यूपी के एक ही शहर से चलती हैं ये दोनों वंदे भारत ट्रेनें, एक दौड़ती है खाली तो दूसरी में दिखती है वेटिंग
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर से चलने वाली समर स्पेशल ट्रेनों के साथ वंदे भारत एक्सप्रेस भी खाली चल रही है। गोरखपुर-प्रयागराज वंदे भारत में 25- ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
गोरखपुर-प्रयागराज वंदे भारत में सीटें खाली
महंगा किराया और समय यात्रियों को नहीं भा रहा
गोरखपुर-पाटलिपुत्र वंदे भारत पूरी तरह भरी
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर से बनकर चलने वाली समर स्पेशल ट्रेनें ही नहीं, सेमी हाईस्पीड ट्रेन वंदे भारत भी खाली ही चल रही हैं। इसे महंगा किराया, गोरखपुर से लखनऊ तक अन्य ट्रेनों व सड़क मार्ग से सीधी कनेक्टिविटी या यात्रियों के अनुसार सही समय से नहीं चल पा रही।
लग्न और पर्यटन के समय भी गोरखपुर-अयोध्या-लखनऊ-प्रयागराज वंदे भारत पूरी तरह भर नहीं पा रही है। गोरखपुर की तरफ से तो यात्री मिल भी जा रहे हैं, वापसी में संख्या और कम हो जा रही है। जहां अन्य नियमित ट्रेनों में कन्फर्म और वेटिंग टिकट के लिए मारामारी मची है, वहीं गोरखपुर से प्रयागराज जाने वाली 22549 वंदे भारत की 25 से 30 प्रतिशत सीटें खाली चल रही हैं।
प्रयागराज से गोरखपुर आने वाली 22550 वंदे भारत में 35 से 40 प्रतिशत सीटें खाली हो जाती हैं। जुलाई, अगस्त और सितंबर आदि महीनों में खाली सीटों की संख्या 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ जाती हैं। सुविधा संपन्न 16 कोच वाली यह वंदे भारत को अभी भी यात्रियों का इंतजार है।
वंदे भारत ट्रेन में कुल 1125 सीटें उपलब्ध हैं, इसके बाद भी सभी सीटें नहीं भर पा रही हैं। जबकि, गोरखपुर से लखनऊ व दिल्ली रूट पर चलने वाली अन्य नियमित ट्रेनों में वेटिंग टिकट के लिए भी मारामारी मची रहती है। कन्फर्म टिकट के लिए लोग परेशान रहते हैं।
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दरअसल, यात्रियों की संख्या बढ़ाने के लिए ही रेलवे बोर्ड ने गोरखपुर-अयोध्या-लखनऊ वंदे भारत को प्रयागराज तक विस्तार दिया। प्रयागराज तक चलने के बाद भी उम्मीद के हिसाब से यात्रियों की संख्या नहीं बढ़ सकी। आज भी एक हजार से कम यात्री ही ट्रेन में बैठते हैं।
11 मई को प्रयागराज जाने वाली वंदे भारत में 794 लोगों ने तो गोरखपुर आने वाली ट्रेन में 616 लोगों ने यात्रा की। प्रयागराज से आने वाली वंदे भारत में एक सप्ताह में 64 से 65 प्रतिशत सीटें ही भर पायी हैं। जबकि, प्रयागराज जाने वाली ट्रेन में 71 से 72 प्रतिशत सीटें ही भरी रहीं।
गोरखपुर से जाने वाली वंदे भारत में आठ मई को सिर्फ एक दिन एक हजार से अधिक लोगों ने यात्रा की, जबकि सप्ताह के अन्य दिनों में यात्रियों की संख्या पांच सौ के बीच ही रही। जून के बाद यात्रियों की संख्या और कम हो जाएगी। सात जुलाई, 2023 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गोरखपुर जंक्शन से पहली वंदे भारत को हरी झंडी दिखाई थी। आने वाले दिनों में वंदे भारत और अमृत भारत ट्रेनें ही चलाई जानी है।
भरकर चल रही गोरखपुर-पाटलीपुत्र वंदे भारत
गोरखपुर-प्रयागराज वंदे भारत की सीटें जहां खाली चल रही हैं, वहीं गोरखपुर-पाटलीपुत्र के बीच चलने वाली 26501/02 नंबर की वंदे भारत भरकर दौड़ रही है। अक्सर, वेटिंग टिकट की स्थिति बन जाती है। एक सप्ताह में इस ट्रेन की 95 प्रतिशत सीटें भरी रहीं।
गोरखपुर से पाटलिपुत्र जाने वाली वंदे भारत में 11 मई को 541 व दस मई को 558 लोगों ने यात्रा की। आठ कोच वाली इस ट्रेन में 523 सीटें हैं। गोरखपुर से बेतिया और मुजफ्फरपुर के बीच यह ट्रेन पूरी तरह भरकर चलती हैं। देश के कोने-कोने से गोरखपुर पहुंचने वाले बेतिया और मुजफ्फरपुर के लोगों के लिए वंदे भारत बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान कर रही है।