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    गोरखपुर में 1200 से पूछताछ, 75 आशाओं का बयान... फिर भी नहीं हुई मां-बेटी के शव की पहचान

    Updated: Sat, 04 Jul 2026 07:41 AM (IST)

    गोरखपुर के गुलरिहा में नाले से मिले महिला और बच्ची के शव की पहचान तीन महीने बाद भी नहीं हो पाई है, जिससे पुलिस की जांच उलझ गई है। पुलिस ने 1200 से अधि ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. गोरखपुर में महिला और बच्ची के शव की पहचान नहीं।

    2. पुलिस ने 1200 से अधिक लोगों से पूछताछ की है।

    3. अस्पतालों के डिलीवरी रिकॉर्ड, आशा बहुओं के बयान खंगाले गए।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। हत्या के बाद नाले में दफनाई गई महिला व करीब तीन माह की बच्ची के शव की पहचान तीन माह बाद भी नहीं हुई है। पहचान के अभाव में जांच लगातार उलझती जा रही है। गुलरिहा थाना पुलिस इस मामले में अब तक 1200 से अधिक लोगों से पूछताछ, 75 आशा बहुओं का बयान, 100 से ज्यादा संदिग्ध मोबाइल नंबरों की जांच करने के साथ ही तीन माह के भीतर जन्मी बच्चियों का रिकार्ड खंगाल चुकी है लेकिन कोई सुराग नहीं मिला।

    30 अप्रैल 2026 को जैनपुर गांव के चोरहिया नाले में शव मिलने के बाद पहचान के लिए गुलरिहा थाना पुलिस ने जिले के सभी थानों में दर्ज गुमशुदगी और अपहरण के मामलों का मिलान किया। इस दौरान करीब 1200 लोगों से पूछताछ की गई। इसके अलावा पड़ोसी जिलों महराजगंज और कुशीनगर में दर्ज गुमशुदगी के मामलों से जुड़े लगभग 200 परिजनों से मोबाइल फोन पर संपर्क कर महिला और बच्ची के बारे में बात की।

    जांच को आगे बढ़ाते हुए पुलिस ने स्वास्थ्य विभाग का भी सहारा लिया। घटना से तीन माह पहले के दौरान जिले के सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में हुई बच्चियों की डिलीवरी का रिकार्ड मंगाया गया। सीएचसी और पीएचसी में दर्ज जन्म संबंधी दस्तावेजों का सत्यापन कराया गया। पुलिस टीम संबंधित पतों पर पहुंची तो सभी नवजात बच्चियां सुरक्षित मिलीं।

    इससे पुलिस का संदेह और गहरा गया कि महिला और बच्ची गोरखपुर की नहीं, बल्कि किसी दूसरे जिले या राज्य की हो सकती हैं। तकनीकी पहलुओं पर छानबीन करते हुए पुलिस ने घटनास्थल उसके आसपास सक्रिय रहे मोबाइल नंबरों की काल डिटेल और लोकेशन का विश्लेषण किया। ईंट-भट्ठों पर काम करने वाले मजदूरों और प्रवासी परिवार से भी पूछताछ की गई, लेकिन ऐसा व्यक्ति सामने नहीं आया जो महिला या बच्ची की पहचान कर सके।

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    एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि महिला और बच्ची की पहचान नहीं होने से विवेचना प्रभावित हो रही है। पहचान होने पर हत्या के कारण और आरोपितों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। पुलिस की चार टीम हर संभावित पहलू पर छानबीन चल रही है।