गोरखपुर के गोलघर परियोजना को मिली रफ्तार, 80 करोड़ के म्यूनिसिपल बांड को मंजूरी
प्रदेश सरकार ने गोरखपुर के गोलघर अर्बन रिन्युअल परियोजना के लिए नगर निगम के 80 करोड़ रुपये के म्यूनिसिपल बांड को मंजूरी दी है। इससे 17 मंजिला कमर्शियल ...और पढ़ें

व्यावसायिक कांप्लेक्स गोलघर। सौ- नगर निगम
HighLights
गोलघर परियोजना के लिए 80 करोड़ का बांड मंजूर।
17 मंजिला कमर्शियल-कम-रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स का होगा निर्माण।
गोरखपुर बना म्यूनिसिपल बांड जारी करने वाला छठा शहर।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गोलघर अर्बन रिन्युअल एंड सिटी ग्रोथ हब परियोजना अब जमीन पर उतरने की ओर बढ़ गई है। प्रदेश सरकार ने नगर निगम के 80 करोड़ रुपये के म्यूनिसिपल बांड को मंजूरी दे दी है। बांड जारी होते ही नगर निगम गोलघर स्थित जलकल परिसर में प्रस्तावित 17 मंजिला आधुनिक कमर्शियल-कम-रेजिडेंशियल काम्प्लेक्स के निर्माण के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू करेगा।
गोलघर के सबसे प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्र में बनने वाले इस काम्प्लेक्स को शहर के नए कारोबारी केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है। यहां मल्टीनेशनल कंपनियों के शोरूम, कारपोरेट कार्यालय, रेस्टोरेंट, फ्लैट और अन्य व्यावसायिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। परियोजना के पूरा होने पर निवेश आकर्षित होने, रोजगार के अवसर बढ़ने और नगर निगम के लिए नियमित आय का नया स्रोत तैयार होने की उम्मीद है।
नगर निगम का मानना है कि यह परियोजना केवल एक भवन निर्माण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि भविष्य में शहर की अन्य विकास योजनाओं के लिए भी वित्तीय आधार तैयार करेगी। दुकानों, कार्यालयों और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से मिलने वाले राजस्व के जरिये निगम को लंबे समय तक स्थायी आय प्राप्त होगी।
नगर निगम ने परियोजना की कुल लागत में निर्माण के लिए म्यूनिसिपल बांड, केंद्र सरकार के अर्बन चैलेंज फंड और कंसेशनरी फंड से धन जुटाने की योजना बनाई है। मजबूत वित्तीय स्थिति और परिसंपत्तियों के मूल्यांकन के आधार पर ही निगम को पूंजी बाजार से धन जुटाने की अनुमति मिली है।
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म्यूनिसिपल बांड की अवधि दस वर्ष होगी। बांड के जरिये जुटाई गई राशि का उपयोग निर्माण कार्य में चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। जब तक धनराशि खर्च नहीं होगी, उसे सुरक्षित निवेश योजनाओं अथवा फिक्स्ड डिपाजिट में रखकर अतिरिक्त आय अर्जित की जाएगी। लेखाधिकारी नागेंद्र सिंह ने बताया कि बांड जारी होने के अगले दिन से ही ब्याज भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
गृहकर और जलकर से होगा ब्याज का भुगतान
मर्चेंट बैंकर सेबी के पोर्टल पर नगर निगम के म्यूनिसिपल बांड का आक्शन कराएंगे, जिसमें विभिन्न बैंक और निवेशक भाग लेंगे। इसके लिए एस्क्रो खाता खोला जाएगा, जिसमें नगर निगम, बांड ट्रस्टी, मर्चेंट बैंकर और नामित बैंक संयुक्त रूप से जुड़े रहेंगे। गृहकर और जलकर से प्राप्त राशि पहले इसी खाते में जमा होगी, जहां से बांड पर देय ब्याज का भुगतान किया जाएगा। शेष राशि नगर निगम के खाते में स्थानांतरित कर दी जाएगी।
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बांड जारी करने वाला छठा नगर निगम बना गोरखपुर
म्यूनिसिपल बांड जारी होने के साथ ही गोरखपुर प्रदेश का छठा नगर निगम बन गया है, जिसने विकास परियोजनाओं के लिए पूंजी बाजार का रास्ता चुना है। इससे पहले लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गाजियाबाद और आगरा नगर निगम यह व्यवस्था अपना चुके हैं।
- 1400 करोड़ रुपये निगम की परिसंपत्तियां
- 80-90 करोड़ रुपये गृहकर व जलकर से वार्षिक आय
- 80 करोड़ रुपये का है म्यूनिसिपल बांड
- 350 करोड़ रुपये परियोजना की कुल अनुमानित लागत
- 211 करोड़ रुपये निर्माण पर आएगी लागत
- 52.75 करोड़ रुपये अर्बन चैलेंज फंड
- 78.24 करोड़ रुपये कंसेशनरी फंड
- 17 मंजिला होगी प्रस्तावित इमारत
- 10 वर्ष होगी म्यूनिसिपल बांड की अवधि
- 46 करोड़ रुपये अनुमानित ब्याज भुगतान
- 400-500 करोड़ रुपये परियोजना से संभावित आय
'मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा म्यूनिसिपल बांड को मंजूरी मिलने से परियोजना को नई गति मिलेगी। सरकार की मंशा के अनुरूप बिना विलंब निर्माण कार्य शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। यह काम्प्लेक्स व्यापारिक गतिविधियों को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगा।'
- डा. मंगलेश श्रीवास्तव, महापौर
'यह परियोजना भविष्य में नगर निगम के लिए स्थायी राजस्व का मजबूत स्रोत बनेगी। इससे होने वाली आय को जलापूर्ति, आधुनिक स्वच्छता व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास में पुनर्निवेश किया जाएगा, जिससे गोरखपुर को आत्मनिर्भर और आधुनिक महानगर के रूप में विकसित किया जा सके।'
- अजय जैन, नगर आयुक्त