सिनेमा सिर्फ एंटरटेनमेंट नहीं, समाज को बदलने का है 'सुपरहिट' फॉर्मूला
जागरण फिल्म फेस्टिवल के अंतर्गत अभिमत कार्यक्रम में सामाजिक संगठनों ने सिनेमा को मनोरंजन के साथ-साथ समाज में जागरूकता और सकारात्मक परिवर्तन लाने का प् ...और पढ़ें

दैनिक जागरण कार्यालय में स्थित अभिमत कार्यक्रम में उपस्थित विभिन्न संगठन से जुड़े लोग। जागरण
HighLights
सिनेमा समाज में जागरूकता व सकारात्मक परिवर्तन लाने का माध्यम।
सामाजिक संगठनों ने फिल्म फेस्टिवल में सिनेमा की भूमिका पर चर्चा की।
परिवार, संस्कार व मानवीय मूल्यों को मजबूत करने वाली फिल्में आवश्यक।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। सिनेमा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता व सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रभावी साधन भी है। यदि फिल्मों में सामाजिक सरोकारों को प्रमुखता दी जाए तो वे समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
यह विचार दैनिक जागरण के विचार मंच अभिमत में जागरण फिल्म फेस्टिवल के अंतर्गत आयोजित परिचर्चा सिनेमा : सिर्फ मनोरंजन या सामाजिक परिवर्तन का प्रभावी माध्यम में शहर के विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने व्यक्त किए। परिचर्चा में इनर ह्वील, रोटरी व जेसीआइ सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने भाग लेते हुए सिनेमा की सामाजिक भूमिका पर अपने विचार रखे।
परिचर्चा में वक्ताओं ने ओटीटी प्लेटफार्म पर नियंत्रण व फिल्म फेस्टिवल की उपयोगिता को बताते हुए कहा कि फिल्म फेस्टिवल केवल फिल्मों के प्रदर्शन का मंच नहीं, बल्कि समाज व सिनेमा के बीच सार्थक संवाद स्थापित करने का अवसर भी है।
सिनेमा समाज को जोड़ने व संवेदनशील बनाने की शक्ति रखता है। ऐसी फिल्मों को बढ़ावा मिलना चाहिए जो परिवार, संस्कार व मानवीय मूल्यों को मजबूत करें। - संगीता मल्ल, इनर ह्वील रेनबो
फिल्में केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं। वह समाज में जागरूकता फैलाने, महिलाओं व बच्चों से जुड़े मुद्दों को प्रभावी ढंग से सामने लाने का सशक्त मंच है। - डा. निशी अग्रवाल, एक नई आशा
समाज में सकारात्मक बदलाव तभी आएगा जब सिनेमा संवेदनशील विषयों को जिम्मेदारी के साथ समाज के लिए प्रस्तुत करेगा। - सुमनलता सहाय, नारी स्नेहिल संस्था

सिनेमा समाज को प्रेरित करने की क्षमता रखता है। युवाओं के सामने सकारात्मक आदर्श प्रस्तुत करने वाली फिल्मों की आज सबसे अधिक आवश्यकता है। - शुभेंदु श्रीवास्तव, रोटरी क्लब गोरखपुर
फिल्में समाज की सोच को प्रभावित करती हैं। इसलिए मनोरंजन के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व भी फिल्म निर्माण का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए। - गौरव अग्रवाल, रोटरी क्लब मिडटाउन
सार्थक सिनेमा समाज में समानता, महिला सशक्तीकरण व मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है। - डा. प्रियंका श्रीवास्तव, रोटरी क्लब आफ युगल
युवा पीढ़ी सबसे अधिक फिल्मों व डिजिटल कंटेंट से प्रभावित होती है। इसलिए सिनेमा के माध्यम से सकारात्मक सोच व नेतृत्व के संस्कार विकसित किए जा सकते हैं। - त्रिशला मंझानी, जेसीआइ स्वराज
फिल्में समाज को जोड़ने का काम करती हैं। यदि उनमें सकारात्मक संदेश हो तो वे आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बन सकती हैं। - सीमा भगत, इनरह्वील क्लब गोरखपुर