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    गोरखपुर में गिर रहा है भूगर्भ जलस्तर, नगर निगम बना हुआ है बेफिक्र

    Updated: Fri, 03 Jul 2026 01:06 PM (IST)

    गोरखपुर में भूगर्भ जलस्तर तेजी से गिर रहा है, लेकिन आरओ प्लांट और कार वाशिंग सेंटरों पर नगर निगम की कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित है। अवैध संचालन और ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. गोरखपुर में चार साल में डेढ़ मीटर गिरा भूगर्भ जलस्तर।

    2. आरओ प्लांट, कार वाशिंग सेंटरों पर कार्रवाई सिर्फ कागजों में।

    3. रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अनिवार्यता का नहीं हो रहा पालन।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। शहर में लगातार गिर रहे भूगर्भ जलस्तर ने चिंता बढ़ा दी है। पिछले चार वर्षों के आंकड़ों के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में भी जलस्तर डेढ़ मीटर से अधिक नीचे चला गया है। इसके बावजूद भूगर्भ जल का अत्यधिक दोहन करने वाले आरओ प्लांट और कार वाशिंग सेंटरों पर नगर निगम की कार्रवाई सिर्फ निर्देशों तक सीमित रह गई है।

    नगर निगम ने इन संस्थानों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने का निर्देश दिया था। इसके लिए जांच टीम गठित करने की बात भी कही गई थी, लेकिन करीब आठ महीने बाद भी किसी के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इससे जल संरक्षण को लेकर नगर निगम की गंभीरता पर सवाल उठ रहे हैं।

    नगर निगम ने पिछले वर्ष जल संरक्षण को ध्यान में रखते हुए आरओ प्लांट और कार वाशिंग सेंटरों के लिए अनिवार्य पंजीकरण का आदेश जारी किया था। साथ ही यह भी तय किया गया था कि प्रत्येक केंद्र की गूगल मैपिंग कराई जाएगी, ताकि उनकी नियमित निगरानी की जा सके।

    इसके लिए जांच टीमों के गठन और अभियान चलाने की भी घोषणा हुई थी। हालांकि, अब तक किसी बड़े स्तर पर जांच या कार्रवाई सामने नहीं आई है। इससे नगर निगम की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं।

    नगर निगम के जलकल विभाग के आंकड़ों के अनुसार अभी शहर में पंजीकृत आरओ प्लांट और कार वाशिंग सेंटरों की संख्या 100 तक भी नहीं पहुंच सकी है। जबकि शहर के विभिन्न इलाकों में ऐसे सैकड़ों केंद्र संचालित होने की बात सामने आती रही है।

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    इनमें से कई बिना पंजीकरण के भूगर्भ जल का उपयोग कर रहे हैं। इनकी न तो प्रभावी निगरानी हो रही है और न ही नियमों के पालन की जांच की जा रही है। सहायक अभियंता राकेश यादव के अनुसार अब तक शहर में केवल 59 आरओ प्लांट और 25 कार वाशिंग सेंटरों का ही पंजीकरण हो सका है।

    नगर निगम ने दोनों प्रकार के व्यवसायों के लिए वार्षिक पंजीकरण शुल्क पांच हजार रुपये निर्धारित किया है। इसके अलावा कार वाशिंग सेंटरों से दो हजार रुपये प्रतिमाह तथा आरओ प्लांटों से एक हजार रुपये प्रतिमाह राजस्व शुल्क भी लिया जाना तय है। हर वर्ष पंजीकरण का नवीनीकरण कराना भी अनिवार्य किया गया है।

    नियमों के अनुसार सभी संचालकों को अपने परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना जरूरी है, ताकि वर्षा जल का संचयन कर भूगर्भ जल का पुनर्भरण किया जा सके। बिना पंजीकरण संचालन करने, रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम नहीं लगाने अथवा अन्य नियमों का उल्लंघन करने पर 10 हजार रुपये तक जुर्माना लगाने और प्रतिष्ठान को सील करने का भी प्रावधान किया गया है।

    इसके बावजूद धरातल पर इन नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के लिए कोई व्यापक अभियान दिखाई नहीं दे रहा है। शहर के कई इलाकों में कार धुलाई केंद्रों पर प्रतिदिन हजारों लीटर पानी बहाया जा रहा है, जबकि अनेक आरओ प्लांट भी बड़ी मात्रा में भूगर्भ जल का दोहन कर रहे हैं।

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    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन संस्थानों की नियमित जांच, पंजीकरण और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की अनिवार्यता का कड़ाई से पालन नहीं कराया गया, तो भविष्य में गोरखपुर को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में नगर निगम के लिए जरूरी है कि वह कागजी निर्देशों से आगे बढ़कर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करे, ताकि भूगर्भ जल संरक्षण के प्रयास वास्तविक रूप से सफल हो सकें।



    शहर के आरओ प्लांट और कार वाशिंग सेंटरों की जांच के लिए जल्द ही अभियान शुरू किया जाएगा। इन सभी का रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट की भी जांच की जाएगी। उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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    -गौरव रंजन श्रीवास्तव, अपर नगर आयुक्त