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नेपाल में सड़क बहने से फंसा राजस्थान के 60 तीर्थयात्रियों का समूह, बच्चों और बुजुर्गों संग बस में कट रही रातें

Updated: Tue, 01 Sep 2026 02:11 AM (IST)

नेपाल में सड़क बहने से राजस्थान के 60 तीर्थयात्री कृष्णभीर में फंस गए हैं, जिन्हें बस में रातें बितानी पड़ ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर।

प्रतीकात्मक तस्वीर।

HighLights

  1. राजस्थान के 60 तीर्थयात्री नेपाल के कृष्णभीर में फंसे।

  2. सड़क बहने के कारण बस में रातें गुजारने को मजबूर।

  3. स्थानीय प्रशासन ने रास्ता खुलने में 15 दिन लगने की बात कही।

रजनीश त्रिपाठी, जागरणधादिंग (नेपाल)। आंखों के सामने सड़क खत्म हो गई है और उसके साथ ही इन तीर्थयात्रियों की आगे की राह भी। काठमांडू से करीब 65 किलोमीटर दूर कृष्णभीर में रास्ता कट जाने से राजस्थान के कोटा और बारा से आया तीर्थयात्रियों का समूह अपनी बस के साथ फंस गया है। बस आगे नहीं जा सकती और पीछे लौटना भी आसान नहीं। राशन खत्म होने को है। रात में ठहरने के लिए कोई जगह नहीं मिल रही।

सड़क पर लोग रहने नहीं दे रहे। बस ही अब इनके लिए रात गुजारने का एकमात्र सहारा है। समूह में बुजुर्ग हैं, बच्चे, महिलाएं और बेटियां भी। महिलाओं और बच्चियों के लिए खुले में या सड़क किनारे रात काटने की स्थिति अलग चिंता पैदा कर रही है। स्थानीय पुलिस-प्रशासन से पूछने पर जवाब मिलता है कि पुल और रास्ता बनने में कम से कम 15 दिन लग सकते हैं।

यात्रियों के सामने सवाल है कि क्या सचमुच अगले 15 दिन इसी बस में बैठकर काटने होंगे? बद्रीलाल मीणा कहते हैं, बस में महिलाएं, बच्चियां और बच्चे हैं। ऐसी स्थिति में 15 दिन कैसे काटेंगे, कुछ समझ नहीं पा रहे। हनुमान सिंह कहते हैं, पुल जल्दी बनने की उम्मीद भी नहीं है।

प्रशासन 15 दिन से पहले रास्ता खुलने को मुश्किल बता रहा है। हम यहां इतने दिन कैसे रुकेंगे और बच्चों-बुजुर्गों को कैसे संभालेंगे?29 अगस्त को नेपाल में प्रवेश करने वाला यह समूह लंबी तीर्थयात्रा पर निकला था। बागेश्वर धाम, चित्रकूट, अयोध्या, काशी विश्वनाथ और गोरखनाथ के दर्शन करने के बाद सोनौली के रास्ते नेपाल पहुंचा था।

पशुपतिनाथ के दर्शन के बाद बिहार, झारखंड, कामाख्या, ओडिशा और गंगासागर होते हुए लौटने का कार्यक्रम था। कृष्णाभीर में रास्ता कटने के बाद पूरी यात्रा अचानक अनिश्चितता में फंस गई है। नाथूलाल मीना कहते हैं, हमें कहा जा रहा है कि बस छोड़कर छोटी गाड़ियां मंगाकर काठमांडू से हटौंडा वाले वैकल्पिक रास्ते से निकल जाएं। लेकिन, इतनी छोटी गाड़ियां एक साथ कहां से आएंगी?

बस में इतने लोग हैं, हर पांच-छह लोगों के लिए अलग गाड़ी चाहिए होगी। इतना पैसा कहां से लाएं? रामस्वरूप मीना कहते हैं, मान लीजिए किसी तरह सोनौली पहुंच भी गए तो वहां से आगे कैसे जाएंगे, यह भी पता नहीं। बस यहीं छोड़ दें तो सामान का क्या होगा और यात्रा कैसे पूरी होगी, कोई रास्ता समझ में नहीं आ रहा। धादिंग से गल्छी होते हुए गजुरी मार्ग पर खड़ी बस अब सिर्फ वाहन नहीं, इस समूह का अस्थायी घर बन गई है।

भीतर सामान के बीच बुजुर्ग और बच्चे बैठे हैं, बाहर टूटी सड़क और बंद रास्ता है। यात्रियों के पास सिर्फ इंतजार है। वे बार-बार रास्ता खुलने की जानकारी पूछ रहे हैं और आपस में यही सवाल कर रहे हैं, अगर 15 दिन तक रास्ता नहीं खुला तो क्या होगा?

तीर्थयात्रा पर निकला यह समूह अब दर्शन और यात्रा के अगले पड़ाव की नहीं, सुरक्षित घर लौटने की चिंता में दिन काट रहा है। गजुरी गांव पालिका के अध्यक्ष गणेश लाल श्रेष्ठ बताते हैं कि किसी अतिथि को परेशानी नहीं होने दी जाएगी। तीर्थयात्रियों के समूह को नवनिर्मित गांव पालिका भवन में ठहराने का इंतजाम किया जा रहा है। वापसी तो रास्ता बनने के बाद ही संभव हो पाएगी।

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