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    गोरखपुर में बोले सीएम योगी, किसानों के परिश्रम से उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर पहुंची 18 प्रतिशत

    Updated: Wed, 03 Jun 2026 02:23 PM (IST)

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसानों की मेहनत और सरकारी नीतियों से उत्तर प्रदेश की कृषि विकास दर 8% से बढ़कर 18% हो गई है, जिससे राज्य समृद्धि ...और पढ़ें

    HighLights

    1. यूपी की कृषि विकास दर 8% से बढ़कर 18% हुई।

    2. किसानों की मेहनत और सरकारी नीतियों से राज्य समृद्ध बना।

    3. पीएम किसान, सिंचाई योजनाएं, मुफ्त बिजली ने किसानों को लाभ दिया।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों में कृषि क्षेत्र में हुए व्यापक सुधारों का सकारात्मक प्रभाव किसानों के जीवन पर पड़ा है। किसानों की मेहनत और सरकार की किसान हितैषी नीतियों के कारण उत्तर प्रदेश ने पिछड़ेपन और बीमारूपन की छवि से बाहर निकलकर समृद्धि की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। कृषि विकास दर को 8 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत तक पहुंचाने में किसानों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    मुख्यमंत्री बुधवार को गोरखपुर के बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित गोरखपुर, बस्ती और आजमगढ़ मंडलों की संयुक्त मंडलीय खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी-2026 का शुभारंभ कर रहे थे। उन्होंने कहा कि देश की सबसे उपजाऊ भूमि और सर्वाधिक सिंचित क्षेत्र उत्तर प्रदेश में है। यहां किसान रबी, खरीफ और जायद तीनों फसलों का उत्पादन कर रहे हैं तथा उन्हें उनकी उपज का बेहतर मूल्य भी मिल रहा है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2005 से 2014 के बीच देश के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में किसानों ने आत्महत्या की थी। इसके पीछे गुणवत्तापूर्ण बीजों की कमी, फसलों का उचित मूल्य न मिलना, प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा का अभाव तथा बढ़ती लागत जैसी समस्याएं थीं। किसान मेहनत से उत्पादन तो करता था, लेकिन उसकी फसल खरीदने की प्रभावी व्यवस्था नहीं थी।

    उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पहली बार किसानों के साथ-साथ धरती माता के स्वास्थ्य की भी चिंता की। इसी सोच के तहत मुफ्त मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की गई। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जैसी योजनाओं ने किसानों को नई ताकत दी। दलहन और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए भी विशेष अभियान चलाए गए, जिससे आयात पर निर्भरता कम हो सके।

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    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना ने किसानों को आर्थिक संबल दिया है। इससे किसानों को साहूकारों के चंगुल में फंसने से राहत मिली। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 में प्रदेश सरकार की पहली कैबिनेट बैठक में किसानों के कर्ज राहत का फैसला लिया गया था। फसल ऋण योजनाओं को बढ़ावा दिया गया तथा किसानों को लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिलाने के लिए व्यापक प्रयास किए गए। विभिन्न स्थानों पर सरकारी खरीद केंद्र स्थापित कर किसानों की उपज खरीदी गई।

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    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में वर्षों से लंबित सिंचाई परियोजनाओं को पूरा कराया गया। बाणसागर, सरयू नहर राष्ट्रीय परियोजना और बुंदेलखंड क्षेत्र से जुड़ी कई योजनाओं के माध्यम से 24 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा निजी नलकूपों पर किसानों को मुफ्त बिजली दी जा रही है, जिसके लिए सरकार हर वर्ष लगभग 3000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षेत्रफल की दृष्टि से उत्तर प्रदेश देश में चौथे स्थान पर है, लेकिन खाद्यान्न, आलू, सब्जी, दूध, चीनी, एथेनॉल और चीनी उत्पादन में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा आयोजित रबी और खरीफ गोष्ठियां किसानों को नई तकनीक, उन्नत बीज और सरकारी योजनाओं की जानकारी देने के साथ उनकी समस्याओं और सुझावों को समझने का भी मंच प्रदान करती हैं।

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    उन्होंने किसानों के लिए संचालित मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि किसान, बटाईदार और उनके परिवार के सदस्य भी इस योजना के दायरे में हैं। अतिवृष्टि, अनावृष्टि, लू, आकाशीय बिजली या वन्यजीव संघर्ष जैसी घटनाओं में मृत्यु होने पर प्रभावित परिवार को 24 घंटे के भीतर पांच लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना पर सरकार प्रतिवर्ष लगभग एक हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि लखनऊ में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न चौधरी चरण सिंह के नाम पर सीड पार्क और कुशीनगर में कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय का निर्माण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कृषि विज्ञान केंद्र किसानों तक नई तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीजों की जानकारी पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

    योगी आदित्यनाथ ने किसानों से फसलों की गुणवत्ता सुधारने, रसायनों और कीटनाशकों के सीमित उपयोग तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि उत्पाद निर्यात मानकों के अनुरूप तैयार किए जाएं तो किसानों को बेहतर लाभ मिल सकता है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जिन कृषि उत्पादों का स्थानीय बाजार में सीमित मूल्य मिलता है, वही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई गुना अधिक कीमत पर बिक सकते हैं।

    मुख्यमंत्री ने फसल विविधीकरण और सहफसली खेती को भी लाभकारी बताते हुए किसानों को इसे अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में किसान तकनीक और वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाकर तीन-तीन फसलें लेकर बेहतर आमदनी अर्जित कर रहे हैं। खरीफ उत्पादकता संगोष्ठी किसानों को मौसम, फसल चक्र और संभावित चुनौतियों के अनुरूप तैयारी करने की दिशा में मार्गदर्शन देगी।

    कार्यक्रम में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, सांसद रवि किशन, महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव, विधान परिषद सदस्य डॉ. धर्मेंद्र सिंह, महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी तथा कृषि उत्पादन आयुक्त दीपक कुमार समेत अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।