चिकित्सा प्रतिपूर्ति में अनियमित भुगतान पर रेलवे बोर्ड सख्त, पिछले एक साल के रिकॉर्ड की जांच के दिए आदेश
रेलवे बोर्ड ने चिकित्सा प्रतिपूर्ति में अनियमित भुगतान पर सख्त रुख अपनाया है, खासकर गोरखपुर के एलएनएम अस्पताल में एक बाहरी व्यक्ति द्वारा छह साल तक अव ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर
HighLights
गोरखपुर अस्पताल में बाहरी व्यक्ति ने 6 साल तक किया दुरुपयोग।
रेलवे बोर्ड ने अनियमित भुगतान पर सख्त निर्देश जारी किए।
बिना दस्तावेजों के चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर रोक, जांच के आदेश।
प्रेम नारायण द्विवेदी, गोरखपुर। ललित नारायण मिश्र केंद्रीय रेलवे अस्पताल (एलएनएम) गोरखपुर के चिकित्सकों और कर्मचारियों ने बाहरी व्यक्ति का न सिर्फ मेडिकल पास बनाया, बल्कि रेफर लेटर जारी कर एम्स में 34 बार इलाज भी करा दिया। अशोक कुमार सिंह नाम का व्यक्ति (नॉन रेलवे) वर्ष 2014 से 2019 तक लगातार छह वर्ष अवैध रूप से एलएनएम से जारी मेडिकल पास और रेफर लेटर का दुरुपयोग करता रहा।
संदेह पर रेलवे की विजिलेंस टीम ने जांच की तो पर्दाफाश हुआ। इधर, हाल के दिनों में भारतीय रेलवे स्तर पर इंटीग्रेटेड पेरोल एंड एकाउंटिंग सिस्टम (आईपीएएस) से की गई बिना दस्तावेज चिकित्सा प्रतिपूर्ति ने निगरानी और वित्तीय नियंत्रण की पोल खोल दी है।
अनियमित भुगतान का मामला सामने आने के बाद रेलवे बोर्ड ने सख्ती बढ़ा दी है। बोर्ड ने सभी जोनल रेलवे को स्पष्ट कर दिया है कि बिना आवश्यक मेडिकल दस्तावेज और विधिवत प्रस्तुत क्लेम के किसी भी प्रकार का भुगतान स्वीकार्य नहीं होगा।
रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक (वित्त) रजत अग्रवाल ने 16 जुलाई 2026 को लिखे पत्र में सभी प्रधान वित्तीय सलाहकारों से कहा है कि यह सुनिश्चित किया जाए कि बिना पूर्ण सहायक दस्तावेज और उचित सत्यापन के कोई भी प्रतिपूर्ति क्लेम दर्ज या स्वीकृत न हो। साथ ही, पिछले एक वर्ष के पेरोल रिकार्ड की विशेष जांच कर ऐसे सभी अनाधिकृत या अनियमित भुगतानों की पहचान कर उन्हें रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए।
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उन्होंने बताया है कि एक मामले में आईपीएएस के माध्यम से चिकित्सा प्रतिपूर्ति का भुगतान आवश्यक मेडिकल दस्तावेजों और विधिवत प्रस्तुत क्लेम के अभाव में ही दर्ज और प्रोसेस कर दिया गया। इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता मानते हुए बोर्ड ने सभी प्रधान वित्तीय सलाहकारों को नियंत्रण व्यवस्था तत्काल मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।
बिना पूर्ण दस्तावेजों और सक्षम सत्यापन के कोई भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति क्लेम न तो दर्ज किया जाएगा और न ही पारित किया जाएगा। साथ ही एस्टेब्लिशमेंट बिलों की जांच संबंधी मौजूदा चेकलिस्ट और रेलवे बोर्ड द्वारा समय-समय पर जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करना होगा।
बोर्ड के संयुक्त निदेशक ने साइबर और वित्तीय सुरक्षा को भी गंभीरता से लेते हुए सभी रेलवे इकाइयों को यूजर आईडी, पासवर्ड अथवा अन्य लॉगिन क्रेडेंशियल किसी भी स्थिति में साझा नहीं करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि सभी जोन और उत्पादन इकाइयों में व्यापक समीक्षा कर नियंत्रण प्रणाली की कमियों की पहचान की जाएगी।
आईपीएएस पेरोल मॉडयूल या मौजूदा कंट्रोल फ्रेमवर्क में किसी भी प्रकार की कमी मिलने पर उसकी रिपोर्ट दो सप्ताह के भीतर रेलवे बोर्ड को भेजनी होगी, ताकि आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जा सके।
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