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    गोरखपुर BRD मेडिकल कॉलेज का कमाल: 75 वर्षीय बुजुर्ग के ब्लाडर से निकाला ट्यूमर और थक्का, दी नई जिंदगी

    Updated: Fri, 10 Jul 2026 03:28 PM (IST)

    गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में यूरोलॉजी विभाग ने 75 वर्षीय बुजुर्ग की जटिल ब्लैडर ट्यूमर सर्जरी कर जान बचाई। कई बीमारियों से ग्रसित बुजुर्ग का ट्य ...और पढ़ें

    बीआरडी मेडिकल कॉलेज। जागरण

    बीआरडी मेडिकल कॉलेज। जागरण

    HighLights

    1. बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 75 वर्षीय बुजुर्ग की जटिल सर्जरी।

    2. ब्लैडर से 20 वर्ग सेमी ट्यूमर और 30 वर्ग सेमी थक्का निकाला।

    3. डॉ. रवि प्रकाश मिश्रा की टीम ने दूरबीन विधि से किया ऑपरेशन।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कालेज के सुपर स्पेशियलिटी ब्लाक में यूरोलाजी विभाग के चिकित्सकों ने एक जटिल सर्जरी कर 75 वर्षीय बुजुर्ग की जान बचा ली है। देवरिया निवासी बुजुर्ग पिछले पांच-छह माह से पेशाब के साथ लगातार खून आने की गंभीर समस्या से जूझ रहे थे।

    जांच में पता चला कि उनकी पेशाब की थैली (यूरिनरी ब्लाडर) में ट्यूमर था, जिससे लगातार रक्तस्राव हो रहा था। अत्यधिक रक्तस्राव के कारण ब्लाडर के भीतर बड़े पैमाने पर रक्त का थक्का भी जम गया था, जिससे उनकी स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही थी।

    बुजुर्ग को उपचार के लिए यूरोलाजी विभाग में भर्ती कराया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों ने उनकी जांच कराई, पता चला कि ब्लाडर में मौजूद 20 वर्ग सेंटीमीटर का ट्यूमर लगातार खून बहने का कारण बन रहा है। रक्तस्राव के चलते पेशाब के रास्ते खून आने के साथ-साथ ब्लाडर में भारी मात्रा में रक्त का थक्का जमा हो गया था, जिसका आकार 30 वर्ग सेंटीमीटर था।

    इसकी वजह से उनका सीरम क्रियेटिनिन बढ़कर तीन मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर (एमजी/डीएल) हो गया था, जो स्वस्थ्य व्यक्ति में 0.7 से 1.3 एमजी/डीएल होना चाहिए। साथ ही वह एनिमिया (रक्त अल्पता), क्रानिक आब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), मधुमेह व उच्च रक्तचाप से भी ग्रसित थे। उनका हीमोग्लोबिन मात्र छह ग्राम प्रति डेसीलीटर था इसलिए ऑपरेशन जटिल था। यदि समय रहते उपचार नहीं किया जाता, तो रोगी की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती थी।

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    ऑपरेशन के उन्हें चार यूनिट रक्त की जरूरत थी, उनके पास केवल दो ही रक्तदाता थे। उसी वार्ड में भर्ती दो मरीजों के तीमारदारों ने संवेदना की मिसाल पेश की और अपना रक्त दिया। मेडिसिन विभाग के सहयोग से रक्तचाप, मधुमेह व सीओपीडी को नियंत्रित किया गया।

    इसके बाद यूरोलाजिस्ट डा. रवि प्रकाश मिश्रा ने अपनी टीम के साथ दूरबीन विधि से पहले रक्त का थक्का काटकर हटाया और उसके बाद ट्यूमर। अब बुजुर्ग स्वस्थ हैं। उनका सीरम क्रियेटिनिन भी सामान्य हो गया है। समय रहते उपचार से उनकी किडनी भी बच गई।

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    डा. रवि प्रकाश मिश्रा ने बताया कि बुजुर्ग की उम्र अधिक होने व अनेक बीमारियों से ग्रसित होने के कारण यह ऑपरेशन चुनौतीपूर्ण था। इस आयु में किसी भी प्रकार की बड़ी सर्जरी के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।

    स्वास्थ्य में सुधार होने पर रोगी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उन्हें नियमित फालोअप के लिए बुलाया है, ताकि आगे भी उनकी स्थिति पर निगरानी रखी जा सके और आवश्यकता पड़ने पर समय रहते उपचार उपलब्ध कराया जा सके।

    हाल के वर्षों में यूरोलाजी विभाग में आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता के कारण जटिल सर्जरी लगातार सफलतापूर्वक की जा रही हैं। इससे पूर्वांचल, बिहार व नेपाल के रोगियों को बेहतर उपचार मिल रहा है। सर्जरी करने वाली टीम को बधाई।

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    -डा. धर्मेंद्र कुमार, प्राचार्य बीआरडी मेडिकल कालेज