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    गोरखपुर वासियों के लिए खुशखबरी, इस मानसून जलभराव से मिलेगी राहत, जून तक बन जाएगा गोड़धोइया नाला

    Updated: Thu, 05 Feb 2026 09:19 AM (IST)

    गोरखपुर में 495 करोड़ की गोड़धोइया नाला परियोजना निर्णायक चरण में है, जिससे इस मानसून से पहले शहर की बड़ी आबादी को जलभराव से राहत मिलेगी। 82% काम पूरा ...और पढ़ें

    गोड़धोइया नाला परियोजना के पूरा होने से आधे शहर की जलभराव संबंधी समस्या होगी खत्म। जागरण

    गोड़धोइया नाला परियोजना के पूरा होने से आधे शहर की जलभराव संबंधी समस्या होगी खत्म। जागरण

    HighLights

    1. 495 करोड़ की गोड़धोइया नाला परियोजना निर्णायक चरण में।

    2. इस मानसून से पहले जलभराव से मिलेगी बड़ी राहत।

    3. लगभग साढ़े तीन लाख आबादी को होगा सीधा लाभ।

    जागरण संवाददाता, गोरखपुर। इस वर्ष मानसून के दस्तक देने से पहले ही शहर की बड़ी आबादी को जलभराव से जुड़ी समस्या से बड़ी राहत मिल जाएगी। 495 करोड़ रुपये की लागत से चल रही गोड़धोइया नाला परियोजना अब निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है।

    परियोजना की भौतिक प्रगति 82 प्रतिशत हो चुकी है और जून 2026 तक इसके पूर्ण होने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पूरा होते ही शहर के उत्तरी छोर के करीब डेढ़ दर्जन वार्डों में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान हो जाएगा।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्राथमिकता वाली इस परियोजना का उद्देश्य गोरखपुर को स्वच्छ, सुंदर और जलभराव मुक्त बनाना है। कभी अतिक्रमण और गंदगी के कारण विलुप्त होने की कगार पर पहुंच चुके गोड़धोइया नाले को पक्का नाला, इंटरसेप्शन, डायवर्जन और ट्रीटमेंट के माध्यम से पुनर्जीवित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री स्वयं निर्माण कार्य की प्रगति का कई बार स्थलीय निरीक्षण कर चुके हैं।

    परियोजना के अंतर्गत 9.25 किमी लंबाई में पक्का नाला, 38 एमएलडी क्षमता का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी), 17.94 किमी इंटरसेप्टिंग सीवर लाइन, 18 ब्रिज व कल्वर्ट तथा 61 एमएलडी क्षमता के 15 मेन पंपिंग स्टेशन बनाए जा रहे हैं। अब तक 8.35 किमी नाले का निर्माण, 7.1 किमी सीवर लाइन बिछाने और 11 कल्वर्ट का कार्य पूरा हो चुका है। एसटीपी का निर्माण भी 83 प्रतिशत तक हो गया है।

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    जल निगम (शहरी) के अधिशासी अभियंता पंकज कुमार के अनुसार, बचे हुए कार्यों को तेजी से पूरा किया जा रहा है ताकि मानसून से पहले अधिकतम राहत दी जा सके। परियोजना के पूरा होने पर करीब साढ़े तीन लाख की आबादी को जलभराव से निजात मिलेगी।

    इस परियोजना के तहत बिछिया, शाहपुर, बशारतपुर, राप्तीनगर, लोहिया नगर, जंगल नकहा सहित कई इलाकों से निकलने वाले सीवेज को एसटीपी में शोधित कर रामगढ़ताल में प्रवाहित किया जाएगा। इससे न केवल जलभराव की समस्या समाप्त होगी, बल्कि नाले के कैचमेंट क्षेत्र में आने वाली कालोनियों में स्वच्छता और पर्यावरणीय सुधार भी सुनिश्चित होगा।