गोरखपुर बालिका हत्याकांड: मौसी के बुलाने पर बेहतर जिंदगी की तलाश में शहर आया था परिवार, अब टूटा दुखों का पहाड़
आजमगढ़ से गोरखपुर बेहतर भविष्य की तलाश में आए परिवार की दुनिया बेटी के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या से उजड़ गई। परिजनों ने आरोपी बर्खास्त सिपाही के एनकाउं ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
आजमगढ़ से गोरखपुर आया परिवार बेटी की हत्या से तबाह।
परिजनों ने आरोपी बर्खास्त सिपाही के एनकाउंटर की मांग की।
पुलिस ने त्वरित जांच और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बेहतर कमाई और बच्चों के भविष्य की उम्मीद लेकर सात वर्ष पहले आजमगढ़ से गोरखपुर आए परिवार की दुनिया एक पल में उजड़ गई। अपहृत बेटी की दुष्कर्म के बाद हत्या ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। गुरुवार को राजघाट पर अंतिम संस्कार के दौरान परिवार का दर्द गुस्से में बदल गया। उन्होंने बर्खास्त सिपाही के एनकाउंटर की मांग शुरू कर दी।
वर्ष 2019 में बच्ची की मौसी के यहां संतान होने पर मां उसकी देखभाल के लिए आजमगढ़ से गोरखपुर आई थीं। यहीं का माहौल और रोजगार के अवसर देखकर उन्होंने पति को भी बुला लिया। उस समय भी पिता आजमगढ़ में ई-रिक्शा चलाते थे। कुछ दिन मौसी के साथ रहने के बाद उन्होंने किराये का कमरा दिलवा दिया।
एक वर्ष पहले ई-रिक्शा चोरी हो जाने पर भी मौसी ने आर्थिक मदद की थी। परिवार को भरोसा था कि बड़े शहर में मेहनत कर पांचों बेटियों का भविष्य संवार लेंगे, लेकिन अब वही परिवार सबसे बड़े संकट से गुजर रहा है। घटना के बाद नाना, मामा और अन्य रिश्तेदार भी गोरखपुर पहुंच गए हैं।
परिजन सरकार से आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग कर रहे हैं। पोस्टमार्टम के बाद परिवार के लोग शव को लेकर मोहल्ले में जाना चाहते थे लेकिन पुलिस ने रोक दिया। अंतिम संस्कार के लिए पुलिस की मौजूदगी में जब शव राजघाट स्थित राप्ती तट पहुंचा तो परिजनों का दर्द आक्रोश में बदल गया।
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उन्होंने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि उन्हें केवल मुकदमा नहीं, बल्कि बेटी के हत्यारे का अंत चाहिए। परिवार ने आरोपित के एनकाउंटर, घर पर बुलडोजर चलाने की मांग की। कुछ देर तक माहौल तनावपूर्ण रहा। एसपी सिटी निमिष पाटील ने त्वरित विवेचना और कठोर कार्रवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए।
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उधर, गुरुवार की रात में आरोपित को जिला कारागार ले जाया गया जहां उसे सामान्य बंदियों के बीच नहीं रखा गया है। जेल प्रशासन ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए उसे अलग बैरक में रखा है। उसकी गतिविधियों पर लगातार निगरानी की जा रही है। जेल अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाते हुए कर्मियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।