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    देवरिया, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर में खत्म होगा जिलाध्यक्ष के नए नाम का इंतजार, नेतृत्व ने शुरू किया मंथन

    Updated: Fri, 06 Feb 2026 10:49 AM (IST)

    भाजपा गोरखपुर क्षेत्र के देवरिया, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर जिलों में नए जिलाध्यक्षों की घोषणा का इंतजार जल्द खत्म होगा। पार्टी नेतृत्व ने नामों पर मंथन ...और पढ़ें

    महानगर अध्यक्ष के निधन से खाली हुआ था गोरखपुर का पद। जागरण

    महानगर अध्यक्ष के निधन से खाली हुआ था गोरखपुर का पद। जागरण

    HighLights

    1. भाजपा जिलाध्यक्षों के नामों पर नेतृत्व का मंथन तेज।

    2. देवरिया में 67 दावेदार, गोरखपुर महानगर अध्यक्ष पद रिक्त।

    3. सप्ताहभर में घोषणा की संभावना, संगठन में नई ऊर्जा।

    डाॅ. राकेश राय, गोरखपुर। भाजपा के गोरखपुर क्षेत्र के तीन जिलों देवरिया, सिद्धार्थनगर और गोरखपुर में नए जिलाध्यक्ष की घोषणा को लेकर वर्ष भर से चल रहा इंतजार समाप्त होने वाला है। पार्टी नेतृत्व ने नामों पर मंथन की प्रक्रिया तेज कर दी है, जिसके चलते संगठन के भीतर हलचल भी बढ़ गई है। सप्ताह भीतर नाम की घोषणा हो जाने की संभावना है। इसकी सुगबुगाहट प्रदेश नेतृत्व की ओर से मिलने लगी है।

    देवरिया और सिद्धार्थनगर में निर्णय लंबित होने से स्थानीय स्तर पर दावेदारों की सक्रियता लगातार बनी रही। अब जब शीर्ष नेतृत्व ने औपचारिक रूप से विचार-विमर्श शुरू कर दिया है, तो संभावित नामों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। देवरिया जिले में जिलाध्यक्ष पद के लिए सबसे अधिक दावेदार सामने आए हैं।

    यहां कुल 67 नेताओं ने नामांकन किया था, जो जिले में संगठनात्मक सक्रियता का प्रमाण है। दावेदारों में वर्तमान जिलाध्यक्ष भूपेंद्र सिंह भी शामिल हैं। उनके अतिरिक्त पूर्व विधायक काली प्रसाद, विजय पटेल, रामाशीष प्रसाद, संजय सिंह एडवोकेट, प्रेम अग्रवाल, आनंद प्रकाश शाही, अशोक कुमार पांडेय, निर्मला गौतम, संतोष कुमार त्रिगुणायत, जगदीश यादव, कुंज बिहारी सिंह सहित कई वरिष्ठ व सक्रिय कार्यकर्ताओं ने दावेदारी पेश की है।

    सिद्धार्थनगर में दावेदारों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन यहां भी मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है। वर्तमान जिलाध्यक्ष कन्हैया पासवान फिर से मजबूत दावेदार हैं। उनके अलावा राजेंद्र पांडेय, दीपक मौर्य, शिवनाथ चौधरी, तेजू विश्वकर्मा, पवन मिश्रा, विजयकांत समेत अन्य नाम चर्चा में हैं। संगठनात्मक कार्य, क्षेत्रीय पकड़ और जातीय-सामाजिक समीकरण दोनों ही जिलों में चयन के प्रमुख आधार माने जा रहे हैं।

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    भाजपा के संगठनात्मक नियमों के अनुसार किसी कार्यकर्ता को लगातार दो बार से अधिक जिलाध्यक्ष नहीं बनाया जाता। ऐसे में वर्तमान जिलाध्यक्षों के नाम दावेदारी में होने के बावजूद नेतृत्व नए चेहरों पर भी गंभीरता से विचार कर रहा है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक चयन प्रक्रिया में संगठन विस्तार, बूथ सशक्तीकरण, आगामी चुनावी रणनीति और सामाजिक प्रतिनिधित्व जैसे बिंदुओं को प्रमुखता दी जा रही है।

    गोरखपुर महानगर में स्थिति अलग रही है। यहां महानगर अध्यक्ष का पद देवेश श्रीवास्तव के निधन के बाद से रिक्त चल रहा है। लगभग सात माह पूर्व उनके निधन के बाद संगठनात्मक कार्यों की निरंतरता बनाए रखने के लिए पूर्व महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता को महानगर संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

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    उन्हें अंतरिम रूप से संगठन संचालन का दायित्व दिया गया था, जब तक कि नए अध्यक्ष की घोषणा न हो जाए। अब जबकि तीनों जिलों में नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में बताई जा रही है, संगठन के भीतर नए नेतृत्व को लेकर उत्सुकता चरम पर है।

    माना जा रहा है कि घोषित होने वाले जिलाध्यक्ष आगामी चुनावी रणनीति को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। तीनों जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं को भी नए नेतृत्व से संगठन में नई ऊर्जा आने की उम्मीद है।