महराजगंज के भरोसे गोरखपुर में बिजली, तीन साल में 12 किमी नहीं बना पाए लाइन
गोरखपुर में 60 करोड़ का पारेषण उपकेंद्र बनने के बावजूद कैंपियरगंज और सरहरी क्षेत्र तीन साल से 12 किलोमीटर बिजली लाइन न बनने के कारण महराजगंज पर निर्भर ...और पढ़ें

पीपीगंज के हरपुर में 65 करोड़ रुपये की लागत से बना है 132 केवी पारेषण उपकेंद्र। जागरण
HighLights
60 करोड़ का पारेषण उपकेंद्र तीन साल से बना।
12 किमी लाइन न बनने से कैंपियरगंज, सरहरी में बिजली संकट।
15 हजार से अधिक घरों को घंटों बिजली कटौती झेलनी पड़ रही।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बिजली निगम के अभियंताओं की लापरवाही से बगल में 60 करोड़ की लागत से बना पारेषण उपकेंद्र होने के बाद भी कैंपियरगंज और सरहरी क्षेत्र महराजगंज के भरोसे है। अभियंता तीन साल से 12 किलोमीटर लंबाई में लाइन नहीं बना पा रहे हैं।
इसका खामियाजा 15 हजार से ज्यादा घरों को भुगतना पड़ रहा है। महराजगंज के आनंदनगर पारेषण उपकेंद्र से जंगल के रास्ते आई लाइन, हल्की हवा चलने या वर्षा होने पर बंद हो जाती है। इससे घंटों बिजली आपूर्ति ठप रहती है।
महावनखोर संवाद सूत्र के अनुसार पीपीगंज के हरपुर में 60 करोड़ की लागत से तीन साल पहले पारेषण उपकेंद्र बन गया था। इससे पीपीगंज, सिंहोरवा, जंगल कौड़िया, सरहरी, नेतवर, सोनौरा, कैंपियरगंज ग्रामीण, टाउन आदि उपकेंद्रों को बिजली दी जानी थी।
पहले यहां बिजली महराजगंज के आनंदनगर पारेषण उपकेंद्र से दी जाती थी। हरपुर पारेषण उपकेंद्र से पीपीगंज, सिंहोरवा, जंगल कौड़िया, नेतवर व सोनौरा उपकेंद्र को आपूर्ति दी जा रही है लेकिन अब तक कैंपियरगंज ग्रामीण, टाउन व सरहरी वितरण उपकेंद्रों तक बिजली पहुंचाने के लिए लाइन नहीं बनाई जा सकी है।
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आनंदनगर से 40 किमली दूर सरहरी को दी जा रही है बिजली
आनंदनगर पारेषण उपकेंद्र के फरेंदा उपकेंद्र से कैंपियरगंज क्षेत्र के मछलीगांव, इंद्रपुर व भौराबारी फीडर को बिजली दी जाती है। आनंदनगर उपकेंद्र से 40 किमी दूर सरहरी उपकेंद्र को बिजली आपूर्ति की जाती है।
जंगल के रास्ते आती है बिजली
आनंदनगर से जंगल के रास्ते कैंपियरगंज को बिजली दी जाती है। वर्षा, हवा चलने के कारण कभी पेड़ की डाल गिर जाती है तो कभी लाइन में अन्य समस्या आ जाती है। इसके परिणामस्वरूप आपूर्ति ठप हो जाती है। इसे ठीक करने में घंटों लग जाते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत रात में होती है।
काम तेजी से पूरा कराया जा रहा है। 12 किलोमीटर में से सिर्फ पांच सौ मीटर लंबी लाइन बची है। 15 दिन में काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
-सुजीत गुप्ता, अधिशासी अभियंता, विद्युत माध्यमिक कार्यखंड