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    दिव्यांगजन शादी प्रोत्साहन योजना, अब विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र की बाध्यता नहीं

    Updated: Wed, 22 Apr 2026 11:12 AM (IST)

    दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग ने शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना में विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र अपलोड करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी है। अब दिव्यांग ...और पढ़ें

    दिव्यांगजन की दिक्कतों को देखते हुए विभाग की ओर लिया गया निर्णय। जागरण

    दिव्यांगजन की दिक्कतों को देखते हुए विभाग की ओर लिया गया निर्णय। जागरण

    HighLights

    1. विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र की अनिवार्यता अब हुई समाप्त।

    2. दिव्यांगजन बिना प्रमाण-पत्र के भी ले सकेंगे योजना का लाभ।

    3. यह बदलाव 1 अप्रैल 2025 से होगा लागू।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग द्वारा संचालित शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना में आवेदन के लिए विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र अपलोड करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इसे अब स्वैच्छिक कर दिया गया है।

    इसके बिना भी दिव्यांगजन योजना का लाभ ले सकते हैं।
    योजना के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन करने वाले दिव्यांगजन को पहले रजिस्ट्रार द्वारा निर्गत विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र ऑनलाइन आवेदन में अपलोड करना अनिवार्य था।

    इसके बिना आवेदक को लाभ नहीं मिल पा रहा था। दिव्यांगजन की दिक्कतों को देखते हुए इसकी अनिवार्यता समाप्त करते हुए इसे स्वैच्छिक कर दिया गया है। एक अप्रैल 2025 से अब शादी करने वाले दिव्यांगजन आनलाइन आवेदन कर योजना का लाभ ले सकते हैं। इसमें एकमुश्त प्रोत्साहन राशि दी जाती है।

    यह है प्रोत्साहन राशि

    • पति के दिव्यांग होने पर 15 हजार रुपये
    • पत्नी के दिव्यांग होने पर 20 हजार रुपये
    • पति-पत्नी दोनों के दिव्यांग होने पर 35 हजार रुपये

    ऑनलाइन पंजीकरण के दौरान यह है पात्रता

    • सक्षम अधिकारी द्वारा जारी 40 प्रतिशत या अधिक का दिव्यांग प्रमाण-पत्र
    • आय प्रमाण-पत्र
    • तहसील द्वारा निर्गत विवाह प्रमाण-पत्र (इसे अब स्वैच्छिक कर दिया गया है)
    • शादी के समय युवक की उम्र 21 से 45 वर्ष व युवती उम्र 18 से 45 वर्ष
    • राष्ट्रीयकृत बैंक में संचालित संयुक्त खाता
    • निवास प्रमाण पत्र
    • युवक व युवती का आधार कार्ड

    विभाग की ओर से संचालित शादी-विवाह प्रोत्साहन पुरस्कार योजना में आवेदन के लिए विवाह पंजीकरण प्रमाण-पत्र अपलोड करने की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। इससे दिव्यांगजन को योजना का लाभ लेने में आसानी होगी।

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    - कमलेश कुमार वर्मा, जिला दिव्यांगजन सशक्तीकरण अधिकारी।