गोंडा: सात माह में बना दिया 1941 दिव्यांगता सर्टिफिकेट, फर्जीवाड़े को लेकर उठ रहे सवाल
गोंडा में सात माह में 1941 दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनने से फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है, जिससे आवास व अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने की बात सामन ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए तस्वीर को एआई टूल की मदद से बनाया गया है।
HighLights
सात माह में 1941 दिव्यांगता प्रमाण पत्र बने गोंडा में।
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए फर्जीवाड़े की आशंका।
सीएमओ कार्यालय में दलालों की सक्रियता पर सवाल उठे।
संवाद सूत्र, गोंडा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय एक बार फिर चर्चा में आ गया है। यहां बीते सात माह में करीब 1941 दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाए गए हैं। खास बात यह है कि कुछ गांव में 20 से 30 प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। पिछले कुछ वर्षों में दिव्यांगों की संख्या बढ़ने से सवाल खड़े हो रहे हैं। जिले में दिव्यांगों की संख्या 26 हजार के पार हो चुकी है।
आशंका जताई जा रही है कि आवास समेत दूसरी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कहीं गलत ढंग से तो प्रमाण पत्र नहीं बनाया जा रहा है। इस बारे में कुछ शिकायतें भी की गई है, लेकिन अभी कोई जांच न किए जाने से सच बाहर नहीं आ पा रहा है। माना जा रहा है कि जांच होने पर बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आ सकता है।
सोमवार को लगता है शिविर
दिव्यांगों की जांच के लिए प्रत्येक सोमवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में शिविर लगाया जाता है। यहां आवेदन करने वाले आवेदकों की जांच की जाती है। कुछ समय से दिव्यांगता प्रमाण पत्र अधिक बन रहा है। इतनी संख्या में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनाने को लेकर कई लोग सवाल खड़ा कर रहे हैं।
इन योजनाओं का मिलता है लाभ
जिन दिव्यांगजनों का यूडीआईडी कार्ड बन गया है, उन्हें रेल और बस में सफर करने पर रियायत मिलती है। इतना ही नहीं उन्हें राशन लेने में भी सुविधा होती है। कोई भी दिव्यांग देश के किसी भी कोने में रहे, उसे वहां पर राशन मिल जाता है। इसके अलावा सरकार द्वारा जितनी भी सरकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, वह उसके लिए पात्र होते हैं। उसी के आधार पर उसका पंजीयन हो जाता।
खबरें और भी
दलालों का रहता है बोलबाला
शिविर के दौरान दलालों का बोलबाला रहता है। दिव्यांग प्रमाण पत्र लेने सीएमओ कार्यालय आए एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सीएमओ कार्यालय के बाहर पहुंचते ही दलाल आ जाते हैं। काम कराने की बात कहकर रुपये की मांग की जाती है।
चिकित्सक के परामर्श पर बनता है प्रमाण पत्र
दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनाने के लिए चिकित्सकों की टीम बनी है। कोई भी आवेदन करता है तो उसकी जांच की जाती है। चिकित्सक के परामर्श के बाद ही प्रमाण पत्र बनाया जाता है। -डॉ. संतलाल पटेल, मुख्य चिकित्सा अधिकारी।