गोरखपुर AIIMS की पूर्व ईडी की जांच शुरू, 12 डॉक्टरों के दर्ज होंगे बयान
गोरखपुर एम्स की पूर्व कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेखा किशोर के खिलाफ ऋषिकेश एम्स में जांच शुरू हो गई है। उन पर बेटों को नौकरी दिलाने और घर बैठे वेतन देने ...और पढ़ें

एम्स गोरखपुर। जागरण
HighLights
पूर्व ईडी डॉ. सुरेखा किशोर पर बेटों को नौकरी दिलाने का आरोप।
ऋषिकेश एम्स में जांच शुरू, गोरखपुर के 12 डॉक्टर बुलाए गए।
बेटों की फर्जी उपस्थिति दर्ज करने वाला मूल रजिस्टर गायब।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बेटों को नौकरी देने के बाद घर बैठे तनख्वाह दिलाने के मामले में एम्स गोरखपुर से हटाई गईं तत्कालीन कार्यकारी निदेशक (ईडी) डाॅ. सुरेखा किशोर के खिलाफ एम्स ऋषिकेश में जांच शुरू हो गई है। डाॅ. सुरेखा किशोर एम्स ऋषिकेश के कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन विभाग में तैनात हैं। जांच के लिए एम्स ऋषिकेश से एम्स गोरखपुर के 12 डाक्टरों को 11 व 12 मार्च को बुलाया गया है। इनमें हड्डी, सर्जरी, फार्माकोलाजी, कम्युनिटी मेडिसिन, कैंसर रोग के विभागाध्यक्ष शामिल हैं।
डॉ. सुरेखा किशोर जून 2020 में एम्स की ईडी बनाई गई थीं। उन्होंने वर्ष 2021 में अपने बेटों को एम्स में नियुक्त किया था। सुरेखा किशोर के बेटे डाॅ. शिखर किशोर वर्मा का एम्स में चयन साक्षात्कार के आधार पर किया गया था।
एक मार्च 2021 को जारी सूची में चुने गए चार नान एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट मेडिकल की सूची में डाॅ. शिखर का नाम पहले स्थान पर था। 12 जुलाई को नान एकेडमिक जूनियर रेजिडेंट मेडिकल के लिए साक्षात्कार की अंतिम सूची जारी हुई।
इसमें कार्यकारी निदेशक के दूसरे बेटे डा. शिवल किशोर वर्मा का नाम पहले स्थान पर था। सिर्फ दो जेआर के पद पर नियुक्ति करनी थी। इसमें एक अनारक्षित और दूसरा अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित था। अनारक्षित पद पर डाॅ. शिवल किशोर वर्मा की नियुक्ति हुई जबकि अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित पद पर डाॅ. प्रीती गोंड की नियुक्ति की गई है।
खबरें और भी
अनारक्षित पद की प्रतीक्षा सूची में डाॅ. विवेक मिश्र और आरक्षित पद की प्रतीक्षा सूची में डाॅ. राकेश गोंड को रखा गया। दोनों बेटों को 70-70 हजार रुपये प्रति माह वेतन दिया गया। आरोप था कि दोनों कभी एम्स में नहीं गए, ईडी के आवास में ही रहे।
यह भी पढ़ें- Antibiotics Awareness: अंधाधुंध एंटीबायोटिक का सेवन साधारण बीमारी को भी बना सकता है जानलेवा
रजिस्टर की फोटोकापी के आधार पर हुई थी शिकायत
आरोप है कि डाॅ. सुरेखा किशोर के दोनों बेटों की फर्जी उपस्थिति एक रजिस्टर पर दर्ज की जाती थी। इस रजिस्टर की फोटोकापी के आधार पर विजिलेंस में शिकायत की गई थी। विजिलेंस ने पूरे मामले की विस्तृत जांच की थी। इसके बाद डा. सुरेखा किशोर पर कार्रवाई की गई थी।
इनको बुलाया गया है
- डाॅ. अजय भारती, प्रोफेसर हड्डी एवं जोड़ रोग
- डाॅ. गौरव गुप्ता, एडिशनल प्रोफेसर जनरल सर्जरी
- डाॅ. विकास श्रीवास्तव, एडिशनल प्रोफेसर पैथोलाजी
- डाॅ. कनिष्क कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर जनरल मेडिसिन
- डाॅ. विजय लक्ष्मी, एसोसिएट प्रोफेसर फार्माकोलाजी
- डाॅ. एनए शेख, एसोसिएट प्रोफेसर फोरेंसिक मेडिसिन एंड टाक्सिकोलाजी
- डाॅ. आनंद एम दीक्षित, प्रोफेसर कम्युनिटी एंड फैमिली मेडिसिन
- डाॅ. नवनीत, अटेरिया एसोसिएट प्रोफेसर फोरेंसिक मेडिसिन एंड टाक्सिकोलाजी
- डाॅ. अमरप्रीत कौर एसोसिएट प्रोफेसर बायोकेमिस्ट्री
- डाॅ. विवेक हाडा, एसोसिएट प्रोफेसर माइक्रोबायोलाजी
- डाॅ. अरूप मोहंती, एसोसिएट प्रोफेसर माइक्रोबायोलाजी
- डाॅ. शशांक शेखर, एसोसिएट प्रोफेसर रेडियोडायग्नोसिस
उपस्थिति का मूल रजिस्टर हो गया है गायब
पिछले वर्ष एम्स ऋषिकेश से डा. सुरेखा किशोर के बेटों की उपस्थिति का मूल रजिस्टर मांगा गया है। इसके बाद एम्स ऋषिकेश से एक कर्मचारी को गोरखपुर भेजा गया। पता चला कि रजिस्टर गायब हो चुका है। अब देखना है कि एम्स ऋषिकेश में डाक्टर क्या बयान दर्ज कराते हैं।
एम्स ऋषिकेश से जांच के लिए 12 डाक्टरों को बुलाने का पत्र मिला है। डाक्टर अपना पक्ष रखने के लिए जाएंगे। उनके साथ एडवोकेट रहेंगे या नहीं, इस पर मंथन किया जा रहा है।
-डा. विभा दत्ता, कार्यकारी निदेशक, एम्स गोरखपुर