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    गाजीपुर में अपनी ही पुलिस चौकी में तोड़फोड़ और जीप फूंकने की घटना के गवाह पुलिसकर्मी मुकर गए, पूर्व विधायक सहित 63 दोषमुक्त

    By Shivanand RaiEdited By: Abhishek sharma
    Updated: Wed, 03 Jun 2026 04:45 PM (IST)

    गाजीपुर में 2013 के हंसराजपुर पुलिस चौकी तोड़फोड़ और वाहन जलाने के मामले में 63 लोग बरी हो गए। पुलिस गवाहों के मुकर जाने और विरोधाभासी बयानों के कारण ...और पढ़ें

    गाजीपुर: पुलिस चौकी तोड़फोड़ मामले में गवाह पुलिसकर्मी पलटे, पूर्व विधायक सहित 63 बरी।

    गाजीपुर: पुलिस चौकी तोड़फोड़ मामले में गवाह पुलिसकर्मी पलटे, पूर्व विधायक सहित 63 बरी।

    HighLights

    1. गाजीपुर में 63 लोग पुलिस चौकी तोड़फोड़ मामले में बरी।

    2. पुलिस गवाहों ने आरोपितों को पहचानने से किया इनकार।

    3. पूर्व विधायक विजय कुमार सहित सभी को दोषमुक्त किया।

    जागरण संवाददाता, गाजीपुर। अपराध के मामले में मजबूत गवाही की बदौलत आरोपितों को सजा दिलवाने वाली पुलिस खुद अपने ही मुकदमे में गवाही से मुकर गई। हंसराजपुर पुलिस चौकी में तोड़फोड़ और दुल्लहपुर थानाध्यक्ष की गाड़ी फूंकने के मामले में गवाह आठ पुलिसकर्मियों के आरोपितों को पहचानने से इन्कार करने और विरोधाभासी बयान का लाभ आरोपित पक्ष को मिला।

    मंगलवार को एडीजे कोर्ट ने इस घटना में पूर्व विधायक विजय कुमार और कम्युनिष्ट नेता विजय बहादुर सिंह समेत 63 महिला-पुरुष को दोषमुक्त करार दिया है। हालांकि अभियोजना पक्ष अपील की संभावना को भी तलाश रहा है। घटनाक्रम के अनुसार वर्ष 2013 में जंगीपुर थाना क्षेत्र के नसीरपुर में प्रेम प्रसंग के मामले में पुलिस एक युवक को हिरासत में लेकर पिटाई की थी। आरोप था कि पुलिस की पिटाई से युवक की मौत हो गई थी।

    उस समय गुस्साई भीड़ ने शव को नसीरपुर सड़क पर रखकर जाम लगा दिया था। उग्र भीड़ ने कुछ दूरी पर स्थित हंसराज पुलिस चौकी पर तोड़फोड़ व आगजनी की। हजारों की भीड़ ने थानाध्यक्ष दुल्लहपुर श्रीराम सिंह की गाड़ी फूंक दी थी। घटना को लेकर थाना जंगीपुर में दो मुकदमे दर्ज हुए। एक मुकदमे थाने के उपनिरीक्षक पलटू राम ने तोड़फोड़ का दर्ज कराया, जबकि दूसरा मुकदमा चौकी इंचार्ज हंसराजपुर दिनेश कुमार ने लिखवाया था।

    इसके साथ ही मृतक युवक के पिता ने भी तत्कालीन थानाध्यक्ष जंगीपुर रामस्वरूप वर्मा व अन्य के खिलाफ मौत का मामला पंजीकृत कराया था। हैरानी की बात यह थी कि जिस थानाध्यक्ष रामस्वरूप वर्मा के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था, उन्होंने ही तीनों मुकदमें की विवेचना की। थानाध्यक्ष ने खुद के 302 के मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगा दी, जबकि दोनों मुकदमों में 25 नामजद सहित 63 महिला व पुरुष के खिलाफ आरोप पत्र बनाकर एडीजे प्रथम के न्यायालय में दाखिल कर दिया।

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    पूर्व विधायक विजय कुमार और कम्युनिस्‍ट नेता विजय बहादुर सिंह प्रमुख रहे। अभियोजन पक्ष ने पुलिस के आठ गवाहों को पेश किए। सभी के बयान में विरोधाभास था। साथ ही इन गवाहों ने साफ कहा कि इतनी भीड़ थी मारपीट-आगजनी व तोड़फोड़ करने वालों को पहचान नहीं पाए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता जितेंद्र बहादुर सिंह का कहना है कि कोर्ट ने सुनवाई के दौरान गवाहों के बयान में विरोधाभास पाया है। इसकी के आधार पर न्यायालय ने भी को दोषमुक्त कर दिया है।