गोरखपुर में आंधी-बारिश से थमी ट्रेनों की रफ्तार, बिजली गुल होने से यात्री परेशान
गोरखपुर में अचानक आई आंधी और तेज बारिश ने ट्रेनों के संचालन को बुरी तरह प्रभावित किया। बिजली के तार टूटने से गोरखधाम और सत्याग्रह एक्सप्रेस जैसी कई ट् ...और पढ़ें

HighLights
आंधी-बारिश से गोरखपुर में ट्रेन संचालन प्रभावित हुआ।
गोरखधाम, सत्याग्रह एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें रास्ते में फंसीं।
रेलवे स्टेशन पर यात्री भीगे, बिजली गुल, जलभराव हुआ।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। बुधवार की शाम अचानक आंधी और तेज बारिश के चलते ट्रेनों का संचालन भी प्रभावित हो गया। रेल लाइनों पर अचानक बिजली कट जाने से जो ट्रेनें जहां थी खड़ी हो गईं। गोरखपुर-लखनऊ रूट पर जो ट्रेनें जहां थीं वहीं रुक गईं। 12555 गोरखधाम एक्सप्रेस ट्रेन मगहर में रुकी रही। गोरखपुर से समय से चलने के बाद भी ट्रेन सवाल दो घंटे लेट से खलीलाबाद पहुंची। 15273 नंबर की सत्याग्रह एक्सप्रेस मुंडेरवा में करीब एक घंटे खड़ी रही। यात्री परेशान रहे।
अचानक आयी आंधी के चलते गोरखपुर- गोंडा रेल खंड के बस्ती- ओरवारा स्टेशन के बीच जगह-जगह पेड़ की डाली गिरकर रेल लाइनों के ओएचई (ओवर हेट इक्यूपमेंट) पर गिर गए। तारों पर पेड़ की डालियां गिरने से बिजली कट गई। गोरखपुर-गाेंडा रेल खंड पर अप और डाउन लाइन की बिजली कट गई। संबंधित रेलकर्मियों ने तारों में उलझी पेड़ की डालियों को हटाया तो ट्रेनों का संचालन सामान्य हुआ।
प्लेटफार्मों पर भीगे यात्री, फर्स्ट क्लास गेट के सामने लगा पानी
तेज बारिश के चलते रेलवे स्टेशन गोरखपुर के प्लेटफार्मों पर ट्रेनों का इंतजार कर रहे यात्री भीग गए। दरअसल, फुट ओवरब्रिज निर्माण और स्टेशन के पुनर्विकास के चलते प्लेटफार्म नंबर एक, तीन-चार, पांच-छह और नौ आदि के शेड उजाड़ दिए गए हैं।
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चारों तरफ नवनिर्माण कार्य चल रहे हैं। ऐसे में यात्री प्लेटफार्मों पर खुले आसमान के नीचे ही ट्रेनों का इंतजार करते हैं। अचानक आयी आंधी और तेज बारिश में यात्री परेशान हो उठे। धूल के चलते यात्रियों की आंखें भर गईं। पूरा स्टेशन धूल से भर गया। दिन में ही अंधेरा छा गया।
यात्रियों को छिपने की जगह नहीं मिल रही थी। बारिश में यात्री ही नहीं उनके सामान भी भीग गए। महिला, बच्चे और बुजुर्ग को मुश्किलों का सामना करना पड़ा। खानपान स्टालों पर तैनात वेंडरों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। आधी-पानी के चलते कुछ देर के लिए रेलवे स्टेशन की बिजली भी गायब हो गई।
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कई साइन बोर्ड और उपकरण आदि उखड़कर हवा में उड़ गए। बिजली कटने से एस्केलेटर भी बंद हो गया। फर्स्ट क्लास गेट के सामने पानी भर गया। जल निकासी नहीं होने के चलते देर रात तक पानी जमा रहा। यात्री ही नहीं रेलकर्मी भी पानी में भीगते हुए आवागमन करते रहे।