गोरखपुर में वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय को मिली कैबिनेट की मंजूरी, 491 करोड़ की लागत से बनेगा संस्थान
गोरखपुर में वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है। 491 करोड़ रुपये की लागत से कैम्पियरगंज के जंगल में 50 हेक्टेय ...और पढ़ें

वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय
HighLights
गोरखपुर में वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय को कैबिनेट मंजूरी मिली।
491 करोड़ की लागत से 50 हेक्टेयर भूमि पर होगा निर्माण।
उत्तर भारत का पहला, पर्यावरण शिक्षा व रोजगार को बढ़ावा देगा।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। वानिकी एवं औद्यानिकी विश्वविद्यालय की स्थापना को मंजूरी मिल गई। योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में विश्वविद्यालय को स्वीकृति प्रदान कर दी।
491 करोड़ रुपये की लागत से यह विश्वविद्यालय कैम्पियरगंज के भारीवैसी स्थित जंगल में चिन्हित 50 हेक्टेयर भूमि पर स्थापित किया जाएगा। यह विश्वविद्यालय उत्तर भारत का पहला और देश का दूसरा वानिकी विश्वविद्यालय होगा। इसके तैयार हो जाने के बाद आधुनिक कृषि और पर्यावरण शिक्षका को बढ़ावा मिलेगा।
प्रदेश सरकार पहले ही इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए चालू वित्तीय वर्ष के बजट में 50 करोड़ रुपये का प्रावधान कर चुकी है। गोरखपुर में बनने वाला यह पांचवां विश्वविद्यालय होगा, जो वानिकी और औद्यानिकी जैसे विशेष क्षेत्रों में उच्च शिक्षा और शोध का प्रमुख केंद्र बनेगा।
इस विश्वविद्यालय में वानिकी, औद्यानिकी, वन्य जीव संरक्षण, जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, एग्रोफॉरेस्ट्री तथा फल एवं बागवानी जैसे आधुनिक विषयों में बीएससी, एमएससी, पीएचडी और डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित किए जाएंगे। इसका उद्देश्य वनावरण बढ़ाना, जैव विविधता संरक्षण को मजबूत करना और किसानों व युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है।
इससे कृषि और पर्यावरण के क्षेत्र में शोध को नई गति मिलेगी। इस फैसले से प्रदेश में हरित विकास, खाद्य सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। विश्वविद्यालय न केवल शिक्षा का केंद्र बनेगा, बल्कि रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभाएगा।
इसके पूर्व सरकार ने गोरखपुर में ही दुनिया के पहले राजगिद्ध (जटायु) संरक्षण एवं प्रजनन केंद्र की स्थापना भी की है। छह सितंबर 2024 को इसके उद्घाटन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसी क्षेत्र में वानिकी विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा की थी, जिसे अब कैबिनेट की औपचारिक स्वीकृति मिल गई है।
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जिसके बाद से ही वन विभाग ने राजगिद्ध संरक्षण केंद्र से थोड़ी दूरी पर जंगल में जमीन चिन्हित कर शासन को भेजा था। बताया था कि चिन्हित जमीन के बगल से फोरलेन जा रहा है और यहां आने-जाने के लिए 24 घंटे संसाधन उपलब्ध है। प्रदेश सरकार उक्त जमीन को पसंद करते हुए आगे की तैयारी करने का निर्देश दिया था।
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यह विश्वविद्यालय उत्तर भारत का पहला और देश का दूसरा वानिकी विश्वविद्यालय होगा। प्रभागीय वनाधिकारी विकास यादव ने बताया कि कैबिनेट की बैठक में वानिकी विश्वविद्यालय को स्वीकृति मिलने के बाद जल्द ही इसका शिलान्यास कार्यक्रम होगा। यहां वानिकी के साथ कृषि वानिकी, सामाजिक वानिकी और औद्यानिकी के पाठ्यक्रम भी संचालित किए जाएंगे, जिससे युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर मिलेंगे।