गोरखपुर में 50 लाख की नकदी से खुला हवाला नेटवर्क का राज, पुलिस खंगाल रही मोबाइल डिटेल्स
गोरखपुर में रेलवे स्टेशन रोड पर 50 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी के साथ पकड़े गए राजीव जायसवाल से पूछताछ में हवाला नेटवर्क के अहम खुलासे हुए हैं। राजीव ने ...और पढ़ें

आरोपित ने कहा फरेंदा स्टेशन के बाहर युवक तक रुपये पहुंचाने पर मिलते हैं पांच हजार। सांकेतिक तस्वीर
HighLights
50 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी पकड़ी गई।
राजीव जायसवाल ने हवाला नेटवर्क का खुलासा किया।
पुलिस मोबाइल फोन और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। रेलवे स्टेशन रोड पर 50 लाख रुपये की संदिग्ध नकदी के साथ पकड़े गए राजीव जायसवाल से पूछताछ में हवाला नेटवर्क की कई अहम परतें सामने आयीं।आरोपित ने बताया कि वह पहली बार नहीं, बल्कि इससे पहले भी तीन बार गोरखपुर से बड़ी रकम लेकर फरेंदा तक पहुंचा चुका है।
हर बार उसे इस काम के बदले पांच हजार रुपये कमीशन मिलता था। अब पुलिस और आयकर विभाग की संयुक्त जांच इस बात पर केंद्रित है कि यह नकदी किसकी थी, कहां से आती थी और किसे दी जानी थी।
पूछताछ में राजीव ने बताया कि यह बैग फरेंदा रेलवे स्टेशन के पास एक व्यक्ति को वह रकम सौंप देता। इसके बाद वह बस से डुमरियागंज लौट जाता।पुलिस को शक है कि यह रकम किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि संगठित हवाला नेटवर्क के जरिए इधर-उधर की जा रही नकदी है, जिसे छोटे-छोटे कैरियर के जरिए सुरक्षित तरीके से ट्रांसफर कराया जा रहा है।
जांच के दौरान पुलिस ने राजीव का मोबाइल फोन कब्जे में ले लिया है। काल डिटेल रिकार्ड, वाट्सएप चैट और लोकेशन हिस्ट्री खंगाली जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि उसे निर्देश कौन देता था, स्कूटी सवार युवक कौन थे और फरेंदा में जिसे रकम दी जाती थी, उसका नेटवर्क किससे जुड़ा है।
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धर्मशाला बाजार और आसपास के इलाकों में लगे सीसी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि स्कूटी सवार युवकों की पहचान की जा सके। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इन युवकों तक पहुंचते ही पूरे नेटवर्क की परतें खुल सकती हैं।आयकर विभाग की टीम भी समानांतर जांच कर रही है।
विभाग यह पता लगा रहा है कि बरामद नकदी का स्रोत क्या है, क्या इस रकम पर कर चुकाया गया है या इसे काले धन के रूप में एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, जब तक जांच पूरी नहीं होती, यह तय नहीं किया जा सकता कि मामला हवाला का है या किसी अन्य अवैध लेनदेन का। हालांकि जिस तरीके से कमीशन देकर कैश ढोया जा रहा था, उसने संदेह को और मजबूत कर दिया है।
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सिद्धार्थनगर पुलिस को दी गई सूचना
राजीव जायसवाल सिद्धार्थनगर का निवासी होने के कारण गोरखपुर पुलिस ने पूरे प्रकरण की जानकारी सिद्धार्थनगर पुलिस को भी दे दी है। वहां से भी उसके आपराधिक इतिहास और स्थानीय संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।पुलिस की माने तो परिवार के लोग व करीबी किसी नेटवर्क से जुड़े होने की जानकारी से इनकार कर रहे हैं।
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जीआरपी ने मोकामा के व्यापारी काे पकड़ा था
छह नवंबर 2025 को गोरखपुर जीआरपी ने रेलवे स्टेशन पर मोकामा के रहने वाले व्यापारी मुकुंद माधव के पास से 99 लाख रुपये पकड़े थे। उस मामले की जांच में फर्जी आइएएस ललित कुमार उर्फ गौरव की जालसाजी का पर्दाफाश हुआ था। फर्जी आइएएस ने ठीका दिलाने के नाम पर व्यापारी से रुपये लिए थे। बाद में गुलरिहा पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जालसाजी के मामले में जेल भेजा था।