गोरखपुर राप्ती में तीन बच्चों की डूबने से मौत मामला: घाट से घर तक गूजती रहीं चीखें, गली में पसरा मातम
गोरखपुर के हंसूपुर मोहल्ले में राप्ती नदी में डूबने से तीन किशोरों की मौत हो गई, जिससे पूरे इलाके में मातम पसर गया। क्रिकेट खेलते हुए नदी किनारे पहुंच ...और पढ़ें

हरिजन बस्ती हांसुपुर में स्थित आवास पर रोते बिलखते परिजन। जागरण
HighLights
राप्ती नदी में तीन किशोरों की डूबकर मौत।
हंसूपुर मोहल्ले में शोक और मातम का माहौल।
नदी किनारे सुरक्षा बढ़ाने की मांग की गई।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। हांसूपुर मोहल्ले की एक ही गली में तीनों दोस्तों का घर है। मंगलवार की दोपहर तक सबके घर हंसी गूंज रही थी। मोहल्ले के लोग अपने रोजमर्रा के काम में व्यस्त थे। बच्चे गली में क्रिकेट खेल रहे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ घंटे बाद यही गली चीख-पुकार और मातम से भर जाएगी। राप्ती नदी में डूबने से तीन किशोरों की मौत के बाद पूरे मोहल्ले में ऐसा सन्नाटा पसरा कि हर आंख नम दिखाई दी।
स्थानीय लोगों के अनुसार चार लड़के नदी की तरफ गए थे। हादसे के बाद उनमें से एक लड़का मोहल्ले में आया और डूबने की जानकारी दी। इसके बाद वह फिर कहीं चला गया। पुलिस अब उसकी तलाश कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है। घटना की सूचना मिलते ही मोहल्ले के लोग भागते हुए राजघाट की तरफ दौड़ पड़े।
कोई बेटे का नाम पुकार रहा था तो कोई नदी किनारे खड़ा होकर दुआ मांग रहा था। घाट पर मौजूद लोगों ने बताया कि जब बच्चे डूबने लगे तो आसपास मौजूद लोग उन्हें बचाने की कोशिश करते रहे, लेकिन गहरे पानी में उतरने की किसी की हिम्मत नहीं हुई। देखते ही देखते तीनों बच्चे पानी में समा गए और लोग बेबस होकर यह दर्दनाक मंजर देखते रह गए।
सूचना के बाद राजघाट थाना पुलिस और एनडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची। नदी में सर्च आपरेशन शुरू हुआ। घंटों तक चली तलाश के दौरान घाट पर खड़े लोगों की नजरें सिर्फ पानी पर टिकी रहीं। हर किसी को उम्मीद थी कि शायद बच्चे जिंदा मिल जाएं। लेकिन जैसे ही पहला शव बाहर निकला, घाट पर खड़े लोगों की आंखों से आंसू बहने लगे।

हरिजन बस्ती हांसुपुर में स्थित आवास पर रोते बिलखते परिजन। जागरण
दूसरे और तीसरे शव के बाहर आते ही परिजनों का धैर्य टूट गया। माताएं अपने बच्चों का नाम लेकर रोती रहीं। कई महिलाएं बदहवास होकर जमीन पर गिर पड़ीं। कुछ को संभालने के लिए आसपास की महिलाओं को आगे आना पड़ा। सबसे ज्यादा दर्दनाक दृश्य उस गली में दिखाई दिया, जहां तीनों बच्चों के घर आसपास ही हैं।
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पूरी गली में सिर्फ रोने और चीखने की आवाजें सुनाई दे रही थीं। मोहल्ले के बुजुर्गों का कहना था कि उन्होंने एक साथ ऐसा दर्दनाक मंजर पहले कभी नहीं देखा। छोटे बच्चे भी सहमे हुए थे और चुपचाप अपने घरों के दरवाजे पर खड़े सब कुछ देख रहे थे।
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इरफान अपने दो भाइयों में बड़ा था। उसके पिता फकरुद्दीन मजदूरी करते हैं जबकि मां सोना गृहिणी हैं। परिवार जल्द ही लखनऊ शिफ्ट होने की तैयारी कर रहा था। इरफान की मौत के बाद घर में मातम पसरा हुआ था। उसकी दादी अरुननिशा बार-बार बेसुध होकर नदी की तरफ भागने लगती थीं। परिवार के लोग उन्हें पकड़कर वापस ला रहे थे।

हरिजन बस्ती हांसुपुर में स्थित आवास पर रोते बिलखते परिजन। जागरण
इरफान के पिता की आंखों से आंसू रुक नहीं रहे थे। वह बार-बार यही कह रहे थे कि अगर घर पर होते तो बेटे को नदी जाने ही नहीं देते। उनका कहना था कि बच्चे मोहल्ले में क्रिकेट खेल रहे थे। कब दोस्तों के साथ नदी की तरफ निकल गए, किसी को पता ही नहीं चला। अंश अपने दो भाई-बहनों में बड़ा था। बेटे की मौत के बाद पिता सुधीर पूरी तरह टूट गए हैं।
वह बार-बार यही कह रहे थे कि उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि बेटा खेलते-खेलते नदी की तरफ चला जाएगा। घर के बाहर लोगों की भीड़ लगी रही, लेकिन परिवार के किसी सदस्य के पास बोलने की ताकत नहीं बची थी। शक्ति गौतम तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। उसका परिवार एक कमरे के छोटे से मकान में रहता है।

हरिजन बस्ती हांसुपुर में स्थित आवास पर रोते बिलखते परिजन। जागरण
पिता मोहन गुप्ता मजदूरी करते हैं। मां सुभावती रो-रोकर बेहाल थीं। पिता का कहना था कि मोहल्ले के लड़कों के साथ खेलते हुए कब वह नदी में नहाने चला गया, इसकी जानकारी ही नहीं हुई। घटना के बाद पूरे मोहल्ले में मातम पसरा रहा। देर रात तक लोगों का आना-जाना लगा रहा।
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हर घर में सिर्फ इसी हादसे की चर्चा थी। कई लोगों ने प्रशासन से मांग की कि नदी किनारे सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए, चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं और खतरनाक घाटों पर निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।