गोरखपुर में संवेदना के 'प्रदर्शन' में 'भूले' पीड़ित परिवार की वेदना, नियम भूलते दिख रहे हैं कुछ प्रदर्शनकारी और इनफ्लुएंसर
गोरखपुर में एक दुष्कर्म पीड़िता के लिए न्याय मांगते हुए प्रदर्शनकारियों और सोशल मीडिया पर उसकी पहचान सार्वजनिक करने का मामला सामने आया है। यह कृत्य का ...और पढ़ें

प्रदर्शन के दौरान जो बैनर और तख्तियां लोगों के हाथों में हैं उनमें पीड़िता और उसके परिवार की पहचान सार्वजनिक हो रही है। इसे ब्लर किया गया है। जागरण
HighLights
गोरखपुर में दुष्कर्म पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना कानूनी उल्लंघन।
प्रदर्शनकारियों और सोशल मीडिया इनफ्लुएंसरों ने नियम तोड़े।
विशेषज्ञों ने पीड़ित की निजता के सम्मान पर जोर दिया।
आशुतोष मिश्र, गोरखपुर। सिपाही की हैवानियत का शिकार बनी बिटिया के लिए न्याय मांगने को आल इंडिया महापद्मनन्द कम्युनिटी एजुकेटेड एसोसिएशन सड़क पर उतरा। पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कार्रवाई के लिए प्रदर्शन कर जिलाधिकारी को ज्ञापन दिया। संवेदना के इस "प्रदर्शन" में पीड़ित परिवार की वेदना पीछे छूट गई और दुष्कर्म पीड़िता व उसके परिवार की पहचान सार्वजनिक करने की "भूल" हो गई।
ऐसे मामलों में पीड़ित व उसके परिवार की पहचान जाहिर करने पर स्पष्ट कानूनी कार्रवाई का प्रविधान है। फिर भी गम और गुस्से के माहौल में कुछ प्रदर्शनकारी-इनफ्लुएंसर पीड़ित परिवार की पहचान खोल दे रहे हैं। एसोसिएशन के महानगर अध्यक्ष अमित शर्मा अपने संगठन को पीड़ित परिवार के साथ बताते हैं। नियमों का जिक्र करने पर भूल स्वीकारते हैं। सड़क पर हुए इस प्रदर्शन की तरह इंटरनेट मीडिया पर आक्रोश से भरी बहुत सी पोस्ट में ऐसे लापरवाही भरे व्यवहार का दर्शन हो रहा है।
कोई यूट्यूबर घटनास्थल से की गई रिपोर्ट में बिटिया की तस्वीर फ्लैश कर सिपाही की हैवानियत बयां कर रहा है, तो कई कंटेंट क्रिएटर अपनी पोस्ट में बालिका की तस्वीर साझा कर गए हैं। इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर घटना को लेकर लोगों में भरपूर आक्रोश है। रोष में होश खो बहुत से लोग कानूनी लक्ष्मण रेखा लांघ गए हैं।

इन पोस्ट में पीड़िता की साझा फोटो को हमने ब्लर किया है।- जागरण
एडवोकेट कृष्णानंद तिवारी कहते हैं कि इस तरह की लापरवाही को कानूनी दिक्कत में डाल सकती है। वहीं, गोरखपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के शिक्षक डा. मनीष पांडेय इसे लेकर चिंता जताते हैं। उनके मुताबिक, ऐसी घटनाओं को लेकर हमारे समाज में बहुत तेजी से भावुकता का प्रभाव बढ़ता है, जिसमें लोग प्राय: नियम और नैतिकता को भूल जाते हैं।
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उन्होंने कहा कि किसी भी मुद्दे पर संवेदनशीलता एवं भावुकता होने के साथ-साथ समझदारी भी बहुत आवश्यक है। कई घटनाएं ऐसी होती हैं जिसमें पीड़ित के प्रति समाज संवेदनशीलता तो रखता है, लेकिन सम्मान व समायोजन का भाव नहीं। इसलिए यह जरूरी है कि हम किसी भी सामूहिक हित से जुड़े मुद्दे पर कार्य करें, तो व्यक्तिगत निजता का सम्मान अवश्य रखें।