अचानक मोबाइल फोन छीनने से हिंसक हो सकते हैं बच्चे, रहें सावधान
गोरखपुर में बच्चों में मोबाइल फोन की लत गंभीर स्वास्थ्य और व्यवहार संबंधी समस्याएं पैदा कर रही है। दो 12 वर्षीय बच्चों के मामले सामने आए, जिनमें से एक ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
मोबाइल की लत से बच्चों का शारीरिक-मानसिक विकास प्रभावित।
अचानक फोन छीनने से बच्चे हिंसक हो सकते हैं, धीरे-धीरे कम करें।
माता-पिता स्क्रीन टाइम सीमित कर रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा दें।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। सिकरीगंज में 12 साल का बच्चा है। वह घर का खाना नहीं खाता। फास्ट फूड व जंक फूड ही खा रहा था, वह भी तब जब उसे मोबाइल दे दिया जाता था। उसका वजन काफी बढ़ गया। लगभग 70 किलोग्राम के इस बच्चे की जब जांच कराई गई तो एसजपीटी 1135 यूनिट प्रति लीटर (यू/एल) आया, जबकि 40 यू/एल होना चाहिए।
बेतियाहाता के 12 साल के एक बच्चे का जीवन मोबाइल फोन पर निर्भर हो गया था, उसने स्कूल जाना बंद कर दिया। वह कक्षा छह में पढ़ता है। मोबाइल फोन छीनने पर घर में उत्पात मचा देता है। एक बाद तो उसने शीशे की बोतल अपने सिर पर पटक कर तोड़ दी।
इन दोनों बच्चों को स्वजन जिला अस्पताल लेकर आए। उपचार चल रहा है। चिकित्सकों ने बच्चों से अचानक मोबाइल फोन न छीनने की सलाह दी है। उनका कहना है कि धीरे-धीरे स्क्रीन टाइम कम कर बच्चे को मोबाइल फोन से दूर किया जा सकता है। अचानक छीनने से वे हिंसक हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार आज के डिजिटल युग में मोबाइल फोन बच्चों की पढ़ाई, मनोरंजन और संपर्क का एक साधन बन गया है, लेकिन जब यही साधन जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल होने लगे तो यह लत का रूप ले लेता है।
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मोबाइल फोन की लत धीरे-धीरे बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक विकास को नुकसान पहुंचा रही है। समय रहते इसके लक्षण पहचान लिए जाएं तो माता-पिता अपने बच्चों को बड़े खतरे से बचा सकते हैं।
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मोबाइल फोन की लत के प्रमुख लक्षण
- बच्चा हर समय मोबाइल फोन हाथ में लिए रहता है और बिना इसके बेचैन हो जाता है।
- पढ़ाई, खेलकूद और परिवार के साथ समय बिताने में रुचि कम हो जाती है।
- मोबाइल फोन छीने जाने या सीमित करने पर गुस्सा, चिड़चिड़ापन या आक्रामक व्यवहार।
- देर रात तक मोबाइल फोन चलाने से नींद पूरी न होना।
- आंखों में जलन, सिरदर्द, गर्दन या पीठ दर्द की शिकायत।
- अकेले रहना पसंद करना और दोस्तों से दूरी बनाना।
- मोबाइल फोन गेम या इंटरेनट मीडिया में सक्रियता ज्यादा।
- वास्तविक जीवन की जिम्मेदारियों से बचना।
मोबाइल फोन की लत के दुष्परिणाम
मानसिक प्रभाव : एकाग्रता में कमी, याददाश्त कमजोर होना, चिंता और अवसाद।
शारीरिक नुकसान : आंखों की रोशनी पर असर, मोटापा, गलत शारीरिक मुद्रा से हड्डियों की समस्या।
शैक्षणिक गिरावट : पढ़ाई में मन न लगना, परीक्षा परिणाम खराब होना।
सामाजिक नुकसान : परिवार से संवाद कम होना, सामाजिक कौशल का कमजोर होना।
व्यवहार में बदलाव : चिड़चिड़ापन, जिद्दीपन और आत्मनियंत्रण की कमी।
उपचार और बचाव की व्यवस्था
- मोबाइल फोन की लत कोई बीमारी नहीं, बल्कि एक आदत है जिसे सही मार्गदर्शन से बदला जा सकता है।
- माता-पिता बच्चों के स्क्रीन टाइम की स्पष्ट सीमा तय करें।
- भोजन, पढ़ाई और सोने के समय मोबाइल पूरी तरह दूर रखें।
- बच्चों को खेलकूद, किताबें, कला और संगीत जैसी रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें।
- स्वयं माता-पिता भी मोबाइल का संतुलित उपयोग कर उदाहरण पेश करें।
- बच्चों से संवाद बनाए रखें, उनकी भावनाओं और समस्याओं को समझें।
- यदि लत गंभीर हो जाए तो डाक्टर, काउंसलर या मनोवैज्ञानिक की मदद लें।