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    डेढ़ करोड़ की एकीकृत कृषि परियोजना से बदलेगी किसानों की तकदीर, पर्यावरण भी रहेगा सुरक्षित

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 03:14 PM (IST)

    आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय, सकरौरा ने गोंडा में किसानों की आय दोगुनी करने के लिए 1.5 करोड़ रुपये की एकीकृत कृषि परियोजना तैयार की है। ...और पढ़ें

    इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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    HighLights

    1. 1.5 करोड़ की एकीकृत कृषि परियोजना गोंडा में।

    2. किसानों की आय दोगुनी करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य।

    3. पर्यावरण-अनुकूल खेती से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ेगी।

    संवाददाता सूत्र, कर्नलगंज (गोंडा)। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय के अंतर्गत सकरौरा स्थित कृषि महाविद्यालय ने क्षेत्र के किसानों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने और खेती को अधिक लाभदायक बनाने के लिए एक महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। महाविद्यालय के मलौली स्थित 105 बीघे के विशाल फार्म पर 1.50 करोड़ रुपये के बजट से एक अत्याधुनिक एकीकृत कृषि प्रणाली परियोजना का खाका खींचा गया है।

    इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेती के साथ-साथ पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन जैसे व्यवसायों को जोड़कर किसानों की आय को दोगुना करना है। इस परियोजना के तहत किसानों को केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर न रखकर एक बहुआयामी कृषि मॉडल से जोड़ा जाएगा।

    एक ही स्थान पर फसल उत्पादन, डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन, बत्तख पालन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों को एकीकृत किया जाएगा। इस समन्वय से न केवल किसानों की आजीविका सुरक्षित होगी, बल्कि उन्हें साल भर नियमित आय और रोजगार भी मिलता रहेगा।

    जोखिम की संभावना न के बराबर

    विशेषज्ञों के अनुसार इस मॉडल में जोखिम की संभावना न के बराबर है। परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका पर्यावरण-अनुकूल और किफायती होना है। खेतों से निकलने वाले कृषि अवशेषों और पशुओं के गोबर का पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) करके जैविक खाद और बायोगैस बनाई जाएगी।

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    इसके अतिरिक्त, पशुओं के मूत्र से ऐसे रसायन तैयार किए जाएंगे जो फसलों के लिए प्रभावी कीटनाशक का काम करेंगे। इससे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी, खेती की लागत आधी होगी और मिट्टी की उपजाऊ क्षमता में सुधार होगा। ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए फार्म पर मशरूम उत्पादन, मधुमक्खी पालन, वर्मीकंपोस्टिंग और नर्सरी की इकाइयाँ स्थापित की जाएंगी। इसके साथ ही, एक अत्याधुनिक 'प्रदर्शन-सह-प्रशिक्षण केंद्र' विकसित किया जाएगा, जहाँ 12 शिविरों के माध्यम से किसानों को व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जाएगा।

    कुल बजट में से 75.21 लाख बुनियादी ढांचे पर, 5.68 लाख उच्च नस्ल के पशुधन पर, और 16.46 लाख रुपये प्रशिक्षण पर खर्च किए जाएंगे। इस पूरे प्रोजेक्ट प्रभारी डाक्टर प्रकाश यादव को बनाया गया है। अधिष्ठाता भानुप्रताप का कहना है कि परियोजना का प्रस्ताव भेज दिया गया है,उम्मीद है जल्द स्वीकृति मिल जाएगी। इससे छात्रों व किसानों को फायदा होगा।