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    गोरखपुर में भी हो सकती दिल्ली जैसी घटना, बिना NOC चल रहे सैकड़ों होटल-रेस्टोरेंट

    Updated: Thu, 04 Jun 2026 09:43 AM (IST)

    गोरखपुर में 600 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट में से केवल 212 के पास अग्निशमन विभाग का एनओसी है, जिससे दिल्ली जैसी आग लगने की घटना का खतरा बना हुआ है। कई ...और पढ़ें

    रेलवे स्टेशन पर लाइन से बने होटल और गेस्ट हाउस। जागरण

    रेलवे स्टेशन पर लाइन से बने होटल और गेस्ट हाउस। जागरण

    HighLights

    1. गोरखपुर में 600 से अधिक होटल-रेस्टोरेंट बिना एनओसी संचालित।

    2. केवल 212 प्रतिष्ठानों के पास अग्निशमन विभाग का अनापत्ति प्रमाण पत्र।

    3. अग्नि सुरक्षा उपकरणों, आपातकालीन निकास की कमी, बड़े हादसे का खतरा।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। जिले में होटल और रेस्टोरेंट कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन अग्नि सुरक्षा मानकों को लेकर स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अग्निशमन विभाग के आंकड़ों के अनुसार जनपद में 600 से अधिक होटल और रेस्टोरेंट संचालित हैं, जबकि इनमें से केवल 212 प्रतिष्ठानों के पास ही विभाग की अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) है। शेष प्रतिष्ठान बिना एनओसी के ही संचालित हो रहे हैं। तीन महीने पहले हुए सत्यापन के दौरान नोटिस देते हुए पर्यटन विभाग को सूचना दी गई थी।

    बावजूद इसके मुख्य मार्ग से लेकर गली, मोहल्लों में खुले ये होटल और रेस्टोरेंट धड़ल्ले से चल रहे है। किसी कारण वश इन होटलों और रेस्टोरेंट में आग लगी तो दिल्ली जैसी घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता। अग्निशमन विभाग में दर्ज आकड़े के अनुसार जिले में सिर्फ 24 प्रतिष्ठानों ने होटल श्रेणी में, 125 ने गेस्ट हाउस श्रेणी में और 63 रेस्टोरेंट ने एनओसी प्राप्त की है।

    हालांकि इनमें से कई प्रतिष्ठान होटल के रूप में संचालित किए जा रहे हैं। दूसरी ओर बड़ी संख्या में होटल और रेस्टोरेंट ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक अग्निशमन विभाग से अनुमति लेना भी जरूरी नहीं समझा है। बुधवार को दिल्ली में हुई घटना के बाद जागरण की पड़ताल में सामने आया कि कई प्रतिष्ठानों में अग्निशमन उपकरण, आपातकालीन निकास मार्ग, फायर अलार्म और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाएं मानकों के अनुरूप नहीं हैं।

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    ऐसे में किसी भी आपात स्थिति या आग लगने की घटना में बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। गोलघर में संचालित कई रेस्टोरेंट ने भूतल के साथ एक मंजिल और बना दिया है, ऊपर के मंजिल पर जाने के लिए भूतल के अंदर से एक सिढ़ी मात्र है। आग लगने पर मंजिल पर बैठ लोगों के निकासी के लिए अन्य कोई रास्ता नहीं है। यहीं हाल रेलवे और रोडवेज स्टेशन मार्ग पर स्थित होटलों का भी है।

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    यहां पर बाहर रेस्टोरेंत तो पीछे की तरफ स्थित होटलों में जाने के लिए कहीं पतला रास्ता है तो कहीं सीढ़ी है, जिससे लोगों को अंदर जाना होता है। ये सभी होटल अग्निशमन और पर्यटन विभाग के आसपास स्थित है। बावजूद इन विभागों में बैठे अधिकारी जांच और कार्रवाई की जहमत नहीं उठाते।

    अग्निशमन विभाग की तरफ से सिर्फ 24 होटल और 125 गेस्ट हाउस और 63 को रेस्टोरेंट के नाम पर एनओसी दिया गया है। पर्यटन विभाग को भी यहीं रिपोर्ट दी गई है। समय-समय पर अग्निशमन यंत्रों की जांच की जाती है। नहीं होने पर उन्हें नोटिस देने के साथ पर्यटन विभाग को भी सूचना दी जाती है। रजिस्ट्रेशन और कार्रवाई का अधिकार पर्यटन विभाग के पास है। पूर्व में हुए सत्यापन में जिले भर में 129 को नोटिस दिया गया था। एक बार फिर से सभी का सत्यापन कराया जाएगा।

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    -संतोष कुमार राय, सीएफओ