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    गोरखपुर में कूड़े का ढेर पैदा करने वालों की होगी पहचान, खुद ही करना होगा निस्तारण

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 09:09 PM (GMT+05:30)

    गोरखपुर नगर निगम ने ठोस कचरा प्रबंधन को प्रभावी बनाने के लिए बड़े पैमाने पर कूड़ा पैदा करने वाले संस्थानों और घरों की पहचान शुरू की है। इन्हें अपने पर ...और पढ़ें

    कूड़े का ढेर पैदा करने वालों की होगी पहचान। AI जेनरेटेड फोटो

    कूड़े का ढेर पैदा करने वालों की होगी पहचान। AI जेनरेटेड फोटो

    HighLights

    1. नगर निगम ने बल्क वेस्ट जनरेटर्स की पहचान शुरू की।

    2. इन्हें अपने परिसर में ही कचरे का निस्तारण करना होगा।

    3. स्रोत पर गीला, सूखा कचरा अलग करना अनिवार्य।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। ठोस कचरा प्रबंधन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और वैज्ञानिक बनाने के लिए नगर निगम ने बड़ी मात्रा में कूड़ा पैदा करने वाले घरों, संस्थानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की पहचान शुरू कर दी है। ऐसे सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स को चिह्नित कर उनका पंजीकरण किया जाएगा।

    इसके बाद उन्हें अपने परिसर में ही कचरे का निस्तारण सुनिश्चित करना होगा। साथ ही स्रोत स्तर पर गीला, सूखा और अन्य प्रकार के कचरे को अलग-अलग करने के प्रति भी सभी को जागरूक किया जाएगा।

    स्वच्छ भारत मिशन 2026 के तहत आयोजित बैठक में अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार एवं सहायक नगर आयुक्त अविनाश प्रताप सिंह की अध्यक्षता में प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) टीम ने अधिकारियों को बल्क वेस्ट जनरेटर्स का पंजीकरण करने तथा उससे संबंधित जानकारी पोर्टल पर दर्ज करने की प्रक्रिया से अवगत कराया। बैठक में शहर में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक व्यवस्थित बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।

    नगर निगम का मानना है कि बड़ी मात्रा में उत्पन्न होने वाले कचरे का यदि स्रोत पर ही पृथक्करण और निस्तारण किया जाए तो मिश्रित कचरे की मात्रा में उल्लेखनीय कमी आएगी। इससे रीसाइक्लिंग को बढ़ावा मिलेगा, वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निस्तारण संभव होगा और लैंडफिल साइटों पर पड़ने वाला दबाव भी कम होगा।

    इस अभियान के तहत नगर निगम होम कंपोस्टिंग को भी बढ़ावा देगा। बड़े प्रतिष्ठानों से निकलने वाले गीले कचरे से जैविक खाद तैयार करने के लिए जागरूक किया जाएगा तथा इसके लिए प्रोत्साहित भी किया जाएगा।

    अधिकारियों का कहना है कि यदि अधिक से अधिक लोग घरों में ही गीले कचरे का कंपोस्ट करेंगे तो जैविक खाद का उपयोग बढ़ेगा और शहर से प्रतिदिन निकलने वाले कचरे की मात्रा में भी कमी आएगी। अगर नहीं करते हैं तो उनसे निस्तारण संबंधी शुल्क वसूला जाएगा।

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    बड़ी मात्रा में कूड़ा उत्पन्न करने वाले संस्थानों और प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारी है कि वे अपने स्तर पर उसके निस्तारण की व्यवस्था करें। नगर निगम ऐसे सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स को चिह्नित करने का कार्य शुरू कर चुका है। इस व्यवस्था के लागू होने से शहर में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होगी, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और ठोस कचरा प्रबंधन प्रणाली अधिक प्रभावी बन सकेगी। -प्रमोद कुमार, अपर नगर आयुक्त।