सुप्रीम आशा: बिटिया की पढ़ाई हो या पक्का मकान, पूरे होंगे अरमान
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से गोरखपुर के अनुदेशकों को 9 लाख रुपये तक का एरियर मिलने की उम्मीद जगी है। यह राशि उन्हें बेटियों की पढ़ाई, बहन की शादी और पक्क ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
गोरखपुर के अनुदेशकों को मिलेगा 9 लाख रुपये तक का एरियर।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले से बढ़े मानदेय का लाभ मिलेगा।
बेटियों की शिक्षा, शादी, घर बनाने के सपने होंगे पूरे।
प्रभात कुमार पाठक, गोरखपुर। मेरी दो बेटियां हैं। एक को इंजीनियर और दूसरी को डाक्टर बनाना चाहता हूं। एक का बीटेक में में दाखिला करा चुका हूं। दूसरी का दाखिला अभी कराना है। अगर नौ लाख रुपये के आसपास एरियर मिल गया तो उनकी पढ़ाई की चिंता काफी हद तक खत्म हो जाएगी।
कंपोजिट विद्यालय नारायणपुर, चारगांवा के अनुदेशक विक्रम सिंह यह कहते हुए भावुक हो उठते हैं। वर्षों तक सीमित मानदेय में परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाले विक्रम के लिए यह रकम सिर्फ बकाया नहीं, बल्कि उनकी बेटियों के उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद है।
विक्रम अकेले नहीं हैं। जिले के तमाम अनुदेशक ऐसे हैं, जिनके लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला सिर्फ मानदेय बढ़ने का आदेश नहीं, बल्कि वर्षों से अधूरे पड़े सपनों को पूरा करने का अवसर बनकर सामने आया है। यदि शासन जल्द आदेश जारी करता है तो वर्ष 2017-18 से बढ़े हुए 17 हजार रुपये मासिक मानदेय का लाभ मिलने के साथ प्रत्येक अनुदेशक को करीब नौ लाख रुपये तक का एरियर मिल सकता है। इन्हीं उम्मीदों के बीच कंपोजिट पूर्व माध्यमिक विद्यालय जमुनिया, भटहट के अनुदेशक रमाशंकर अपनी सबसे बड़ी चिंता साझा करते हैं।
वह बताते हैं कि परिवार की जिम्मेदारियों के कारण बहन की शादी लगातार टलती रही। अब एरियर मिलने की संभावना ने उनके चेहरे पर सुकून ला दिया है। उनका कहना है कि यह रकम बहन की शादी सम्मानपूर्वक संपन्न कराने में सबसे बड़ा सहारा बनेगी। उनके लिए यह फैसला केवल आर्थिक राहत नहीं, बल्कि परिवार के प्रति अपने दायित्व निभाने का अवसर है।
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उधर, कंपोजिट विद्यालय नबीपुर, भटहट के नरेंद्र प्रताप आजाद की प्राथमिकता भी परिवार ही है। उनका कहना है कि सबसे पहले बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाएंगे, ताकि आर्थिक अभाव उनके सपनों के आड़े न आए। इसके बाद वर्षों से अधूरे पड़े अपने दो कमरों के पक्के मकान का निर्माण शुरू करेंगे। वह कहते हैं कि अब पहली बार लग रहा है कि परिवार के लिए कुछ स्थायी कर पाने का मौका मिलेगा।
कंपोजिट उच्च प्राथमिक विद्यालय मौलाखोर, भटहट के सुजीत कुमार विश्वकर्मा भी भविष्य की नई तस्वीर देख रहे हैं। वह बताते हैं कि कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण घर की जरूरतें हमेशा प्राथमिकताओं में उलझी रहीं। स्थायी मकान बनवाने का सपना हर साल टलता गया। उनका मानना है कि एकमुश्त एरियर मिलने से न केवल आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि परिवार को अपना आशियाना भी मिल सकेगा।
जिले के 426 अनुदेशक होंगे लाभान्वित
जनपद के परिषदीय जूनियर हाई स्कूलों में कला, शारीरिक शिक्षा, कंप्यूटर और स्वास्थ्य शिक्षा विषय के 426 अनुदेशक कार्यरत हैं। वर्ष 2013 में नियुक्त इन अनुदेशकों ने एक दशक से अधिक समय तक मात्र सात हजार रुपये मासिक मानदेय पर सेवाएं दीं। मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर मामला न्यायालय पहुंचा, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2017-18 से बढ़े हुए मानदेय का लाभ देने का फैसला सुनाया।
अब सभी की निगाहें शासन के आदेश पर टिकी हैं। अनुदेशकों का कहना है कि उनके लिए यह एरियर सिर्फ बैंक खाते में आने वाली रकम नहीं है। यह उन सपनों की पूंजी है, जिन्हें उन्होंने आर्थिक मजबूरियों के कारण वर्षों तक टाल रखा था। वर्षों के संघर्ष के बाद उनके जीवन में उम्मीद की यह नई सुबह दस्तक देने को तैयार है।
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