस पिता की ऊंगली पकड़कर निखिल ने अपने पैरों पर खड़ा होना सीखा, उसी पिता को गाेली मारते हुए निखिल के हाथ नहीं कांपे। संपत्ति की चाह ने पिता-पुत्र के रिश्तों को दरकिनार करके केवल निजी स्वार्थ को आगे रखा। वह संपत्ति जो भविष्य में निखिल को मिलनी ही थी। उसे जल्दी पाने की मंशा ने पिता को रास्ते से हटाने से भी परहेज नहीं किया।
निखिल से था अधिक लगाव
हरिओम का नीशू के मुकाबले निखिल से अधिक लगाव था। नीशू को गोली मामले में हरिओम ने निखिल का बचाव किया। उसके साथ खड़े रहे। उसी की खुशी के लिए दो दुकानों का किराया व 25 बीघा जमीन की कमाई दी। लेकिन फिर भी निखिल ने पिता के प्यार को नहीं समझा।
रिश्तों का भी कत्ल हुआ
हरिओम ने कभी भी नहीं सोचा था कि इसी बेटे के हाथों उनकी मौत लिखी है। मोदीनगर में एक हफ्ते के भीतर हुई हत्या की दो घटनाओं में रिश्तों का भी कत्ल हुआ है। वे रिश्ते जो एक-दूसरे के बचाव में खड़े होते है यहां वे ही एक-दूसरे के दुश्मन बन गए।
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फफराना रोड पर ससुर अनार सिंह की हत्या का मामला शांत अभी नहीं था कि पिता की हत्या का भी मामला सामने आ गया। दोनों घटनाओं में मानवता शर्मशार हुई।