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    राप्ती नदी का पानी बुझाएगा गोरखपुर की प्यास, वार्डों के सर्वे के बाद होगी नई शुरुआत; पायलट प्रोजेक्ट को मिली मंजूरी

    Updated: Thu, 30 Jul 2026 07:18 PM (IST)

    गोरखपुर नगर निगम ने भूजल पर निर्भरता कम करने के लिए राप्ती नदी के पानी से शहर की प्यास बुझाने की पायलट परियोजना को मंजूरी दी है। इसके तहत चार वार्डों ...और पढ़ें

    इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

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    HighLights

    1. राप्ती नदी के पानी से शहर को मिलेगी जलापूर्ति।

    2. चार वार्डों में पायलट परियोजना की होगी शुरुआत।

    3. भूजल संरक्षण हेतु 500 वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनेंगे।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। नगर निगम अब भूजल पर निर्भरता कम कर राप्ती नदी के पानी से शहर की प्यास बुझाने की दिशा में कदम बढ़ाने जा रहा है। गुरुवार को नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में चार वार्डों में सरफेस वाटर (नदी के जल) से जलापूर्ति की पायलट परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया गया।

    इसके तहत राप्ती नदी से जुड़े श्रीराम चौक, बसंतपुर, महर्षि दधीचिनगर और माधोपुर वार्डों का सर्वे कराया जाएगा। जिस वार्ड में परियोजना की लागत सबसे कम आएगी, वहीं सबसे पहले इसे लागू किया जाएगा।
    गुरुवार को महापौर के कांफ्रेंस हाल में आयोजित नगर निगम कार्यकारिणी की बैठक में पूनम सिंह के उपसभापति चुने जाने के अलावा शहर के विकास संबंधित कई परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई।

    इसमें राप्ती नदी के पानी को पेयजल के रूप में घर-घर पहुंचाने की योजना को हरी झंडी दे दी गई। महापौर डा. मंगलेश कुमार श्रीवास्तव की अध्यक्षता में हुई बैठक में समाजवादी पार्टी के कार्यकारिणी सदस्य जिलाउल इस्लाम ने राप्ती नदी के पानी को पेयजल के रूप में लोगों के घरों तक पहुंचाने का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी सदस्यों का समर्थन मिला।

    अशोक कुमार मिश्रा, राजेंद्र तिवारी सहित अन्य सदस्यों ने भी परियोजना को शहर के भविष्य के लिए उपयोगी बताया। जलकल महाप्रबंधक रघुवेंद्र कुमार ने बताया कि पूर्व में उत्तर प्रदेश जल निगम ने इस योजना का सर्वे कराया था, लेकिन अधिक लागत के कारण इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका। अब सीमित क्षेत्र में पायलट परियोजना के रूप में इसकी व्यवहार्यता परखने का निर्णय लिया गया है।

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    उन्होंने बताया कि नदी के पानी को पेयजल बनाने के लिए वाटर ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित करना होगा, जिस पर प्रति एमएलडी क्षमता के लिए करीब 2.50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। एक एमएलडी संयंत्र से लगभग 500 घरों तक जलापूर्ति की जा सकती है। सर्वे रिपोर्ट आने के बाद परियोजना की लागत, क्षमता और क्रियान्वयन की रूपरेखा तय की जाएगी। इससे भविष्य में शहर में भूजल दोहन कम करने और वैकल्पिक जल स्रोत विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है।

    उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली को कार्यकारिणी की मंजूरी

    कार्यकारिणी ने उत्तर प्रदेश जन्म एवं मृत्यु रजिस्ट्रीकरण नियमावली, 2026 को स्वीकृति प्रदान कर दी। हालांकि समाजवादी पार्टी के पार्षद जियाउल इस्लाम और चंद्रभान प्रजापति ने नियमावली के तहत विलंब शुल्क में की गई बढ़ोतरी का विरोध किया। नियमावली के अनुसार जन्म या मृत्यु के लिए आवेदन करते वक्त विलंब शुल्क को 100 रुपये तक बढ़ा दिया गया है।

    भूगर्भ जल संरक्षण के लिए 500 स्थानों पर बनेंगे वाटर हार्वेस्टिंग पिट

    कार्यकारिणी की बैठक में भूगर्भ जल संरक्षण पर भी चर्चा हुई। नगर निगम प्रशासन के द्वारा बताया गया कि महानगर के सभी 80 वार्डों में करीब 2.50 करोड़ की लागत से 500 वाटर हार्वेस्टिंग पिट बनाने की शुरुआत कर दी गई है। प्रत्येक वाटर हार्वेस्टिंग पिट के निर्माण पर लगभग 50 हजार रुपये खर्च किए जाएंगे।

    इन पिटों के निर्माण से वर्षा जल का संरक्षण होगा और भूगर्भ जल स्तर को बनाए रखने में मदद मिलेगी। कार्यकारिणी को यह भी जानकारी दी गई कि वर्तमान में नगर निगम क्षेत्र के 126 भवनों में ही वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में नई परियोजना के माध्यम से वर्षा जल संरक्षण को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है।

    आरओ प्लांट और वाहन धुलाई केंद्रों पर भी अनिवार्य होगा वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम

    कार्यकारिणी समिति की बैठक में आरओ प्लांट और वाहन धुलाई केंद्रों पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम अनिवार्य रूप से लागू कराने पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में वर्तमान में 108 आरओ प्लांट और 38 वाहन धुलाई केंद्र पंजीकृत हैं, लेकिन इनमें से किसी भी प्रतिष्ठान ने अब तक नियमानुसार वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित नहीं किया है। इस पर कार्यकारिणी सदस्यों ने नियमावली का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने की मांग उठाई। महापौर डा. मंगलेश श्रीवास्तव ने भी सदस्यों की मांग का समर्थन करते हुए संबंधित अधिकारियों को नियमों का प्रभावी पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए।

    नक्शा परियोजना के तहत 58.09 वर्ग किमी क्षेत्र में फील्ड सर्वेक्षण को मंजूरी

    कार्यकारिणी ने नक्शा परियोजना के तहत 58.09 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फील्ड सर्वेक्षण कराने के प्रस्ताव को अनुमोदित कर दिया। अपर नगर आयुक्त गौरव रंजन श्रीवास्तव ने बताया कि परियोजना के तहत वार्ड सीमाओं के निर्धारण के लिए 91.95 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का एरियल सर्वेक्षण पहले ही पूरा किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि अब जोन-1 के पांच वार्डों में 13.57 वर्ग किमी, जोन-2 के आठ वार्डों में 13.67 वर्ग किमी, जोन-3 के आठ वार्डों में 3.06 वर्ग किमी, जोन-4 के 10 वार्डों में 12.88 वर्ग किमी तथा जोन-5 के 10 वार्डों में 14.73 वर्ग किमी क्षेत्र का फील्ड सर्वेक्षण कराया जाएगा। कुल मिलाकर 41 वार्डों के 58.09 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में यह कार्य किया जाएगा।

    नए वार्डों में बिछेगी पाइपलाइन, स्थापित होंगे ट्यूबवेल

    बैठक में कार्यकारिणी के सदस्यों ने जलकल द्वारा नए वार्डो में जलापूर्ति विस्तार और ट्यूबवेलों की स्थापना का मसला उठाया। आरोप लगाया कि आए दिन शिकायत मिल रही है। ऐसे मामलों में जवाबदेही तय कर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई हो। लोहियानगर के पार्षद राजेंद्र कुमार तिवारी ने कहा कि वार्ड के विभिन्न इलाकों में गंदा पानी आ रहा है। पुरानी पाइपलाइनों को बदलने की आवश्यकता है।

    कई अन्य कार्यकारिणी सदस्यों ने भी पेयजल की समस्या दूर करने की मांग की। इस पर नगर आयुक्त अजय जैन ने भी कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश दिए। बैठक में अपर नगर आयुक्त प्रमोद कुमार, अतुल कुमार, गौरव रंजन श्रीवास्तव समेत निगम के अन्य अधिकारी शामिल रहे।