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    रेलवे बोर्ड का बड़ा फैसला: अब कर्मचारियों के घरों में भी लगेंगे स्मार्ट मीटर, यूनियन में रोष

    Updated: Thu, 25 Jun 2026 02:27 PM (IST)

    रेलवे बोर्ड ने मैनुअल रीडिंग खत्म करने और केंद्रीकृत निगरानी के लिए रेलवे आवासों सहित सभी परिसरों में स्मार्ट/प्रीपेड मीटर लगाने का निर्देश दिया है। इ ...और पढ़ें

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण

    HighLights

    1. रेलवे बोर्ड ने स्मार्ट/प्रीपेड मीटर लगाने के निर्देश दिए।

    2. कर्मचारी आवासों सहित सभी रेलवे परिसर होंगे शामिल।

    3. कर्मचारी संगठन इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं।

    प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। रेलवे बोर्ड ने बिजली प्रबंधन व्यवस्था में बड़ा बदलाव करते हुए पूरे रेलवे नेटवर्क को स्मार्ट मीटर आधारित निगरानी प्रणाली से जोड़ने का निर्णय लिया है। बोर्ड की निदेशक विद्युत अभियांत्रिकी निशा मनोहर पाटिल ने 19 जून के अपने आदेश में वर्ष 2020 की पूर्व नीति को निरस्त करते हुए रेलवे आवासों, वेंडरों, निजी ठीकेदारों के कार्यालयों, रेस्तरां, यूनियन कार्यालयों समेत उन सभी परिसरों में स्मार्ट अथवा प्रीपेड मीटर लगाने के निर्देश दिए गए हैं, जहां रेलवे बिजली उपभोग का शुल्क वसूलता है।

    पहली बार कर्मचारी आवासों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया गया है। रेलवे का कहना है कि नई व्यवस्था से मैनुअल रीडिंग और मानवीय हस्तक्षेप खत्म होगा, बिजली खपत का रियल टाइम डाटा उपलब्ध होगा और पूरे नेटवर्क में केंद्रीकृत ऊर्जा निगरानी तंत्र विकसित किया जा सकेगा।

    बोर्ड की निदेशक ने कहा है कि इसके पूर्व वेंडरों, ठीकेदारों के कार्यालय, रेस्टोरेंट और यूनियन कार्यालय जैसे प्रतिष्ठानों में प्रीपेड मीटर लगाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन रेलवे स्टाफ क्वार्टरों को इससे बाहर रखा गया था। अब रेलवे बोर्ड ने तीन जून, 2020 की पूर्व नीति को निरस्त करते हुए स्पष्ट किया है कि रेलवे स्टाफ क्वार्टर, वेंडरों, ठीकेदारों के कार्यालय, रेस्टोरेंट, यूनियन कार्यालय सहित सभी ऐसे परिसरों में स्मार्ट या प्रीपेड मीटर लगाए जाएंगे, जहां बिजली उपयोग का शुल्क रेलवे द्वारा वसूला जाता है।

    यह दिशा-निर्देश रेलवे बोर्ड के सदस्य (ट्रैक्शन एवं रोलिंग स्टाक) की मंजूरी से जारी किया गया है। आवश्यकता के अनुसार इस कार्य को जोनल स्तर पर स्वीकृति देकर पूरा किया जा सकता है। रेलवे आवासों और रेलवे परिसरों में चरणबद्ध तरीके से स्मार्ट एवं प्रीपेड मीटर लगाया जा सकता है। रेलवे बोर्ड के इस फैसले से कर्मचारी संगठनों में आक्रोश है। एनई रेलवे मजदूर यूनियन (नरमू) ने प्रीपेड मीटर को लेकर नाराजगी जतायी है।

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    यूनियन के महामंत्री बसंत चतुर्वेदी का कहना है कि बोर्ड का यह निर्णय कर्मचारी विरोधी है। प्रदेश सरकारें जहां प्रीपेड मीटर की जगह पोस्टपेड मीटर लगा रही हैं। वहीं, रेलवे बोर्ड कर्मचारियों पर प्रीपेड मीटर थोपने की साजिश रच रहा है। यूनियन जल्द ही आल इंडिया रेलवे मेंस फेडेशन (एआइआरएफ) के महासचिव शिव गोपाल मिश्रा को पत्र लिखकर अपना विरोध प्रदर्शित करेगी।

    इस प्रकरण को रेल मंत्रालय व बोर्ड तक पहुंचाते हुए बिजली व्यवस्था को यथावत रखने की मांग करेगी। यूनियन के महामंत्री ने रेलवे बोर्ड से बिहार राज्य में तैनात रेलकर्मियों को भी 125 यूनिट बिजली फ्री देने की मांग की है। उनका कहना है कि बिहार में प्रत्येक उपभोक्ता को 125 यूनिट बिजली निश्शुल्क मिल रही है, लेकिन रेलवे कर्मचारी राज्य सरकार की इस व्यवस्था से वंचित हैं।