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नेपाल से आए परिवार ने भारत में बनवाए आधार और पैन कार्ड, खुफिया रिपोर्ट के बाद जांच तेज

Published: Sun, 20 Sep 2026 04:35 AM (IST)Updated: Sun, 20 Sep 2026 07:10 AM (IST)

भारत-नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर में नेपाल मूल के एक परिवार द्वारा भारतीय दस्तावेज बनवाने का मामला सामने आया है। ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. नेपाल मूल के परिवार ने बनवाए भारतीय दस्तावेज।

  2. बलरामपुर में सात-आठ साल से रह रहा था परिवार।

  3. खुफिया रिपोर्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच शुरू की।

सतीश पांडेय, गोरखपुर। भारत-नेपाल सीमा से सटे बलरामपुर के एक गांव में करीब सात-आठ वर्ष से रह रहे नेपाल मूल के परिवार के सदस्यों के भारतीय दस्तावेज बनवाकर भारतीय नागरिक के रूप में रहने का मामला सामने आया है। इसकी जानकारी अभिसूचना इकाई की नेपाल बार्डर शाखा की रिपोर्ट से हुई है, जिसे पुलिस मुख्यालय भेजा गया है।

रिपोर्ट के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए यह पता लगाना शुरू कर दिया है कि परिवार के भारतीय दस्तावेज किस आधार पर बने और इन्हें बनवाने में किसकी मदद मिली। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित पर जालसाजी का मुकदमा दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी।

नेपाल बार्डर से महज तीन किलोमीटर दूर स्थित कपिलवस्तु, विजयनगर क्षेत्र के रहने वाले परिवार का मुखिया करीब 15 वर्ष पहले रोजगार के सिलसिले में भारत आया था। करीब सात-आठ वर्ष से वह नेपाल बार्डर से थोड़ी दूरी पर स्थित बलरामपुर के नावडीह क्षेत्र में रह रहा है। इसी दौरान परिवार के सदस्यों ने आधार, पैन और वोटर कार्ड बनवा लिया।

अभिसूचना इकाई की रिपोर्ट में इसका उल्लेख है। भारतीय स्टेट बैंक की शाखा में बैंक खाता होने के साथ यूपीआई और ई-मेल के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई है। बैंक खाता खुलवाने में कौन से दस्तावेज लगाए गए और उनका सत्यापन किस स्तर पर हुआ, पुलिस इसकी जानकारी जुटा रही है। मूल और स्थायी निवास में कुछ ही किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद नेपाल से भारत में आकर बसने की वजह भी तलाशी जा रही है।

भारत-नेपाल सीमा से सटे सिद्धार्थनगर जिले में भी एक परिवार पर भारतीय और नेपाली दोनों देशों के दस्तावेज रखने का आरोप सामने आ चुका है। जांच के दौरान परिवार के सदस्यों के पास दोनों देशों से जुड़े पहचान संबंधी दस्तावेज होने की बात सामने आई थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने भारतीय दस्तावेजों के आधार और नेपाल से जुड़े पहचान प्रमाणों की पड़ताल की थी।

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