गोरखपुर के महेसरा ईकोलॉजिकल पार्क में ही बनेगा पूर्वांचल कला ग्राम, पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगी नई पहचान
गोरखपुर के महेसरा ईकोलॉजिकल पार्क में 'पूर्वांचल कला ग्राम' विकसित किया जाएगा। यह परियोजना पूर्वांचल की लोक कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को बढ़ावा देने ...और पढ़ें

प्रकृति के बीच जीवंत होगी पूर्वांचल की संस्कृति, कलाकारों और शिल्पकारों को मिलेगा नया मंच। जागरण
HighLights
महेसरा ईकोलॉजिकल पार्क में पूर्वांचल कला ग्राम बनेगा।
लोक कला, हस्तशिल्प और संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा।
कलाकारों, शिल्पकारों और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर।
जागरण संवाददाता, गोरखपुर। गोरक्षनगरी को पर्यटन और सांस्कृतिक विरासत के क्षेत्र में एक नई पहचान मिलने जा रही है। महेसरा में लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में विकसित हो रहे ईकोलाजिकल पार्क के भीतर अब 'पूर्वांचल कला ग्राम' भी बनाया जाएगा। विशेषज्ञों की टीम ने निगम की इस योजना पर मुहर लगा दी है।
इस परियोजना का उद्देश्य पूर्वांचल की लोक कला, हस्तशिल्प, संगीत, संस्कृति और पारंपरिक जीवन शैली को एक ही परिसर में सहेजना और उसे पर्यटन से जोड़ना है। नगर आयुक्त अजय जैन ने परियोजना का निरीक्षण के बाद अधिकारियों को इस संबंध में कार्य योजना बनाने के निर्देश दिए हैं।
गोरखनाथ मंदिर, रामगढ़ताल और शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणी उद्यान के बाद महेसरा ईकोलाजिकल पार्क और पूर्वांचल कला ग्राम शहर का नया पर्यटन केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। पार्क में प्राकृतिक वातावरण के साथ सांस्कृतिक गतिविधियों का अनूठा संगम पर्यटकों को एक अलग अनुभव देगा। इससे गोरखपुर के पर्यटन मानचित्र को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।
कला ग्राम को इस तरह विकसित किया जाएगा कि यहां आने वाले पर्यटकों को पूर्वांचल की सांस्कृतिक विविधता का प्रत्यक्ष अनुभव मिल सके। परिसर में टेराकोटा शिल्प, लकड़ी और बांस की कारीगरी, पारंपरिक बुनाई, मिट्टी की कला, लोक संगीत, लोक नृत्य तथा अवधी और भोजपुरी संस्कृति की झलक एक ही स्थान पर देखने को मिलेगी। पारंपरिक ग्रामीण परिवेश की झांकी, स्थानीय व्यंजन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी इसकी प्रमुख विशेषताएं होंगी।
कलाकारों और शिल्पकारों को मिलेगा स्थायी मंच
पूर्वांचल कला ग्राम स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों के लिए रोजगार का नया केंद्र बनेगा। यहां शिल्पकार अपने उत्पाद सीधे पर्यटकों को बेच सकेंगे, जिससे बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी। लोक कलाकारों को नियमित सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर मिलेगा।
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300 से 500 दर्शकों की क्षमता वाले ओपन एयर एम्फीथिएटर में बिरहा, कजरी, फगुआ, सोहर, नौटंकी और भजन संध्या आयोजित होगी। पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए गाइड, खानपान, परिवहन और अन्य सेवाओं में भी रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
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फोटो विलेज बनेगा फोटोग्राफी का पसंदीदा डेस्टिनेशन
मुख्य अभियंता अमित शर्मा के मुताबिक परियोजना में विशेष ‘फोटो विलेज’ विकसित किया जाएगा, जहां गांव, चौपाल, आंगन और पारंपरिक घरों की थीम पर तैयार सेट होंगे। यह स्थान प्री-वेडिंग शूट, सोशल मीडिया कंटेंट, फैशन और विज्ञापन शूट के लिए क्षेत्र का प्रमुख केंद्र बन सकता है।
कला ग्राम में पारंपरिक थीम पर आधारित लान और आयोजन स्थल भी विकसित किए जाएंगे। यहां विवाह, सांस्कृतिक आयोजन, कार्पोरेट कार्यक्रम और पारिवारिक समारोह आयोजित किए जा सकेंगे। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां और पारंपरिक सजावट इसे अन्य आयोजन स्थलों से अलग पहचान देंगी।
आधुनिक सुविधाओं के साथ पारंपरिक स्थापत्य शैली का समावेश कर इसे पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान के अनुरूप विकसित किया जाएगा। परियोजना पूरी होने के बाद महेसरा ईकोलाजिकल पार्क केवल हरियाली और मनोरंजन का केंद्र नहीं रहेगा, बल्कि पूर्वांचल की सांस्कृतिक विरासत, कला और पर्यटन का प्रमुख आकर्षण बनकर गोरखपुर की नई पहचान स्थापित करेगा।
-अजय जैन, नगर आयुक्त