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    गोंडा में राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बनेगा इनोवेशन हब, चुनौतियों का तकनीक से होगा समाधान

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 04:45 PM (GMT+05:30)

    गोंडा का राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज एआई आधारित समाधानों के लिए एक नवाचार केंद्र बनेगा। छात्र स्थानीय समस्याओं का सर्वेक्षण कर डेटा एकत्र करेंगे और उनके ...और पढ़ें

    राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बनेगा इनोवेशन हब।

    राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज बनेगा इनोवेशन हब।

    HighLights

    1. राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज गोंडा बनेगा एआई नवाचार केंद्र।

    2. छात्र स्थानीय समस्याओं का सर्वेक्षण कर एआई समाधान बनाएंगे।

    3. स्थानीय डेटा आधारित एआई मॉडल अधिक सटीक और प्रभावी।

    संवाद सूत्र, गोंडा। अब विकास की नई पटकथा सरकारी फाइलों या किताबों में नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की प्रयोगशालाओं में लिखी जाएगी। मां पाटेश्वरी देवी राजकीय इंजीनियरिंग कॉलेज ने एक ऐसी अभिनव पहल शुरू करने जा रहा है, जो न सिर्फ जिला बल्कि पूरे प्रदेश की स्थानीय समस्याओं के समाधान की दिशा तय कर सकती है।

    संस्थान के छात्र-छात्राएं देवीपाटन मंडल के चारों जिलों के साथ आसपास के जिलों में जाकर जमीनी स्तर पर सर्वे करेंगे और उसी आधार पर स्थानीय डेटा तैयार कर एआई आधारित समाधान विकसित करेंगे।

    कॉलेज प्रशासन ने इसके लिए अत्याधुनिक एआई इकोसिस्टम मॉडल और आधुनिक प्रयोगशाला स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी है। प्रस्तावित योजना के तहत इंजीनियरिंग के विद्यार्थी गांवों, कस्बों और शहरों में जाकर शिक्षा व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं, कृषि, सिंचाई, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण और अन्य सामाजिक-आर्थिक क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे करेंगे।

    सर्वेक्षण के दौरान जुटाए गए आंकड़ों का विशेषज्ञों और संकाय सदस्यों की निगरानी में वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। इसके बाद इन्हीं आंकड़ों के आधार पर ऐसे एआई माडल विकसित किए जाएंगे, जो समस्याओं की पहचान करने के साथ उनके व्यवहारिक और तकनीकी समाधान भी सुझाएंगे।

    कॉलेज के निदेशक प्रो. बीएन मिश्र का कहना है कि वैश्विक आंकड़ों की तुलना में स्थानीय डेटा पर आधारित एआई माडल अधिक सटीक, उपयोगी और प्रभावी साबित होते हैं।

    यही वजह है कि इस परियोजना में क्षेत्रीय आवश्यकताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे प्रशासन को योजनाएं बनाने में मदद मिलेगी, वहीं समाज को भी तकनीक आधारित समाधान का प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पाठ्यक्रम तक सीमित न रखकर उन्हें शोध, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व से जोड़ना भी है।

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    छात्र वास्तविक समस्याओं के बीच काम करेंगे, डेटा संग्रहण से लेकर विश्लेषण और समाधान तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया का अनुभव प्राप्त करेंगे। इससे उनमें अनुसंधान की प्रवृत्ति विकसित होगी और नवाचार को नई दिशा मिलेगी।

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