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नेपाल में 321 रोहिंग्या शरणार्थी लापता भारत के लिए खतरा बनी खुली सीमा, सुरक्षा एजेंसियां चौकन्ना

By Vishwa Deepak Tripathi/Satish PandeyEdited By: Vivek Shukla
Published: Sat, 08 Aug 2026 07:27 AM (IST)

नेपाल के रास्ते भारत में घुसपैठ और 321 रोहिंग्या शरणार्थियों के लापता होने से सुरक्षा एजेंसियां चौकन्ना हैं। खुली सीमा ...और पढ़ें

रुपंदेही जिले की रोहिणी गांव पालिका में तुर्किए की संस्था द्वारा लगाया गया हैंडपंप l जागरण

रुपंदेही जिले की रोहिणी गांव पालिका में तुर्किए की संस्था द्वारा लगाया गया हैंडपंप l जागरण

HighLights

  1. 321 रोहिंग्या शरणार्थी नेपाल से लापता, भारत के लिए चिंता।

  2. नेपाल के रास्ते भारत में घुसपैठ की आशंका, एजेंसियां सतर्क।

  3. खुली सीमा का फायदा उठाकर बढ़ रही आपराधिक गतिविधियां।

विश्वदीपक त्रिपाठी/सतीश पांडेय, गोरखपुर। नेपाल के रास्ते भारत में हो रही घुसपैठ ने सुरक्षा एजेंसियों को चौकन्ना कर दिया है। 11 मार्च 2025 को महराजगंज के निचलौल में बांग्लादेशी सैफुल इस्लाम और पांच सितंबर 2024 को गोरखपुर के बरगदवां में मोहम्मद खुकन मियां व रुबेल अहमद की गिरफ्तारी ने इस खतरे की पुष्टि की। 2019 में नेपाल में शरणार्थी बन कर आए 321 रोहिंग्या अभी तक लापता हैं।

आशंका जताई जा रही है कि इनमें से कुछ लोग पहचान बदलकर नेपाल में हो सकते हैं या भारत भी जा सकते हैं। पर्यटक वीजा पर नेपाल आए पाकिस्तान, बांग्लादेश व तुर्किए के 722 लोगों का पता न लगना भी सुरक्षा एजेंसियों के लिए चिंता का कारण है। बीते दो वर्षों में नेपाल सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश करते समय बांग्लादेश समेत नीदरलैंड, चीन, ईरान, ब्राजील, श्रीलंका, जर्मनी, ब्रिटेन और उज्बेकिस्तान के दो दर्जन से अधिक नागरिक पकड़े जा चुके हैं।

तुर्किए के सहयोग से भारतीय सीमा से सटे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मस्जिदों व मदरसों का निर्माण हुआ है। नेपाल की राजधानी काठमांडू के आसपास भी रोहिंग्या परिवारों के रहने की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ परिवारों को संयुक्त राष्ट्र की ओर से शरणार्थी का दर्जा मिला हुआ है। सुरक्षा एजेंसियां उनके दस्तावेज और गतिविधियों की जांच कर रही हैं। इसके लेकर नेपाल के स्थानीय संगठनों और राजनीतिक दलों का विरोध बढ़ रहा है।

उनका आरोप है कि अनियंत्रित घुसपैठ से नेपाल की जनसंख्या संरचना, रोजगार, संसाधनों और आंतरिक सुरक्षा पर दबाव बढ़ रहा है। कई स्थानों पर इसे लेकर आंदोलन और प्रदर्शन भी हुए हैं। दिसंबर 2025 में मिले नेपाल बार्डर (एनबी) शाखा के खुफिया इनपुट में बताया गया कि काठमांडू के बुढ़ानीलकंठ और लसुनटार क्षेत्र में 600 से 700 रोहिंग्या, बांग्लादेशियों ने अस्थायी शिविर बना लिए हैं, जो भारत में घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं।

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वर्ष 1950 की भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि के तहत दोनों देशों के नागरिकों को बिना पासपोर्ट और वीजा के आवागमन की सुविधा मिली है। इसी का लाभ उठाकर मानव तस्करी, फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और अन्य आपराधिक नेटवर्क भी सक्रिय रहते हैं।

विभिन्न सीमाओं से नेपाल में घुसे 526 रोहिंग्या
काठमांडू स्थित पुलिस मुख्यालय में शुक्रवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में प्रवक्ता अभिनारायण काफ्ले ने बताया कि हाल के दिनों में विभिन्न सीमा नाकों से 526 रोहिंग्या के नेपाल में प्रवेश करने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने बताया कि नेपाल में प्रवेश करने वालों में 162 पुरुष, 148 महिलाएं और 216 बच्चे शामिल हैं। ये लोग नेपाल के कपन, राममंदिर और ललितपुर के सुनाकोठी क्षेत्र में रह रहे हैं।