गाय को कुत्ते ने काटा, दूध पीने वाले परिवार के 9 सदस्यों में रेबीज का डर; सभी अस्पताल पहुंचे
गोंडा में कुत्ते द्वारा गाय को काटने के बाद, उसके दूध का सेवन करने वाले एक परिवार के नौ सदस्य रेबीज के डर से एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने अस्पताल पहुंचे।

ये तस्वीर एआई द्वारा जनरेट की गई है।

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जागरण संवाददाता, गोंडा। मौसम में बदलाव के साथ ही कुत्ते, बंदर व सियार का व्यवहार भी बदलने लगा है। पखवारे भीतर करीब पांच सौ लोग इन जानवरों का शिकार हो चुके हैं। मोतीगंज के गुलरिया के हरहरा गांव का रहने वाला एक परिवार रेबीज की आशंका व चिंता से जूझ रहा है।
इन लोगों ने जिस गाय का दूध पिया, उसे कुत्ते ने काटा था। अब गाय का व्यवहार बदलने पर रेबीज की आशंका को लेकर मंगलवार को परिवार के नौ लोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र काजीदेवर पहुंचे और एंटी रेबीज इंजेक्शन (एआरवी) लगवाया।
वही खरगूपुर में कुत्ते के काटने से रोली घायल हो गई, जिससे गांव में दहशत का माहौल है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अंतर्गत कहला गांव के रामचरित्र ने बताया कि उनकी बेटी रोली खेत में धान की रोपाई कर रही थी। इसी दौरान कुत्ते ने उसे काट लिया।
मोतीगंज के गुलरिया के हरहरा के रहने वाले योगेश तिवारी ने बताया कि वे गाय को गांव के बाहर तालाब के पास बांधते थे, जहां गाय को कुत्ते ने काट लिया। पहले परिवार अनभिज्ञ रहा। रविवार से गाय ने अजीब हरकत करनी शुरू कर दी।
वह जमीन पर माथा व शरीर रगड़ने जैसी हरकत करने लगी। मुंह से लार टपकने लगा। इसके बाद रेबीज की आशंका को लेकर मंगलवार की सुबह दूध पीने वाले एआरवी लगवाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने लगे।
अधीक्षक डॉ. आलोक सिंह ने बताया कि गांव के योगेश तिवारी, प्रतीक तिवारी, कार्तिक तिवारी, वंदना तिवारी, रागिनी और पूनम को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया गया है। खरगूपुर के कहला गांव के रोजगार सेवक सुरेंद्र मिश्र ने बताया कि पप्पू वर्मा की गाय, धनीराम वर्मा की भैंस और पड़वा को कुत्ते ने काटा था, जिनकी एक माह के भीतर मौत हो गई।
मेडिकल कॉलेज में 25 जून से नहीं है एआरवी
गोंडा : मेडिकल कालेज से संबद्ध बाबू ईश्वर शरण चिकित्सालय में एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) का स्टाक 25 जून से खत्म है। बजट के अभाव में एआरवी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। कुत्ता और बंदर काटने पर लोग बाजार से वैक्सीन खरीदकर लगवाने को मजबूर हैं।
यहां प्रतिदिन 100 से 150 लोग वैक्सीन लगवाने आते हैं। अभावग्रस्त लोगों को अस्पताल से बैरंग वापस लौटना पड़ रहा है। मेडिकल कालेज से संबद्ध चिकित्सालय के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. अनिल तिवारी ने कहा कि एआरवी खत्म होने की सूचना उच्चाधिकारियों को दी गई है।
मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग के सहायक आचार्य डॉ. एजाज अहमद ने बताया कि दूध से रेबीज नहीं होता है इसलिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। संक्रमित गाय के दूध को उबाल कर पीया गया है तो बिल्कुल दिक्कत नहीं है। यदि गाय में रेबीज के लक्षण है तो उसका दूध न पीएं। कोई आशंका है तो एंटी रेबीज इंजेक्शन की खुराक भी लगवा लें।
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