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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 10, 2023 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले में आरोपी रजनी प्रिया गाजियाबाद से गिरफ्तार, CBI कोर्ट में हुई पेशी

    By Abhishek SinghEdited By: Geetarjun
    Updated: Thu, 10 Aug 2023 07:15 PM (IST)

    बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले में आरोपित रजनी प्रिया को सीबीआई ने बृहस्पतिवार को साहिबाबाद कोतवाली क्षेत्र के राजेंद्र नगर से गिरफ्तार किया है। इसके ...और पढ़ें

    बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले में आरोपी रजनी प्रिया गाजियाबाद से गिरफ्तार, CBI कोर्ट में हुई पेशी
    बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले में आरोपी रजनी प्रिया गाजियाबाद से गिरफ्तार, CBI कोर्ट में हुई पेशी

    HighLights

    1. बिहार के इस चर्चित घोटाले में 27 आरोपित हैं, इनमें से 12 आरोपित जेल में हैं।
    2. बिहार के इस घोटाले में हुआ है अरबों रुपयों का खेल।

    गाजियाबाद, जागरण संवाददाता। बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले में आरोपित रजनी प्रिया को सीबीआई ने बृहस्पतिवार को साहिबाबाद कोतवाली क्षेत्र के राजेंद्र नगर से गिरफ्तार किया है। इसके बाद उनको गाजियाबाद सीबीआई कोर्ट में पेश किया गया और दो दिन की ट्रांजिट रिमांड पर बिहार ले जाया गया है।

    पटला स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने 28 फरवरी को भागलपुर से पूर्व जिलाधिकारी केपी रमैया और घोटाले की मनोरमा देवी के बेटे अमित कुमार और बहू रजनी प्रिया की गिरफ्तारी के लिए वारंट जारी किया था। अरबों रुपये के इस घोटाले में 27 आरोपित हैं, इनमें से 12 आरोपित जेल में हैं।

    कुर्की वारंट भी था जारी

    सीबीआई कोर्ट ने तीन आरोपित केपी रमैया, अमित कुमार और रजनी प्रिया के खिलाफ कुर्की वारंट भी जारी किया था। इसके बाद सीबीआई ने अमित और रजनी प्रिया की 13 चल व अचल संपत्ति की कुर्की भी कर चुकी है।

    ये है घोटाला

    भागलपुर में 2003 में जिलाधिकारी रहते हुए केपी रमैया ने सभी सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं को पत्र जारी कर सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के बैंकखाते में रुपये जमा कराने के लिए कहा था। इसके बाद इस एनजीओ के बैंकखाते में रुपये जमा कराए गए थे।

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    सृजन एनजीओ की सचिव मनोरमा देवी ने अपनी मृत्यु से पहले ही बहू रजनी प्रिया को एनजीओ का सचिव बना दिया था, इससे खफा लोगों ने सृजन के बैंकखाते में जमा रुपये वापस नही किए और भू-अर्जन का खाता बाउंस हो गया। तत्कालीन जिलाधिकारी आदेश तितरमारे ने शक के आधार पर जांच कराई तो घोटाला सामने आया।