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    दिल्ली HC ने दो साल पहले ठुकराई थी इच्छामृत्यु की मांग, SC ने शेक्सपियर की पंक्तियों के साथ दी यूथेनेसिया की अनुमति

    Updated: Wed, 11 Mar 2026 12:54 PM (IST)

    सुप्रीम कोर्ट ने भारत में पहली बार इच्छा मृत्यु को स्वीकृति दी है, जिसमें शेक्सपियर जैसे साहित्यकारों को उद्धृत किया गया। यह ऐतिहासिक फैसला दिल्ली हाई ...और पढ़ें

    दो साल पहले हाईकोर्ट ने किया था हरीश को इच्छा मृत्यु देने से इनकार। जागरण

    दो साल पहले हाईकोर्ट ने किया था हरीश को इच्छा मृत्यु देने से इनकार। जागरण

    HighLights

    1. सुप्रीम कोर्ट ने भारत में इच्छा मृत्यु को ऐतिहासिक मंजूरी दी।

    2. दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले हरीश राणा की मांग ठुकराई थी।

    3. SC ने कॉमन कॉज दिशानिर्देशों के तहत अनुमति प्रदान की।

    जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। 'भगवान किसी भी इंसान से यह नहीं पूछता कि क्या उसे जीवन स्वीकार है; आपको इसे स्वीकार करना ही पड़ता है।' हेनरी के ये शब्द तब ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं, जब अदालतों के सामने यह प्रश्न आता है कि क्या किसी इंसान को मौत चुनने का अधिकार है। यहां शेक्सपियर की प्रसिद्ध पंक्तियां— 'जीना या मरना' भी प्रासंगिक हैं।

    यह पंक्तियां सुप्रीम कोर्ट के आज के उस ऐतिहासिक आदेश की हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने विश्व प्रसिद्ध साहित्यकारों को कोट करते हुए भारत में पहली बार इच्छा मृत्यु के लिए स्वीकृति दी है। हालांकि इसी मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने हरीश राणा को राहत नहीं दी थी।

    हरीश के परिवार ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर उनकी स्थिति की जांच करने और यह विचार करने के लिए एक चिकित्सा बोर्ड के गठन की मांग की थी कि क्या कॉमन कॉज बनाम केंद्र सरकार मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार जीवन रक्षक उपचार बंद किया जा सकता है।

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    हाई कोर्ट ने क्यों किया था इनकार

    हालांकि, हाई कोर्ट ने राहत देने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि हरीश राणा यांत्रिक जीवन रक्षक यंत्र पर नहीं थे और बाहरी सहायता के बिना स्वयं को जीवित रखने में सक्षम थे। कोर्ट ने यह भी कहा था कि चूंकि वे लाइलाज बीमारी से ग्रसित नहीं थे, इसलिए इच्छामृत्यु का प्रश्न ही नहीं उठता।

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    इसके बाद स्वजन ने 2024 में हाई कोर्ट के आदेश को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी थी और अपने बेटे के लिए एक प्राथमिक चिकित्सा बोर्ड के गठन की मांग की थी।