गोरखपुर विरासत गलियारे में गूंजी होली की हुंकार, हुई भक्त प्रहलाद की जयकार
गोरखपुर में सोमवार को होलिका दहन उत्सव और भक्त प्रहलाद शोभायात्रा के साथ होली का रंग चढ़ गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पांडेयहाता में आरती उतारी ...और पढ़ें

श्रीश्री होलिका दहन उत्सव समिति की ओर से पांडेयहाता में आयोजित शोभायात्रा में फूलों की होली खेलते मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। जागरण
HighLights
सीएम योगी ने गोरखपुर में होली उत्सव का शुभारंभ किया।
पांडेयहाता में भक्त प्रहलाद शोभायात्रा भव्यता से निकाली गई।
विरासत गलियारे में पहली बार हुआ यह ऐतिहासिक आयोजन।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गोरखपुर में होली के परंपरागत आयोजनों का रंग सोमवार से चढ़ने लगा। पांडेयहाता में आयोजित होलिका दहन उत्सव और भक्त प्रहलाद की भव्य शोभायात्रा के साथ शहर उत्सवमय हो उठा। इस आयोजन में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी ने पूरे माहौल को और भी गरिमामय बना दिया। आयोजन का फलक बढ़ा दिया।
मुख्यमंत्री ने भक्त प्रहलाद की आरती उतारी और फूलों की होली खेलकर शोभायात्रा को रवाना किया। आरती के समय वातावरण ‘जय श्रीराम’ और ‘भक्त प्रहलाद की जय’ के उद्घोष से गूंज उठा।
संबोधन के दौरान उन्होंने शहरवासियों को होली की शुभकामनाएं दीं और परंपराओं को संजोकर आगे बढ़ाने का संदेश दिया। विरासत गलियारे में पहली बार आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर लोगों में विशेष उत्साह दिखा।
विस्थापित व्यापारियों को स्थापित किए जाने के उपलक्ष्य में सभी व्यापारियों ने शंखनाद के बीच मुख्यमंत्री का गुलाब की पंखुड़ियों से स्वागत किया। पुष्पवर्षा के बीच जब शोभायात्रा आगे बढ़ी तो पूरा मार्ग अबीर-गुलाल से रंग गया। फूलों से महक गया। कलाकारों ने गीत-संगीत और नृत्य की मनोहारी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
शोभायात्रा में आकर्षक झांकियां भक्त प्रहलाद की अटूट भक्ति और होलिका दहन की पौराणिक कथा को जीवंत कर रही थीं। मदरसा चौराहा, घासीकटरा, बेनीगंज, अलीनगर, बक्शीपुर, नखास चौक और रेती चौक होते हुए यात्रा नार्मल तिराहे पर पहुंचकर संपन्न हुई। जगह-जगह श्रद्धालुओं और व्यापारियों ने पुष्पवर्षा कर शोभायात्रा का स्वागत किया।
यह भी पढ़ें- गोरखपुर में हर्षोल्लास के साथ जलाई गई होलिका, गूंज उठा भक्त प्रह्लाद का जयघोष
ढोल-नगाड़ों की थाप पर युवा थिरकते नजर आए, वहीं महिलाएं छतों से रंग और फूल बरसाती दिखीं। इस वर्ष आयोजन को और भव्य बनाने के लिए एक के स्थान पर चार मंच तैयार किए गए थे। हर मंच से लोक कलाकारों ने पारंपरिक नृत्यों की प्रस्तुति दी। कहीं फगुआ गूंजा तो कहीं ब्रज की होली के रंग बिखरे। रंग, रस और राग के इस संगम ने पूरे शहर को होलीमय कर दिया।
झोपड़ी में धू-धू कर जली होलिका
पांडेयहाता में होलिका दहन की व्यवस्था भी इस बार कुछ अलग रही। ‘सम्मत’ को झोपड़ी के स्वरूप में तैयार किया गया था, जिसमें होलिका को स्थापित किया गया था। तय मुहूर्त पर वैदिक मंत्रोच्चार के बीच होलिका दहन की परंपरा सम्पन्न हुई। जैसे ही अग्नि प्रज्वलित हुई, झोपड़ी के साथ होलिका धू-धू कर जल उठी।
खबरें और भी
लपटों की आभा में श्रद्धालुओं ने परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की। परंपरा और प्रतीकात्मकता के इस सुंदर समन्वय ने लोगों के मन में आस्था और उल्लास का अनोखा संगम पैदा किया। भक्त प्रहलाद की अडिग श्रद्धा और सत्य की विजय के संदेश के साथ शहरवासियों पर होली का रंग चढ़ गया।