गोरखपुर के माथाबारी गांव पहुंचे वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल, बोले- सही दिशा चुनिए... वरना तेज दौड़कर भी मंजिल गलत मिलेगी
वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने गोरखपुर के सरस्वती गुरुकुल में छात्रों को सही दिशा और संस्कारों ...और पढ़ें
HighLights
वायुसेना प्रमुख ने छात्रों को सही दिशा का महत्व बताया।
अच्छा इंसान बनने और संस्कारों पर जोर दिया गया।
छात्रों ने देशभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। सही दिशा में चलिए। अगर दिशा गलत है तो कितना भी तेज चलेंगे या दौड़ेंगे, पहुंचेंगे गलत जगह ही।”l सरस्वती गुरुकुल माथाबारी में गुरुवार को विद्यार्थियों के बीच पहुंचे एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने बच्चों को सफलता से ज्यादा सही दिशा और अच्छे संस्कारों का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि गिरना गलत बात नहीं है, लेकिन गिरकर उठना और दोबारा कोशिश करना जरूरी है। बच्चों ने उनका स्वागत जयघोष और ‘जय हिंद’ के उद्घोष से किया।
एयर चीफ मार्शल ने कहा कि बच्चों के रूप में देश का भविष्य उनके सामने बैठा है। बड़े होकर किसी को फौज में जाना है, किसी को नेवी या एयरफोर्स में, कोई डॉक्टर, इंजीनियर, आइएएस या आरपीएस बन सकता है। जो बनना चाहते हैं, वह बनिए, लेकिन इससे पहले अच्छा इंसान बनना है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अपने लक्ष्य के लिए परिश्रम करें और यहां मिलने वाली शिक्षा व संस्कारों को जीवन में उतारें। बच्चों को पेड़ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि पेड़ की मजबूती उसकी जड़ों से होती है। उसी तरह मनुष्य की नींव उसके संस्कार और शिक्षा से मजबूत होती है। इसलिए गुरुकुल में जो सिखाया जा रहा है, उसे अच्छी तरह सीखना चाहिए।
उन्होंने बच्चों को आपस में तुलना न करने की सीख भी दी। कहा कि कोई लंबा है, कोई छोटा है, किसी की क्षमता अलग है तो किसी की अलग। इन बातों पर ध्यान देने के बजाय अपने लक्ष्य पर ध्यान देना चाहिए। जीवन में सफलता हासिल कर लेने के बाद भी जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। देश और समाज ने हमें बड़ा बनाया है, इसलिए बड़े होकर देश और समाज को कुछ देना भी है।
देश सेवा केवल वर्दी पहनकर ही नहीं होती, अपने क्षेत्र में ईमानदारी और जिम्मेदारी से काम करना भी समाज और राष्ट्र की सेवा है। एयर चीफ मार्शल ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। कार्यक्रम के अंत में वंदे मातरम् के उद्घोष के बीच विजय तिरंगा फहराया गया। पूरा परिसर ‘जय हिंद’ के जयघोष से गूंज उठा। सुबह 10:30 बजे गुरुकुल में पहुंचे और चीफ मार्शल करीब डेढ़ घंटा तक रहे।

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मेरा लक्ष्य डाक्टर बनना था, सेना में आया तो अच्छा हुआ
एयर चीफ मार्शल ने बच्चों से अपने जीवन का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य डॉक्टर बनना था, लेकिन वह सेना में चले गए और आज उन्हें लगता है कि अच्छा हुआ कि उन्होंने सेना को चुना। उन्होंने कहा कि जीवन में केवल नंबर हासिल करना ही सफलता नहीं है। संस्कार और यह सीख ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हम समाज और देश के लिए क्या कर सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संदेश दिया कि असफलता से घबराने की जरूरत नहीं है। गिरने के बाद उठना और लगातार प्रयास करते रहना ही आगे बढ़ने का रास्ता है।
नाम के आगे सपना लिखिए, चरित्र महान बनाइए
इससे पहले संस्कृति गुरुकुल के निदेशक संजय सिंह ने एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह और मैडम सरिता सिंह का स्वागत किया। उन्होंने बच्चों से जीवन में उद्देश्य तय करने की अपील की। भगत सिंह का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जीवन की सार्थकता उसके उद्देश्य से तय होती है। उन्होंने कहा कि बच्चों से बचपन से पूछा जाता है कि बड़े होकर क्या बनोगे। जो सपना है, वही नाम के आगे लिखिए। लेकिन कपड़ों या डिग्री से कोई महान नहीं बनता, चरित्र व्यक्ति को महान बनाता है।
डिग्री तो खर्चे का हिसाब है, इल्म किरदार में दिखाई देता है। उन्होंने उस्ताद बिस्मिल्लाह खां का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जीवन में बाहरी दिखावे से ज्यादा चरित्र महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने जीवन का प्रसंग भी साझा किया कि 13 वर्ष की उम्र में पिता का निधन हो गया था, लेकिन कठिन परिस्थितियों में भी जीवन को उद्देश्य के साथ आगे बढ़ाया।
मंच पर दिखा आपरेशन सिंदूर का पराक्रम
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने देशभक्ति से ओतप्रोत प्रस्तुतियों से माहौल को भावविभोर कर दिया। बच्चों ने पहलगाम में पर्यटकों पर हुए आतंकी हमले से लेकर आपरेशन सिंदूर तक के घटनाक्रम को नाट्य प्रस्तुति के माध्यम से जीवंत किया। आतंकियों के हमले और भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई के साथ एयर स्ट्राइक में आतंकी ठिकानों को नष्ट किए जाने का मंचन किया गया। देश की रक्षा करते हुए प्राण न्योछावर करने वाले जवानों के बलिदान को भी प्रस्तुति में दिखाया गया।
‘जब जीरो दिया मेरे भारत ने’ और ‘है प्रीत जहां की रीत सदा, मैं गीत वहां के गाता हूं’ जैसे देशभक्ति गीतों पर विद्यार्थियों ने प्रस्तुति दी। मराठा शौर्य में छत्रपति शिवाजी के पराक्रम को जीवंत किया गया। रानी लक्ष्मीबाई के विद्रोह और संघर्ष को ‘भाग-भाग रे फिरंगी’ गीत के साथ प्रस्तुत किया गया। क्रांतिकारियों की गाथा और वीर जवानों के बलिदान ने पूरे परिसर को देशभक्ति से भर दिया।
