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    गोरखपुर में साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश, म्यूल खातों का होता था इस्तेमाल

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 03:03 PM (GMT+05:30)

    गोरखपुर पुलिस और साइबर सेल ने किराये के बैंक खातों (म्यूल अकाउंट) का उपयोग कर साइबर ठगी करने वाले गिरोह की पहचान की है। एक दिव्यांग खाताधारक से मिली ज ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. गोरखपुर पुलिस ने साइबर ठगी के म्यूल अकाउंट गिरोह का पर्दाफाश किया।

    2. ठगी की रकम किराये के खातों में भेजकर निकाली जाती थी।

    3. दिव्यांग खाताधारक से मिली जानकारी पर चार संदिग्धों की पहचान हुई।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। किराये पर बैंक खाते (म्यूल अकाउंट) खुलवाकर साइबर ठगी की रकम इधर-उधर भेजने वाले गिरोह की पहचान करने में कोतवाली पुलिस और साइबर सेल को अहम सफलता मिली है। एक दिव्यांग खाताधारक से पूछताछ के दौरान मिले सुराग के आधार पर चार संदिग्धों की पहचान की गई है। पुलिस उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही है।

    जांच में सामने आया कि साइबर अपराधी ठगी से हासिल रकम सीधे अपने खातों में न लेकर किराये पर खुलवाए गए बैंक खातों में ट्रांसफर कराते थे। इसके बाद रकम को अलग-अलग खातों में भेजकर निकाल लिया जाता था, जिससे जांच एजेंसियों के लिए असली आरोपितों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता था। कोतवाली थाना पुलिस ने एक दिव्यांग खाताधारक से पूछताछ की। जिसके खाते में पांच लाख रुपये की लेनदेन हुई थी।

    उसके बयान और तकनीकी साक्ष्य के आधार पर पूरे नेटवर्क से जुड़े चार संदिग्ध युवकों की भूमिका सामने आई। इसके बाद कोतवाली पुलिस और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने उनकी तलाश तेज कर दी है। जांच में कई महत्वपूर्ण तकनीकी और वित्तीय सुराग भी मिले हैं, जिनके आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।

    करीब 15 दिन पहले भी कोतवाली थाना पुलिस ने म्यूल खाते खुलवाकर साइबर ठगी करने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया था। उस मामले में कई आरोपित गिरफ्तार किए गए थे, लेकिन गिरोह का सरगना अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

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    एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि साइबर ठगी की रकम म्यूल खातों में मंगाकर निकालने वाले गिरोह के बारे में जानकारी मिली है। कोतवाली थाना व साइबर सेल की टीम छानबीन कर रही है। जल्द ही पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जाएगा।

    कमीशन का भरोसा देकर खुलवाए गए खाते
    पुलिस जांच में पता चला कि गिरोह बेरोजगार, गरीब और जरूरतमंद लोगों को बैंक खाता खुलवाने या पहले से मौजूद खाते के इस्तेमाल के बदले कमीशन देने का झांसा देता था। कई लोगों को यह भी नहीं पता था कि उनके खाते का इस्तेमाल साइबर अपराध में किया जा रहा है। ठगी की रकम पहले इन खातों में भेजी जाती थी और फिर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर निकाल ली जाती थी।

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    क्या होता है म्यूल खाता
    साइबर अपराधी किसी दूसरे व्यक्ति के नाम पर खुला बैंक खाता या कमीशन के बदले इस्तेमाल के लिए लिया गया बैंक खाता म्यूल खाता कहलाता है। ठग साइबर ठगी से हासिल रकम सबसे पहले ऐसे खातों में ट्रांसफर करते हैं, ताकि रकम का वास्तविक स्रोत छिपाया जा सके। इसके बाद पैसे को कई अन्य खातों में भेजकर नकद निकाल लिया जाता है। कई बार खाताधारक मामूली कमीशन के लालच में अपना खाता उपलब्ध करा देते हैं।