गोरखपुर में वर्दी के पीछे छुपा दरिंदा, श्मशान में शैतान...इंसानी रूप में हैवान
बालिका के अपहरण के बाद पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती उसे जल्द बरामद करने और आरोपित तक पहुंचने की थी। पुलिस ने 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज, ...और पढ़ें

चिउटहा स्थित रोहिन नदी के किनारे शवदाह गृह में बच्ची की हुई हत्या। जागरण
HighLights
हवस मिटाने के बाद मासूम से बर्बरता
पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने खोली हैवानियत की पोल
पीडोफिलिया का शिकार है बर्खास्त सिपाही
आशुतोष मिश्र, गोरखपुर। श्मशान में शैतान ने जो खूनी खेल खेला, उसे सुनकर लोग सिहर जा रहे हैं। इंसानी रूप में हैवान ने हवस मिटाने के बाद बालिका को मौत के घाट उतार दिया। इसके लिए उसने जैसी नृशंसता बरती, वह उसके पीडोफाइल (बालकामुक व्यक्ति) होने के संकेत देती है। वहीं, घटनास्थल के रूप में श्मशान का चुनाव के पीछे की वजह बतौर सिपाही उसे पुलिस की कार्यप्रणाली की बेहतर समझ हो सकती है।
केंद्रीय मनोरोग संस्थान, झांसी के पूर्व मनोचिकित्सक डा. गोपाल अग्रवाल के मुताबिक पैराफिलिया (अपकामुकता) उस स्थिति को कहते हैं जब किसी व्यक्ति की यौन उत्तेजना और संतुष्टि सामान्य तरीकों से हटकर असामान्य वस्तुओं, स्थितियों, कल्पनाओं या व्यवहारों पर निर्भर हो जाती है। इसमें व्यक्ति को सामान्य शारीरिक या भावनात्मक जुड़ाव के बजाय किसी खास गैर-पारंपरिक वस्तु या परिस्थिति से कामोत्तेजना महसूस होती है।
कुछ गंभीर रूपों में इसमें बिना सहमति के दूसरों को पीड़ा देना या अनुचित व्यवहार शामिल हो सकता है। पीडोफिलिया (बालकामुकता) इसका और वीभत्स स्वरूप है। पीडोफाइल बच्चों को अपना शिकार बनाते हैं। इससे पीड़ित कई बार बच्चों की हत्या कर देते हैं, बल्कि उनके शरीर से विभिन्न अंग काट देते हैं। यौन विकृति से पीड़ित अपराधी अपनी क्रूरता को संतुष्ट करने के लिए भी शरीर को इस हद तक विकृत करते हैं।

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दोनों पैरों से चार-चार अंगुलियां काटीं
पोस्टमार्टम में बालिका के गले पर धारदार हथियार से गहरा वार मिला। चाकू के वार से उसकी आंतें बाहर आ गई थीं। निजी अंगों पर चोट के अलावा उसके दोनों पैरों की चार-चार अंगुलियां भी हैवान ने काट दी थीं। इस वीभत्सता के पीछे सिपाही की आपराधिक सोच बड़ी वजह हो सकती है।
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श्मशान के पास गला रेतकर हत्या और दोनों पैरों की चार-चार अंगुलियों को काट कर इसे तांत्रिक या अंधविश्वासी कृत्य का रूप देना चाहता था, क्योंकि कुछ अंधविश्वासी प्रथाओं या कथित ''सिद्धि'' के लिए मानव अंगों (जैसे अंगुलियां, बाल या गुप्त अंग) की बलि या उन्हें पास रखने की बात सामने आती है।