ब्राह्मण-पिछड़ा समीकरण पर भाजपा का नया दांव, हरीश द्विवेदी और संगीता यादव को मिली बड़ी जिम्मेदारी
भाजपा ने ब्राह्मण और पिछड़ा वर्ग के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए एक नई राजनीतिक रणनीति अपनाई है।

HighLights
भाजपा ने ब्राह्मण और पिछड़ा वर्ग को साधने की रणनीति बनाई।
हरीश द्विवेदी बिहार-कर्नाटक के प्रभारी, संगीता यादव बिहार सह-प्रभारी बनीं।
यह नियुक्ति सामाजिक संतुलन और जनाधार बढ़ाने का प्रयास है।
रजनीश त्रिपाठी, गोरखपुर। पूर्वांचल की सियासी गणित में ब्राह्मण और पिछड़ा को एक साथ साधने की कोशिश में भाजपा ने संगठन की बिसात पर नया दांव चला है। बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को बिहार और कर्नाटक का प्रभारी बनाकर राष्ट्रीय संगठन में उनका कद और बढ़ाया गया है। चौरीचौरा की पूर्व विधायक व राज्यसभा सदस्य रहीं संगीता यादव को बिहार में सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है।
एक मजबूत ब्राह्मण चेहरा, दूसरा पिछड़ा वर्ग से आने वाला प्रमुख चेहरा। हरीश और संगीता को मिली नई जिम्मेदारियां दो अलग-अलग नियुक्तियां नहीं, बल्कि भाजपा के सामाजिक संतुलन की अकेली तस्वीर है। दोनों को एक ही मोर्चे पर उतारने के पीछे सामाजिक संतुलन का संकेत साफ दिखाई देता है।
राष्ट्रीय संगठन में तेजी से बढ़ रहा दायरा
भाजपा में हरीश द्विवेदी की पहचान मजबूत ब्राह्मण चेहरे के साथ संगठनकर्ता की भी रही है। असम का प्रभार संभालने के बाद उन्हें अगस्त में राष्ट्रीय महामंत्री बनाया गया। इसके बाद भाजपा युवा मोर्चा का प्रभारी बनाया गया और अब बिहार व कर्नाटक की जिम्मेदारी दी गई है।
लगातार बढ़ती जिम्मेदारियां बताती हैं कि राष्ट्रीय संगठन में उनका दायरा तेजी से बढ़ रहा है। पूर्वांचल के लिहाज से इसका राजनीतिक अर्थ भी महत्वपूर्ण है। भाजपा ने संगठन में शिवानंद द्विवेदी और रजनी पांडेय जैसे ब्राह्मण चेहरों को जगह देकर पहले ही इस वर्ग के बीच अपनी राजनीतिक मौजूदगी मजबूत करने का संकेत दिया है। हरीश को लगातार अहम जिम्मेदारियां मिलना इस कड़ी को राष्ट्रीय स्तर तक ले जाता है। संगीता यादव की जिम्मेदारी इसी समीकरण का दूसरा सिरा है।
बिहार का राजनीतिक मैदान बेहद महत्वपूर्ण
संगीता को अगस्त में राष्ट्रीय सचिव बनाया गया था। अब बिहार में सह प्रभारी बनाकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक भूमिका दी गई है। बिहार का राजनीतिक मैदान पिछड़ा राजनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है, इसलिए इस जिम्मेदारी का दायरा केवल संगठन तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसे पिछड़ा वर्ग के बीच संगठन की पहुंच मजबूत करने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है।
पूर्वांचल में भाजपा का सामाजिक आधार लंबे समय से सवर्णों के साथ पिछड़ों के व्यापक समर्थन पर टिका रहा है। अब सपा के पीडीए के जरिए पिछड़ों को लामबंद करने की कोशिश के बीच भाजपा के लिए इस आधार को मजबूती से अपने साथ बनाए रखना चुनौती है। पूर्वांचल से निकला यही गुणा-गणित अब बिहार के मैदान में भी आजमाया जाएगा।
संगठन का विश्वास जीत चुके हैं हरीश
बस्ती के पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी ने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की। वर्ष 1991 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से जुड़े। 1993 से 1995 में बस्ती के जिला प्रमुख रहे। 1994 से 1996 में वे भाजयुमो के प्रदेश सह मंत्री, 2006 से 2010 तक प्रदेश उपाध्यक्ष व 2010–2013 भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष रहे।
2012 में बस्ती सदर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़े लेकिन पराजित हुए। 2014 में बस्ती लोकसभा सीट से पहली बार सांसद निर्वाचित हुए। 17वीं लोकसभा चुनाव में उन्होंने बसपा के उम्मीदवार रामप्रसाद चौधरी को पराजित कर लगातार दूसरी बार जीत हासिल की थी।
भाजपा का भरोसा हैं संगीता यादव
संगीता यादव वर्ष 2013 में भाजपा से जुड़ने के बाद उन्होंने संगठन में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन किया। वर्ष 2017 में भाजपा के टिकट पर चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुईं। वर्ष 2021 में उन्हें भाजपा महिला मोर्चा की राष्ट्रीय मंत्री की जिम्मेदारी भी मिली।
वर्ष 2022 में भाजपा ने उन्हें उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सदस्य का प्रत्याशी बनाया। पांच जुलाई को राज्यसभा सदस्य के रूप में कार्यभार संभाला। महिला मोर्चा की राष्ट्रीय पदाधिकारी के रूप में पूरे देश में उन्होंने संगठन के जन आधार को मजबूत किया।
