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    गोरखपुर में आग में कूदकर तीन मासूमों को बचाया, खुद झुलस गया दिलीप

    Updated: Wed, 22 Apr 2026 10:29 AM (IST)

    गोरखपुर के रामूडीहा गांव में खेतों से उठी आग ने तीन मासूम बच्चों को घेर लिया, जिन्हें 25 वर्षीय दिलीप ने अपनी जान जोखिम में डालकर बचाया। इस बहादुरी मे ...और पढ़ें

    गगहा क्षेत्र में आग से जल रहे गेहूं के डंठल के बीच फंसे नीलगाय, सदमे में गांव। -जागरण,

    गगहा क्षेत्र में आग से जल रहे गेहूं के डंठल के बीच फंसे नीलगाय, सदमे में गांव। -जागरण,

    HighLights

    1. दिलीप ने आग से तीन बच्चों की जान बचाई।

    2. बच्चों को बचाते हुए दिलीप खुद बुरी तरह झुलसा।

    3. दमकल की देरी से आग कई गांवों तक फैली।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। खेतों से उठी आग जब रामूडीहा गांव की तरफ बढ़ी, तो किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला। इसी अफरा-तफरी के बीच तीन मासूम बच्चे स्कूल से लौट रहे थे। उनके कंधों पर बस्ता था, लेकिन कुछ ही पलों में वे आग की लपटों के बीच घिर गए। चारों तरफ धुआं, जलती पराली और तेज हवा होने की वजह से बचने का कोई रास्ता नहीं दिख रहा था।

    बच्चों की चीखें गांव में पहुंची तो तो लोग दौड़े, लेकिन लपटें इतनी तेज थीं कि कोई आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था। उसी वक्त वहां से गुजर रहा गांव का 25 वर्षीय दिलीप बिना एक पल गंवाए आग की तरफ दौड़ पड़ा। लोग उसे रोकते रहे, लेकिन दिलीप ने किसी की नहीं सुनी। वह सीधे आग के बीच घुस गया।

    जलती घास और धुएं के बीच उसने एक-एक कर बच्चों को बाहर निकाला। शरीर झुलसने के बाद भी तब तक आग के बीच डटा रहा जब तक तीनों बच्चे सुरक्षित बाहर नहीं आ गए। बाहर आते-आते दिलीप के कपड़े जल चुके थे, शरीर झुलस गया था, लेकिन उसकी नजर बार-बार उन बच्चों पर थी जिन्हें उसने बचाया। गांव के लोग कह रहे हैं अगर दिलीप नहीं होता, तो आज तीन घरों में मातम होता।

    अब वही दिलीप अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी की जंग लड़ रहा है। इसी आग ने रामूडीहा गांव के कई घरों की खुशियां भी छीन लीं। कपिलदेव ओझा का टीनशेड में रखा राशन, कपड़ा, बिस्तर सब खत्म हो गया। पास ही रमाशंकर ओझा की बांस की कोठी भी आग की भेंट चढ़ गई।

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    गांव के लोग बाल्टी में पानी भरकर आग बुझाने की कोशिश करते रहे, लेकिन तेज पछुआ हवा के सामने उनकी कोशिशें कमजोर पड़ती रहीं। आग गांव से निकलकर दूसरे इलाकों की तरफ बढ़ती चली गई। सबसे ज्यादा दर्द इस बात का है कि सूचना देने के बाद भी दमकल की गाड़ी समय पर नहीं पहुंची। जब तक फायर ब्रिगेड आई, तब तक आग कई गांवों को छू चुकी थी।

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    मेरा बेटा वीर है, उसने बच्चों की जान बचाई
    दिलीप की मां अस्पताल के बाहर बेटे के ठीक होने की दुआ मांग रही हैं। उनकी आंखों से आंसू थम नहीं रहे। वह बार-बार कह रही हैं, 'मेरा बेटा वीर है। उसने तीन बच्चों की जान बचाई। लेकिन अब वह खुद जिंदगी और मौत से जूझ रहा है। उनकी यह पीड़ा हर किसी को भीतर तक झकझोर रही है।

    दो घंटे बाद आई दमकल,तब तक कुशीनगर पहुंच चुकी थी आग
    घटना ने एक और गंभीर पहलू उजागर किया है। आग लगने के बाद स्थानीय लोगों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी, लेकिन दमकल की गाड़ी दो घंटे बाद पहुंची। तब तक आग ने रामूडीहा,रामपुर बुजुर्ग, रसूलपुर, सुरसर देवरी गांव होते हुए कुशीनगर जिले में प्रवेश कर गई। ग्रामीणों ने नहर से पानी लाकर आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।