NGT का बड़ा फैसला! शोधन जल पाइपलाइन परियोजना को हरी झंडी, 1400 औद्योगिक इकाइयों को मिलेगा पानी
एनजीटी ने साहिबाबाद शोधन जल पाइपलाइन परियोजना पर दायर आवेदन का निस्तारण किया, जिसमें पाया गया कि पर्यावरणीय मानकों का अनुपालन किया गया है। ...और पढ़ें

सांकेतिक तस्वीर एआई जनरेटेड
जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दायर साहिबाबाद शोधन जल पाइपलाइन परियोजना संबंधी आवेदन का पांच अगस्त को सुनवाई के दौरान निस्तारण किया गया।
मामले की सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव, अध्यक्ष तथा माननीय डा. अफरोज अहमद विशेषज्ञ सदस्य की पीठ ने की।
निष्पादन आवेदन में आरोप लगाया गया था कि साहिबाबाद साइट-4 औद्योगिक क्षेत्र में उपचारित सीवेज जल की आपूर्ति के लिए पाइपलाइन बिछाने के दौरान पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन किया गया और अधिकरण के 30 मई 2024 के आदेश का पालन नहीं हुआ।
आवेदन पर एनजीटी के निर्देशों के अनुपालन में उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोउर् ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की।
यूपीपीसीबी के निरीक्षण में पाया गया कि परियोजना के तहत इंदिरापुरम स्थित 56 एमएलडी सीवेज शोधन संयंत्र से 40 एमएलडी तृतीयक उपचारित जल साहिबाबाद के 1,400 से अधिक औद्योगिक इकाइयों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है, जिससे भूजल दोहन में कमी आएगी।
परियोजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) माडल पर मैसर्स गाजियाबाद वाटर साल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा संचालित की जा रही है।
पाइपलाइन बिछाने का कार्य लगभग 99.03 प्रतिशत पूरा हो चुका है और 1,330 औद्योगिक इकाइयों को कनेक्शन जारी किए जा चुके हैं। निरीक्षण के दौरान पाया गया कि खोदाई वाले गड्ढों को भरकर समतल कर दिया गया है और क्षतिग्रस्त सड़कों को पूर्व स्थिति में बहाल कर दिया गया है।
निर्माण कार्य लगभग पूर्ण होने के कारण निरीक्षण के समय मिट्टी के अवैध उत्खनन या उधार मिट्टी लेने जैसी कोई गतिविधि नहीं पाई गई।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2023 में ग्रेडेड रिस्पान्स एक्शन प्लान (ग्रेप) के उल्लंघन पर परियोजना से संबंधित पक्ष पर 25 लाख रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जा चुका है। रिपोर्ट का परीक्षण करने के बाद अधिकरण ने माना कि उसके पूर्व आदेश का पालन किया जा चुका है।