Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    गाजीपुर में मंगई नदी का पानी बना मुसीबत, तट के किसानों की फसल बर्बाद; पलायन को मजबूर

    Updated: Sun, 19 Apr 2026 09:07 PM (GMT+05:30)

    गाजीपुर के मुहम्मदाबाद क्षेत्र में शारदा सहायक नहर से असमय पानी छोड़े जाने के कारण मंगई नदी के तटवर्ती किसानों की फसलें बर्बाद हो गईं। ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    HighLights

    1. शारदा नहर से पानी छोड़ने पर खेतों में जलभराव।

    2. गेहूं, मसूर की फसलें बर्बाद, बुवाई में देरी।

    3. किसान मुआवजा, नदी सफाई और ऋण माफी की मांग।

    जागरण संवाददाता, गाजीपुर। मुहम्मदाबाद इलाके में मंगई नदी के तटवर्ती क्षेत्रों के किसानों को इस वर्ष भारी नुकसान का सामना करना पड़ा है। शारदा सहायक नहर से असमय पानी छोड़े जाने के कारण खेतों में जल जमाव हो गया, जिससे फसलों की बुवाई में करीब तीन महीने की देरी हो गई और फसलें समय पर तैयार नहीं हो सकीं।

    आमतौर पर अक्टूबर में होने वाली बुवाई इस बार जनवरी में हो पाई, जिसके कारण फसलों को पकने के लिए आवश्यक 120 से 130 दिनों का समय नहीं मिल सका।

    इसके अलावा अचानक बढ़ते तापमान और गर्म हवाओं के कारण पौधों के फूल मुरझा गए और फलियों में दाने नहीं बन पाए। परिणामस्वरूप सैकड़ों बीघा गेहूं और मसूर की फसलें खेतों में ही सूखकर बर्बाद हो गईं।

    प्रभावित ग्राम राजापुर के किसान मृत्युंजय राय उर्फ वुल्लू राय, सतीश चंद्र राय, कृपाशंकर राय, कैलाश राय, कृष्ण गोपाल राय, रणजीत राय, प्रेमनाथ राय, रामजतन राय और सरोज राय ने बताया कि यह समस्या पिछले करीब 35 वर्षों से बनी हुई है। हाटा, राजापुर, करीमुद्दीनपुर, सोनवानी और दौलतपुर जैसे गांवों की हजारों हेक्टेयर उपजाऊ भूमि हर साल जल जमाव से प्रभावित होती है।

    किसानों का कहना है कि पहले नदी का पानी आसानी से निकल जाता था, लेकिन पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण के बाद पानी के प्राकृतिक बहाव में बाधा उत्पन्न हो गई है, जिससे जल निकासी की समस्या और गंभीर हो गई है।

    किसानों ने मांग की है कि यदि नहर का पानी नदी में छोड़ा जाता है तो सरकार को नदी की नियमित सफाई, चौड़ीकरण और गहराई बढ़ाकर उसकी क्षमता भी बढ़ानी चाहिए। किसानों ने विशेषज्ञों की समिति बनाकर ठोस कार्ययोजना तैयार करने, प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने और कृषि ऋण माफ करने की भी अपील की है।

    खबरें और भी

    लगातार हो रहे नुकसान और अनिश्चित भविष्य के कारण क्षेत्र के किसान और कृषि मजदूर खेती छोड़कर शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। मंगई नदी के किनारे बसे गांवों में अब केवल खेत ही सूने नहीं हैं, बल्कि किसानों की उम्मीदें भी सूखती जा रही हैं।