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क्यों एक माता-पिता ने अपने लाडले की जिंदगी नहीं, मौत की दुआ की? आपको झकझोर देगी हरीश राणा की दर्दनाक कहानी

Published: Wed, 11 Mar 2026 11:59 AM (IST)Updated: Tue, 24 Mar 2026 05:32 PM (IST)

हरीश राणा, जो 2013 से क्वाड्रिप्लेजिया से पीड़ित थे, के माता-पिता ने उनके दर्द से मुक्ति के लिए इच्छामृत्यु की ...और पढ़ें

बेड पर हरीश राणा और उनके माता-पिता। फोटो: आर्काइव

बेड पर हरीश राणा और उनके माता-पिता। फोटो: आर्काइव

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डिजिटल डेस्क, गाजियाबाद। महज 32 साल के हरीश राणा की हालत देखकर रूह कांप जाती है। उनके शरीर में कोई हरकत नहीं होती थी। हरीश 2013 से बिस्तर पर थे। वह कोमा में थे।

एक गंभीर हादसे के बाद हरीश क्वाड्रिप्लेजिया (100 प्रतिशत विकलांगता) से पीड़ित हो गए थे। उनका जीवन पूरी तरह से मशीनों और उपकरणों पर निर्भर हो गया।

उन्हें यूरिन बैग लगा था और ट्यूब के माध्यम से खाना दिया जाता था। उनके माता-पिता का कहना था कि अब वे अपने बेटे की लंबी उम्र की नहीं, बल्कि उसकी मुक्ति चाहते हैं। उनकी यह इच्छा आज (24 मार्च 2026) पूरी हो गई है।

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मां ने की थी इच्छामृत्यु की अपील, खारिज भी हुई थी 

हरीश की मां, निर्मला देवी ने कहा- कभी नहीं सोच सकते थे कि कभी ऐसी स्थिति भी आएगी कि जब बेटे की लंबी उम्र की नहीं बल्कि उसकी मुक्ति की दुआ करनी पड़ेगी।

उन्होंने उच्च न्यायालय में इच्छामृत्यु की अपील की थी, जिससे हरीश को उसके दर्दनाक जीवन से मुक्ति मिल सके। हालांकि, 8 जुलाई 2024 को उच्च न्यायालय ने इस अपील को खारिज कर दिया था।

हरीश का सपना टूटा

हरीश राणा, 2013 में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग में फाइनल ईयर के छात्र थे, कभी वेटलिफ्टिंग के फाइनल में हिस्सा लेने का सपना देखते थे। लेकिन एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे ने उनके सपनों को चकनाचूर कर दिया।

2013 के रक्षाबंधन के दिन हरीश अपनी बहन से बात कर रहे थे, तभी खबर आई कि वह अपने पीजी की चौथी मंजिल से गिर गए। इस हादसे ने उनका शरीर पूरी तरह निष्क्रिय कर दिया और वह कभी उठ नहीं पाए।

बेटे के इलाज के लिए संघर्ष

अशोक राणा, हरीश के पिता ने अपने बेटे के इलाज के लिए सभी संभव प्रयास किए। उन्होंने PGI चंडीगढ़, AIIMS, RML, लोक नायक, अपोलो और फोर्टिस जैसे बड़े अस्पतालों में हरीश का इलाज करवाया और सबसे अच्छे डॉक्टरों से इलाज कराया।

हरीश के इलाज पर हर महीने करीब 40,000 से 50,000 रुपये खर्च हो रहे थे। उन्होंने एक नर्स भी रखी थी, जिसकी वेतन 27,000 रुपये प्रति माह था। इसके बावजूद, उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही थी।

आर्थिक तंगी और मानसिक तनाव

63 वर्षीय अशोक राणा की पेंशन केवल 3,500 रुपये प्रति माह है। उनका छोटा बेटा आशीष एक निजी कंपनी में काम करता है, लेकिन परिवार के खर्चों को पूरा करना उनके लिए कठिन हो गया था।

2021 में दिल्ली स्थित अपना तीन मंजिला घर भी बेच दिया और अब पैसे नहीं बचे। उनके लिए हर दिन अपने बेटे के दर्द को देखना असहनीय हो गया था।

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सुप्रीम कोर्ट ने इच्छामृत्यु की मंजूरी दी

इच्छामृत्यु मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिसने हरीश राणा के लिए बुधवार (11 मार्च) को इच्छामृत्यु की मंजूरी दे दी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, एम्स में हरीश की इच्छामृत्यु की प्रक्रिया पूरी की गई। यह फैसला हरीश और उनके परिवार के लिए दर्द और तकलीफों से भरा हुआ है।

हरीश और माता-पिता का 13 साल का संघर्ष

हरीश का परिवार एक ऐसे मोड़ पर खड़ा था, जहां मौत को ही एकमात्र रास्ते के रूप में देखा जा रहा था। उनके माता-पिता के लिए 13 साल से हर दिन अपने बेटे को इस दर्द से जूझते हुए देखना असहनीय हो गया था। अब, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उनके बेटे को मुक्ति मिल गई है।

यह मामला न केवल एक परिवार के दर्दनाक संघर्ष की कहानी है, बल्कि यह समाज के सामने इच्छामृत्यु और जीवन के अंत से जुड़ी जटिलताओं को लेकर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है।

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