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    अफजाल अंसारी की राइफल जांच में उलझी पुलिस, लाइसेंस पर खंगाल रही 39 साल पुराने रिकॉर्ड

    Updated: Wed, 29 Jul 2026 10:37 PM (IST)

    पुलिस IS-191 गैंग से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों की जांच कर रही है, जिसमें सांसद अफजाल अंसारी की 1987 में खरीदी गई राइफल के विक्रय विवरण गायब मिले हैं। मूल ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. 1987 में खरीदी राइफल का विक्रय विवरण गायब मिला।

    2. लाइसेंस की मूल पत्रावली भी अभिलेखागार से लापता है।

    3. अफजाल अंसारी समेत तीन पर मुकदमा दर्ज हुआ।

    जागरण संवाददाता, गाजीपुर। आईएस-191 गैंग से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों की जांच में पुलिस अब उन हथियारों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है, जिनका रिकॉर्ड वर्षों पुराने अभिलेखों में अधूरा मिला है।

    इसी क्रम में सांसद अफजाल अंसारी के शस्त्र लाइसेंस संख्या 1188/पी-11 से जुड़ी एनपीबी राइफल संख्या 44657 की वर्तमान स्थिति पुलिस के लिए बड़ा सवाल बन गई है।

    जांच में सामने आया है कि वर्ष 1987 में खरीदी गई इस राइफल के विक्रय से संबंधित कोई अभिलेख उपलब्ध नहीं है। शस्त्र पंजिका में केवल ‘सोल्ड’ दर्ज है, लेकिन हथियार कब और किसे बेचा गया, इसका ब्योरा नहीं मिल सका।

    लाइसेंस की मूल पत्रावली ही गायब

    पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय के शस्त्र अभिलेखागार और एडीएम वित्त एवं राजस्व की जांच में लाइसेंस की मूल पत्रावली तथा खरीद-बिक्री संबंधी दस्तावेज भी उपलब्ध नहीं मिले। इसी कारण राइफल का भौतिक सत्यापन नहीं हो सका।

    लाइसेंस धारक से इस संबंध में स्पष्टीकरण मांगा गया था, लेकिन नोटिस मिलने के बाद भी कोई लिखित अथवा संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि अफजाल अंसारी को जिला मजिस्ट्रेट गाजीपुर की ओर से तीन शस्त्र लाइसेंस जारी किए गए थे।

    इनमें लाइसेंस संख्या 1188/पी-11 की जांच के दौरान वर्ष 1987 में एनपीबी राइफल संख्या 44657 की खरीद का उल्लेख मिला। इसके बाद इसी लाइसेंस पर अन्य हथियारों की खरीद-बिक्री भी दर्ज है। वर्ष 1990 में लाइसेंस अभिलेखों में राइफल के स्थान पर दूसरी राइफल खरीदे जाने का उल्लेख मिला।

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    पुलिस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि तत्कालीन शस्त्र लिपिकों की मिलीभगत से लाइसेंस संबंधी मूल अभिलेख और हथियारों की खरीद-बिक्री से जुड़े दस्तावेज गायब कराए गए, जिससे हथियारों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट न हो सके।

    इसी आधार पर कोतवाली में सांसद अफजाल अंसारी, तत्कालीन शस्त्र लिपिक गौरीशंकर लाल और सुग्रीव तिवारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

    मुख्तार अंसारी और आईएस-191 गैंग से जुड़े 51 शस्त्र लाइसेंसों पर जारी 145 हथियारों की जांच चल रही है। जांच में जहां-जहां अभिलेखों में अनियमितता या हथियारों के सत्यापन में दिक्कत सामने आएगी, वहां आगे भी कार्रवाई की जाएगी।

    तीन दशक बाद भी नहीं मिला राइफल का सुराग

    जांच में सामने आया कि राइफल संख्या 44657 वर्ष 1987 में खरीदी गई थी। करीब चार दशक बाद भी इसके विक्रय की प्रक्रिया, खरीदार और वर्तमान स्थिति से जुड़े दस्तावेज पुलिस को नहीं मिले। शस्त्र पंजिका में केवल ‘सोल्ड’ दर्ज होने के कारण जांच एजेंसी हथियार की पूरी कड़ी नहीं जोड़ सकी है।

    शस्त्र जांच में अब तक पांच मुकदमे

    आईएस-191 गैंग से जुड़े शस्त्र लाइसेंसों की जांच में अब तक पांच मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें सांसद अफजाल अंसारी के खिलाफ तीन, मुख्तार अंसारी की पत्नी अफ्शा अंसारी के खिलाफ एक तथा अन्य लाइसेंस धारकों व संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। जांच पूरी होने तक अन्य मामलों में भी मुकदमे दर्ज हो सकते हैं।

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